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Bhadohi News: 35 फीसदी वेलनेस सेंटरों के नियमित नहीं खुलते ताले, दर्द से कराहती हैं गर्भवती महिलाएं
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ज्ञानपुर। प्रसव पीड़िताओं के त्वरित उपचार के लिए ग्रामीण अंचलों में संचालित 206 हेल्थ वेलनेस सेंटरों की हालत ठीक नहीं है। 35 फीसदी सेंटरों का नियमित ताला नहीं खुलता है। यह सेंटर तब खुलते हैं जब उच्चाधिकारी निरीक्षण करने पहुंचते हैं या फिर जब कोई शिकायत करता है। सेंटरों के नियमित न खुलने से सबसे अधिक टीकाकरण प्रभावित होता है।
हेल्थ वेलनेस सेटरों पर सीएचओ और एएनएम की तैनाती की गई है। इनकी निगरानी सीएचसी अधीक्षक करते हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि 60 फीसदी प्रसव हेल्थ वेलनेस सेंटर पर कराए जाते हैं। अमर उजाला की टीम ने जिले के 40 सेंटरों की पड़ताल की। इसमें सोनैचा, गड़ेरियापुर, गजधरा, गोपीपुर, सुंदरपुर, लक्ष्मणपट्टी आदि सेंटर पर ताला लटका मिला। सुंरदपुर, छत्रशाहपुर, सरायजगदीश सेंटर पर टीका उपलब्ध मिला। औसतन एक सेंटर पर औसतन 15 से 20 मरीजों की ओपीडी होती है।
अधिकारी की लाचारी, सेंटर पर अतिक्रमण जारी
अधिकारी भले ही सेंटरों के मॉनिटरिंग का दावा करें, लेकिन हकीकत अलग है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर गिर्दबड़गांव के सामने अतिक्रमण हो रहा है। इस पर विभागीय अधिकारी चुप हैं। मंदिर के सामने कपड़ा सुखाए जा रहे हैं, ईंट का चबूतरा बनाकर सूखी लकड़ी रखी गई है। यह तो सिर्फ बानगी है, ऐसे ही कई सेंटर अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहे हैं।
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मुख्यालय पर निवास नहीं करती हैं एएनएम, सीएचओ
हेल्थ वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी लाने और एएनएम, सीएचओ के कार्य प्रणाली में सुधार लाने के लिए सीएमओ डॉ. एसके चक निरंतर सेंटरों का निरक्षण करते हैं। बीते दो महीने में 50 एएनएम व सीएचओ का वेतन रोका जा चुका है। फिर भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है। टीकाकरण में लापरवाही बरतने वाली 200 एएनएम व सीएचओ का वेतन रोका जा चुका है।
कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं तो कहीं पानी की टंकी नहीं
छह महीने की समय सीमा बीतने के बाद भी 23 सेंटर अभी भी किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। इन्हें खुद का भवन नसीब नहीं हो सका है, जबकि भवन बनकर तैयार हैं। कार्यदायी संस्था की उदासीनता के चलते गजधरा, गोपीपुर सहित 23 सेंटर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हो सके हैं। कहीं पर बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ है, तो कहीं पर पानी की टंकी नहीं बनाई गई है। कई ऐसे सेंटर है, जहां पर सेफ्टी टैंक नहीं बनाया गया है।
ये है एएनम की जिम्मेदारी
गर्भवती महिलाओं का उपचार करना
सरकारी योजना से जोड़ना
मातृत्व वंदना योजना के बारे में बताना
प्रसव के बाद सरकार से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराना
गभर्वती महिला व बच्चे का टीकाकरण करना
नवजात बच्चे को टीका लगाना
एक नजर में हेल्थ वेलनेस सेंटर
हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित - 206
किराए के भवन में संचालित - 23
सीएचओ की तैनाती - 110
एएनएम की तैनती - 185
एक सेंटर पर रोजाना ओपीडी- 20
पांच हजार की आबादी पर एक सेंटर
सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर गर्भवती महिलाएं, बच्चों को सुविधाएं मिलती हैं। सेंटरों पर प्रसव का ग्राफ बढ़ा है। समय-समय पर निरीक्षण किए जाते हैं, एएनएम, सीएचओ के नहीं मिलने पर वेतन रोका जाता है। स्पष्टीकरण मांगा जाता है। सीएचसी, पीएचसी और कार्यालय पर बैठक किए जाते हैं। जिन सेंटर पर एक स्टाप हैं, जब वह बैठक या फील्ड में टीकाकरण के लिए जाते हैं तब सेंटर बंद करना पड़ता है।-- डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही
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हेल्थ वेलनेस सेटरों पर सीएचओ और एएनएम की तैनाती की गई है। इनकी निगरानी सीएचसी अधीक्षक करते हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि 60 फीसदी प्रसव हेल्थ वेलनेस सेंटर पर कराए जाते हैं। अमर उजाला की टीम ने जिले के 40 सेंटरों की पड़ताल की। इसमें सोनैचा, गड़ेरियापुर, गजधरा, गोपीपुर, सुंदरपुर, लक्ष्मणपट्टी आदि सेंटर पर ताला लटका मिला। सुंरदपुर, छत्रशाहपुर, सरायजगदीश सेंटर पर टीका उपलब्ध मिला। औसतन एक सेंटर पर औसतन 15 से 20 मरीजों की ओपीडी होती है।
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अधिकारी की लाचारी, सेंटर पर अतिक्रमण जारी
अधिकारी भले ही सेंटरों के मॉनिटरिंग का दावा करें, लेकिन हकीकत अलग है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर गिर्दबड़गांव के सामने अतिक्रमण हो रहा है। इस पर विभागीय अधिकारी चुप हैं। मंदिर के सामने कपड़ा सुखाए जा रहे हैं, ईंट का चबूतरा बनाकर सूखी लकड़ी रखी गई है। यह तो सिर्फ बानगी है, ऐसे ही कई सेंटर अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहे हैं।
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मुख्यालय पर निवास नहीं करती हैं एएनएम, सीएचओ
हेल्थ वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी लाने और एएनएम, सीएचओ के कार्य प्रणाली में सुधार लाने के लिए सीएमओ डॉ. एसके चक निरंतर सेंटरों का निरक्षण करते हैं। बीते दो महीने में 50 एएनएम व सीएचओ का वेतन रोका जा चुका है। फिर भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है। टीकाकरण में लापरवाही बरतने वाली 200 एएनएम व सीएचओ का वेतन रोका जा चुका है।
कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं तो कहीं पानी की टंकी नहीं
छह महीने की समय सीमा बीतने के बाद भी 23 सेंटर अभी भी किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। इन्हें खुद का भवन नसीब नहीं हो सका है, जबकि भवन बनकर तैयार हैं। कार्यदायी संस्था की उदासीनता के चलते गजधरा, गोपीपुर सहित 23 सेंटर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हो सके हैं। कहीं पर बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ है, तो कहीं पर पानी की टंकी नहीं बनाई गई है। कई ऐसे सेंटर है, जहां पर सेफ्टी टैंक नहीं बनाया गया है।
ये है एएनम की जिम्मेदारी
गर्भवती महिलाओं का उपचार करना
सरकारी योजना से जोड़ना
मातृत्व वंदना योजना के बारे में बताना
प्रसव के बाद सरकार से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराना
गभर्वती महिला व बच्चे का टीकाकरण करना
नवजात बच्चे को टीका लगाना
एक नजर में हेल्थ वेलनेस सेंटर
हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित - 206
किराए के भवन में संचालित - 23
सीएचओ की तैनाती - 110
एएनएम की तैनती - 185
एक सेंटर पर रोजाना ओपीडी- 20
पांच हजार की आबादी पर एक सेंटर
सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर गर्भवती महिलाएं, बच्चों को सुविधाएं मिलती हैं। सेंटरों पर प्रसव का ग्राफ बढ़ा है। समय-समय पर निरीक्षण किए जाते हैं, एएनएम, सीएचओ के नहीं मिलने पर वेतन रोका जाता है। स्पष्टीकरण मांगा जाता है। सीएचसी, पीएचसी और कार्यालय पर बैठक किए जाते हैं। जिन सेंटर पर एक स्टाप हैं, जब वह बैठक या फील्ड में टीकाकरण के लिए जाते हैं तब सेंटर बंद करना पड़ता है।