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Bhadohi News: 35 हजार लोग लगा रहे पांच की जगह 15 किमी का चक्कर

Thu, 21 Mar 2024 12:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Mar 2024 12:23 AM IST
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35 thousand people are walking 15 km instead of 5 km
दुर्गागंज। अभोली ब्लॉक के सरायकंसराय और हरदुआ गांव में रेलवे समपार न होने से करीब 30 से 35 हजार की आबादी को पांच की जगह 15 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इन गांवों के लोगों के खेत रेलवे ट्रैक के विपरित दिशाओं में है। इसके कारण उन्हें खेती-किसानी सहित ब्लॉक मुख्यालय, थाना, स्कूल, तहसील, सीएचसी-पीएचसी परेशानी होती है। पहले एक ही ट्रैक था तो लोग किसी तरह आर-पार हो रहे थे, लेकिन अब ट्रैक विस्तार व रेलवे प्रशासन की सख्ती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है।
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जिले में रेलवे परिवहन की सेवा ठीक-ठाक है। जिले के चारों तरफ रेलवे स्टेशन व पटरियों का विस्तार है। इसके कारण ट्रैक पर अक्सर दुर्घटनाएं भी सामने आती है। उत्तर रेलवे के वाराणसी-जंघई रेलखंड की रेलवे पटरी 1862 में बिछायी गई। तब से एकल रेलवे पटरी रही। ट्रेनों की संख्या बढ़ने और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने दोहरीकरण की योजना बनाई। 2018 में ट्रैक का दोहरीकरण हुआ। जिसके बाद एक की जगह दो पटरियां हो गई। दोहरीकरण के बाद इस रेलखंड से गुजरने वाले ट्रेनों की संख्या बढ़ गई। अभोली ब्लॉक की सरायकंसराय और हरदुआ दो ऐसे गांव है। जिनकी आबादी रेलवे ट्रैक के दोनों ओर है। ट्रैक के दोनों ओर खेत और आवास होने से लोगों को हर दिन आना-जाना होता है। बढ़ते आवागमन को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर एक महीने पहले ट्रैक के दोनों तरफ बड़े-बड़े गढ्ढे खुदवा दिए। जिससे लोग वाहनों को साथ लेकर रेलवे ट्रैक पार न कर सकें। रेलवे प्रशासन ने जब से इस तरह की सख्ती की है, तब से ही लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। खासकर खेती किसानी से जुड़े लोगों को तो हर दिन परेशान होना पड़ रहा है। इन स्थानों पर रेलवे समपार न होने से ट्रैक्टर समेत अन्य वाहन ले जाने के लिए उन्हें पांच किलो मीटर की जगह 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है और उनका काम भी प्रभावित हो रहा है।
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खेती में मुनाफा से ज्यादा लागत
समपार न होने के कारण आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है। ब्लॉक मुख्यालय, थाना, स्कूल, तहसील, सीएचसी-पीएचसी आदि जगहों पर जाने के लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी होती है। स्थानीय नंदलाल मिश्रा ने बताया कि खेती में जितना मुनाफा नहीं होता। उससे अधिक डीजल में खर्च हो जाता है। इलाज के लिए भी परेशानी होती है।

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कहां से किस गांव के लोगों का आना-जाना
हरदुआ गांव से मिश्राईनपुर, नवलपुर, रामनगर, हिम्मत पुर, बुढ़नपुर, हरदुआ, जौनपुर के हवेली गांव के लोग प्रभावित हैं। वहीं दूसरी तरफ सराय कंसाराय से सेमरा, गौरा गोपीपुर, हरिकरनपुर ,अर्जुनपुर पूरे खुशहाल, निदियूरा, अभिया बाजार, पूरे मनोहर जौनपुर जिले के कसेरवा, बेसरवा, बड़ैया कबीर विज्ञान आश्रम, कमासिन, गुर गुजी, पांडेपुर, अवदान पुर, मीरगंज, भटहर आदि गांव की करीब 30 से 35 हजार आबादी प्रभावित है। किसी खेत तो किसी की रिश्तेदारी है। ये लोग लंबा चक्कर लगाकर आते-जाते हैं।
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मतदान बहिष्कार की भी दे चुके हैं चेतावनी
समपार की मांग को लेकर ग्राम प्रधान रेखा मिश्रा, सूबेदार चौहान, अवधेश कुमार शुक्ला, विनय कुमार यादव पूर्व प्रधान कृपा शंकर तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग आंदोलन कर चुके हैं और समपार को लेकर ठोस पहल न होने पर बहिष्कार भी चेतावनी दे चुके हैं।
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