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बच्चों को बचपन से दें भक्ति की सीख
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जंगीगंज। क्षेत्र के सोनैचा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कथा वाचक आचार्य रुद्रेश मिश्र महराज ने गोवर्धन पूजा के महत्व को समझाया। कहा भगवान का स्थान भी देव पूज्य तुल्य होता है। ध्रुव चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। इसलिए परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य और संयम नितांत आवश्यक है। कहा बचपन से ही बच्चों को भक्ति करने की प्रेरणा देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है। इसके लिए श्रीमद्भागवत में सर्वश्रेष्ठ उपायों का वर्णन किया गया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया। प्रह्लाद चरित्र के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास था कि मेरे भगवान लोहे के खंभे में भी हैं। उनके इस भरोसे को कायम रखने के लिए भगवान उसमें से प्रकट हुए। इस मौके पर आचार्य लक्ष्मी शंकर तिवारी, सूबे महराज, शिवाकांत मिश्र, रामहिंस पांडेय, विनोद पांडेय, सभापति, मानिक लाल, धनीलाल, मार्कंडेय प्रसाद, अखिलेश, अरविंद आदि रहे।
उन्होंने कहा कि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है। इसके लिए श्रीमद्भागवत में सर्वश्रेष्ठ उपायों का वर्णन किया गया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया। प्रह्लाद चरित्र के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास था कि मेरे भगवान लोहे के खंभे में भी हैं। उनके इस भरोसे को कायम रखने के लिए भगवान उसमें से प्रकट हुए। इस मौके पर आचार्य लक्ष्मी शंकर तिवारी, सूबे महराज, शिवाकांत मिश्र, रामहिंस पांडेय, विनोद पांडेय, सभापति, मानिक लाल, धनीलाल, मार्कंडेय प्रसाद, अखिलेश, अरविंद आदि रहे।
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