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अमर उजाला संवाद में बोली महिलाएं
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भदोही। नगर के बुनियाद कान्वेंट स्कूल परिसर में शनिवार को ‘अमर उजाला’ ‘संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नगर की महिलाओं ने बिजली पानी मुहैया कराने से लेकर अपनी सुरक्षा तक के सवाल उठाए। कहा कि नए सांसद से अपेक्षा है कि सर्वप्रथम भदोही नगर में बालिकाओं की उच्च शिक्षा का प्रबंध करेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए काम करेंगे। लोंगो ने कहा कि ऐसे बहुत से कार्य हैं जो शुरू होकर भी अधूरे पड़े हैं। सरकार बनने के बाद सबसे पहले उन कार्यों को पूर्ण करना होगा।
‘संवाद’ के दौरान महिलाओं ने अधिकतर समय शिक्षा क्षेत्र में भदोही के पिछड़ेपन पर बातचीत की। कहा कि सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती है तो सबसे पहले पिछड़े जनपदों की सूची बनाए। इसके बाद आवश्यकतानुरूप शिक्षण संस्थाएं बनवाए। इंदु गुप्ता ने कहा कि निजी हास्टल में बच्चों को पढ़ाना हमारे बस का नहीं है। सरकार राजकीय हास्टल की व्यवस्था कर शिक्षण व्यवस्था बेहतर कर सकती है। नगमा बानो ने कहा कि हमारे माता पिता चाह कर भी हमे पढ़ा नहीं पाते। नूरीन खां ने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावक परेशान रहते हैं। सुरक्षा की व्यवस्था कराना सर्वोपरि होना चाहिए।
शाजिया बानो ने कहा कि आज हमारे सामने ढांचागत समस्याएं मुंह बाए खड़ी है। बारिश में जलभराव की समस्या रहती है। उसे दूर करना होगा। रईसा ने कहा कि भदोही अपना औद्योगिक स्वरूप खोता जा रहा है। कालीन उद्योग महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करता था लेकिन आज स्थिति बिगड़ गई है। संगीता खन्ना ने लोगों के सामने जात-धर्म से उपर उठ कर मतदान करने का आग्रह किया। यह भी कहा कि चाहे जितनी गर्मी हो इस बात का ध्यान देना है कि हम सबको हर हाल में मतदान करना है। सीमा खत्री ने कहा कि अमर उजाला का संवाद कार्यक्रम सराहनीय है। अखबार के माध्यम से विभिन्न समस्याओं को उजागर करने के साथ ही इसे जनप्रतिनिधियों और सरकार तक पहुंचाने का काम हो रहा है। आंचल मौर्या, शीरीन कमाल, इंदु गुप्ता, सीमा खत्री, नगमा बानो, रूबी, सलीमुनन, बदरुन्निसा, नाजमा बेगम ने भी विचार व्यक्त किए।
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सस्ते दर पर उपलब्ध कराएं सैनिटरी पैड
सैनिटरी पैड हर मां और बालिका की आवश्यकता है। अगर सरकार स्वच्छता अभियान के प्रति गंभीर है तो उसे सैनिटरी पैड को सस्ती कीमत पर हर घर को उपलब्ध कराना चाहिए। यह समाज की बड़ी आवश्यकता है जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। ऐसा करना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि गरीबों के सामने भारी मजबूरी हो जाती है। अर्चना गुप्ता, गृहणी
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साफ सफाई के लिए इमानदार प्रयास करें
साफ सफाई के क्षेत्र में इमानदार प्रयास नहीं हुए हैं। हमारे घर के आसपास मुर्गी पालन होता हैं। वहां से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है। जो भी नई सरकार बने वह शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाए। इतना ही नहीं अभियान गंभीर हो ताकि लोगों को गंदगी से निजात मिले। पुनीता मौर्या, गृहणी
