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कोरोना के चलते 40 हजार मनरेगा मजदूर बेरोजगार
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ज्ञानपुर। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर ने मनरेगा मजदूरों के हाथ को रोक दिया है। जिससे 288 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से होने वाले कामकाज ठप हो गए हैं। ऐसे में काम न होने से 40 हजार से अधिक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
गौरतलब हो कि महानगरों में पलायन रोकने के लिए करीब 12 साल पूर्व महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना शुरू हुई थी। इसमें पंजीकृत मजदूरों को तालाब की खुदाई, मेड़बंदी, पौधरोपण समेत अन्य कार्य दिया जाता है। मार्च 2020 से कोरोना महामारी के कारण मनरेगा का काम काफी हद तक प्रभावित हुआ। सभी को 100 दिन काम देने की मुहिम पटरी पर नहीं लौट सकी। 2020 में करीब चार से पांच महीने तक कामकाज प्रभावित रहा। सितंबर- अक्तूबर के बाद स्थिति सुधरी लेकिन एक बार फिर कोरोना की दूसरी लहर ने मनरेगा मजदूरों के हाथ से काम छीन लिया है। आलम यह है कि 546 ग्राम पंचायतों में 258 गांव में ही थोड़ा बहुत काम हो रहा है। 288 ग्राम पंचायतों में काम पूरी तरह ठप है। इससे 15 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य भी पूर्ण होता नहीं दिख रहा है। इस संबंध में डीसी मनरेगा राजाराम ने बताया कि कोरोना संक्रमण ने काम को काफी हद तक प्रभावित किया है। डीसी ने बताया कि पंचायत चुनाव के कारण प्रशासकों को काम कराने की जिम्मेदारी दी गई है। ब्लॉक स्तरीय अधिकतर अधिकारी संक्रमण की चपेट में है। जिससे काम नहीं हो पा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर काफी घातक है। जिससे मनरेगा श्रमिक भी काम करने में कतरा रहे हैं। एक लाख 80 हजार पंजीकृत मजदूरों में 80 हजार एक्टिव हैं। कोरोना की स्थिति सामान्य होने पर काम में तेजी आएगी।
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गौरतलब हो कि महानगरों में पलायन रोकने के लिए करीब 12 साल पूर्व महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना शुरू हुई थी। इसमें पंजीकृत मजदूरों को तालाब की खुदाई, मेड़बंदी, पौधरोपण समेत अन्य कार्य दिया जाता है। मार्च 2020 से कोरोना महामारी के कारण मनरेगा का काम काफी हद तक प्रभावित हुआ। सभी को 100 दिन काम देने की मुहिम पटरी पर नहीं लौट सकी। 2020 में करीब चार से पांच महीने तक कामकाज प्रभावित रहा। सितंबर- अक्तूबर के बाद स्थिति सुधरी लेकिन एक बार फिर कोरोना की दूसरी लहर ने मनरेगा मजदूरों के हाथ से काम छीन लिया है। आलम यह है कि 546 ग्राम पंचायतों में 258 गांव में ही थोड़ा बहुत काम हो रहा है। 288 ग्राम पंचायतों में काम पूरी तरह ठप है। इससे 15 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य भी पूर्ण होता नहीं दिख रहा है। इस संबंध में डीसी मनरेगा राजाराम ने बताया कि कोरोना संक्रमण ने काम को काफी हद तक प्रभावित किया है। डीसी ने बताया कि पंचायत चुनाव के कारण प्रशासकों को काम कराने की जिम्मेदारी दी गई है। ब्लॉक स्तरीय अधिकतर अधिकारी संक्रमण की चपेट में है। जिससे काम नहीं हो पा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर काफी घातक है। जिससे मनरेगा श्रमिक भी काम करने में कतरा रहे हैं। एक लाख 80 हजार पंजीकृत मजदूरों में 80 हजार एक्टिव हैं। कोरोना की स्थिति सामान्य होने पर काम में तेजी आएगी।
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