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साहित्यकार की मनाई जयंती,बांटी मिठाई
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लालानगर। मोदनवाल समाज की ओर से बुधवार को नगर स्थि त कैंप कार्यालय में साहित्यकार एवं कवि जयशंकर प्रसाद की जयंती धूमधाम से मनाकर मिठाइयां बांटी गईं। वक्ताओं ने कहा कि जिसने खड़ी बोली को पहचान दिलाने का कार्य किया वह समाज के आदर्श हैं।
डॉ. आनंद मोदनवाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जयशंकर प्रसाद ने कविता, नाटक, कहानी, निबंध, उपन्यास में अपनी अमिट छाप छोड़ कर नाटक के क्षेत्र में विशेष योगदान दि या। दरअसल उपन्यास की दुनिया में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद का है वही स्थान हिंदी नाटक साहित्य में जयशंकर प्रसाद को भी हासिल है। सज्जन, कल्याणी, परिणय, करुणालय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जन्मेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कंदगुप्त, ध्रुव स्वामिनी, अग्निमित्र, चंद्रगुप्त उनके प्रमुख नाटक रहे हैं। कई नाटक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित हैं जिनके जरिए सांस्कृतिक चेतना जगाने की कोशिश की गई। पात्रों के संवादों में दर्शन, फिलॉस्पी की झलक मिलती है। मनुष्य जीवन की समस्याओं और मन की उलझनों को भी साहित्यकार ने अपनी रचनाओं में बखूबी उभारा है। इस मौके पर सभासद संतोष मोदनवाल, दिलीप मोदनवाल, दीपक मोदनवाल, रत्नेश मोदनवाल, सालिकराम, भरतलाल, धीरेंद्र मोदनवाल, नितिन कुमार, विजय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. आनंद मोदनवाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जयशंकर प्रसाद ने कविता, नाटक, कहानी, निबंध, उपन्यास में अपनी अमिट छाप छोड़ कर नाटक के क्षेत्र में विशेष योगदान दि या। दरअसल उपन्यास की दुनिया में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद का है वही स्थान हिंदी नाटक साहित्य में जयशंकर प्रसाद को भी हासिल है। सज्जन, कल्याणी, परिणय, करुणालय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, अजातशत्रु, जन्मेजय का नागयज्ञ, कामना, स्कंदगुप्त, ध्रुव स्वामिनी, अग्निमित्र, चंद्रगुप्त उनके प्रमुख नाटक रहे हैं। कई नाटक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित हैं जिनके जरिए सांस्कृतिक चेतना जगाने की कोशिश की गई। पात्रों के संवादों में दर्शन, फिलॉस्पी की झलक मिलती है। मनुष्य जीवन की समस्याओं और मन की उलझनों को भी साहित्यकार ने अपनी रचनाओं में बखूबी उभारा है। इस मौके पर सभासद संतोष मोदनवाल, दिलीप मोदनवाल, दीपक मोदनवाल, रत्नेश मोदनवाल, सालिकराम, भरतलाल, धीरेंद्र मोदनवाल, नितिन कुमार, विजय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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