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यातायात व्यवस्था बेहतर बनाए नए सांसद
आज हम बीसवीं सदी में चल रहे हैं। लेकिन नई सरकार को देखना होगा कि हमारे आसपास की सड़कें चौड़ी और वर्तमान की आवश्यकता के अनुरूप है या नहीं। नगरीय क्षेत्रों में सड़क संकरी तो है ही पैदल चलने के लिए पटरी तक नहीं है। इससे मार्निग वाक पर निकलने में दुर्घटना का भय रहता है। नए प्रतिनिधि से नई व्यवस्था की अपेक्षा करती हूं। प्रतिमा गुप्ता, गृहणी
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राजकीय अस्पतालों की दशा सुधारें भावी सांसद
मैं दूसरे जनपदों में राजकीय अस्पतालों में मुफ्त दवाएं मिलती हैं। इतना ही नहीं राजकीय अस्पतालों में निजी अस्पतालों जैसी सुविधाएं मिलती हैं। जहां गरीब मजदूर, बुनकरों पर उपचार का भार नहीं होता। यह व्यवस्था अपने जिले में कब होगा मैं यह अपने भावी सांसद के समक्ष रखना चाहती हूं। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर कर वे बुनियादी सुविधाएं बेहतर कर सकते हैं। अनिता गुप्ता, गृहणी
उद्योग को बेहतर कर दूर करेंगे बेरोजगारी
नगर में रोजगार की समस्या बढती जा रही है। इस ओर ध्यान देना होगा। कितनी महिलाएं कालीन कारोबार से जुड़ कर अपना और परिवार का पेट पालती थी। कालीन उद्योग को बढ़ावा देने से बेरोजगारी भी दूर होगी। हमारी नई सरकार ऐसी हो जो उद्योंगों और उद्यमियों के विकास पर ध्यान दे। ढांचागत व्यवस्था सुधारने से समस्याएं अपने आप दूर होंगी। नए सांसद को इस ओर ध्यान देना होगा। रईसा, गृहणी
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नई सरकार अथवा नए जनप्रतिनिधि को लोगों के मन में बसे असुरक्षा की भावना को खत्म करने के लिए काम करना होगा। आज देश में महिलाओं की दशा दयनीय है। महिलाएं खुल कर काम पर नहीं जा सकती। रात को काम से वापस वे निडर हो कर आ सके ऐसा माहौल कायम करना होगा। इसके अलावा महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और अपराध रोकने के लिए पुलिस को 24 घंटे सक्रिय रखना होगा। इति खत्री, गृहणी
‘संवाद’ के दौरान महिलाओं ने अधिकतर समय शिक्षा क्षेत्र में भदोही के पिछड़ेपन पर बातचीत की। कहा कि सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती है तो सबसे पहले पिछड़े जनपदों की सूची बनाए। इसके बाद आवश्यकतानुरूप शिक्षण संस्थाएं बनवाए। इंदु गुप्ता ने कहा कि निजी हास्टल में बच्चों को पढ़ाना हमारे बस का नहीं है। सरकार राजकीय हास्टल की व्यवस्था कर शिक्षण व्यवस्था बेहतर कर सकती है। नगमा बानो ने कहा कि हमारे माता पिता चाह कर भी हमे पढ़ा नहीं पाते। नूरीन खां ने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावक परेशान रहते हैं। सुरक्षा की व्यवस्था कराना सर्वोपरि होना चाहिए।
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शाजिया बानो ने कहा कि आज हमारे सामने ढांचागत समस्याएं मुंह बाए खड़ी है। बारिश में जलभराव की समस्या रहती है। उसे दूर करना होगा। रईसा ने कहा कि भदोही अपना औद्योगिक स्वरूप खोता जा रहा है। कालीन उद्योग महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करता था लेकिन आज स्थिति बिगड़ गई है। संगीता खन्ना ने लोगों के सामने जात-धर्म से उपर उठ कर मतदान करने का आग्रह किया। यह भी कहा कि चाहे जितनी गर्मी हो इस बात का ध्यान देना है कि हम सबको हर हाल में मतदान करना है। सीमा खत्री ने कहा कि अमर उजाला का संवाद कार्यक्रम सराहनीय है। अखबार के माध्यम से विभिन्न समस्याओं को उजागर करने के साथ ही इसे जनप्रतिनिधियों और सरकार तक पहुंचाने का काम हो रहा है। आंचल मौर्या, शीरीन कमाल, इंदु गुप्ता, सीमा खत्री, नगमा बानो, रूबी, सलीमुनन, बदरुन्निसा, नाजमा बेगम ने भी विचार व्यक्त किए।
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सस्ते दर पर उपलब्ध कराएं सैनिटरी पैड
सैनिटरी पैड हर मां और बालिका की आवश्यकता है। अगर सरकार स्वच्छता अभियान के प्रति गंभीर है तो उसे सैनिटरी पैड को सस्ती कीमत पर हर घर को उपलब्ध कराना चाहिए। यह समाज की बड़ी आवश्यकता है जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। ऐसा करना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि गरीबों के सामने भारी मजबूरी हो जाती है। अर्चना गुप्ता, गृहणी
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साफ सफाई के लिए इमानदार प्रयास करें
साफ सफाई के क्षेत्र में इमानदार प्रयास नहीं हुए हैं। हमारे घर के आसपास मुर्गी पालन होता हैं। वहां से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है। जो भी नई सरकार बने वह शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाए। इतना ही नहीं अभियान गंभीर हो ताकि लोगों को गंदगी से निजात मिले। पुनीता मौर्या, गृहणी
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यातायात व्यवस्था बेहतर बनाए नए सांसद
आज हम बीसवीं सदी में चल रहे हैं। लेकिन नई सरकार को देखना होगा कि हमारे आसपास की सड़कें चौड़ी और वर्तमान की आवश्यकता के अनुरूप है या नहीं। नगरीय क्षेत्रों में सड़क संकरी तो है ही पैदल चलने के लिए पटरी तक नहीं है। इससे मार्निग वाक पर निकलने में दुर्घटना का भय रहता है। नए प्रतिनिधि से नई व्यवस्था की अपेक्षा करती हूं। प्रतिमा गुप्ता, गृहणी
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राजकीय अस्पतालों की दशा सुधारें भावी सांसद
मैं दूसरे जनपदों में राजकीय अस्पतालों में मुफ्त दवाएं मिलती हैं। इतना ही नहीं राजकीय अस्पतालों में निजी अस्पतालों जैसी सुविधाएं मिलती हैं। जहां गरीब मजदूर, बुनकरों पर उपचार का भार नहीं होता। यह व्यवस्था अपने जिले में कब होगा मैं यह अपने भावी सांसद के समक्ष रखना चाहती हूं। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर कर वे बुनियादी सुविधाएं बेहतर कर सकते हैं। अनिता गुप्ता, गृहणी
उद्योग को बेहतर कर दूर करेंगे बेरोजगारी
नगर में रोजगार की समस्या बढती जा रही है। इस ओर ध्यान देना होगा। कितनी महिलाएं कालीन कारोबार से जुड़ कर अपना और परिवार का पेट पालती थी। कालीन उद्योग को बढ़ावा देने से बेरोजगारी भी दूर होगी। हमारी नई सरकार ऐसी हो जो उद्योंगों और उद्यमियों के विकास पर ध्यान दे। ढांचागत व्यवस्था सुधारने से समस्याएं अपने आप दूर होंगी। नए सांसद को इस ओर ध्यान देना होगा। रईसा, गृहणी
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नई सरकार अथवा नए जनप्रतिनिधि को लोगों के मन में बसे असुरक्षा की भावना को खत्म करने के लिए काम करना होगा। आज देश में महिलाओं की दशा दयनीय है। महिलाएं खुल कर काम पर नहीं जा सकती। रात को काम से वापस वे निडर हो कर आ सके ऐसा माहौल कायम करना होगा। इसके अलावा महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और अपराध रोकने के लिए पुलिस को 24 घंटे सक्रिय रखना होगा। इति खत्री, गृहणी