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मंच से नहीं लिया प्रत्याशी का नाम, दो लोस क्षेत्रों को साधा
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ज्ञानपुर। भाजपा के जिस प्रत्याशी के समर्थन में जनसभा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भदोही पहुंचे थे, मंच से उसका एक बार नाम तक नहीं लिया। अलबत्ता प्रधानमंत्री ने यह जरूर कहा कि आप का एक-एक वोट सीधे मेरे खाते में जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अलमऊ की जनसभा के जरिए भदोही के साथ-साथ फूलपुर सीट को भी साधने का प्रयास किया। मंच पर भदोही प्रत्याशी रमेश चंद्र बिंद के अलावा फूलपुर से भाजपा प्रत्याशी केशरी पटेल भी मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री के आगमन से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान दोनों प्रत्याशियों को मंच पर खड़ा कराया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री के आगमन के बाद दोनों प्रत्याशी बैठ गए। इस दौरान पूरी जनसभा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद और उनके भाषण पर केंद्रित रही। मोदी ने भदोही के साथ फूलपुर लोकसभा क्षेत्रों का नाम लेते हुए पूर्वांचल भर में भाजपा को जिताने का आह्वान किया, लेकिन मंच पर मौजूद दोनों प्रत्याशियों का नाम नहीं लिया। इसके पीछे मोदी और भाजपा हाईकमान की रणनीतिक मंशा चाहे जो रही हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस मसले के सियासी निहितार्थ जरूर निकाले जाने लगे हैं। चर्चा तेज हो गई कि 15 वर्षों तक बसपा में विधायक रहने के बाद इस बार के लोकसभा चुनाव से चंद दिनों पहले जातिगत सांचे के हिसाब से भदोही लोकसभा के रणक्षेत्र में उतारने के लिए भाजपा में शामिल कराए गए रमेशचंद्र बिंद को अपने प्रदर्शन के बूते भदोही की जनता के साथ-साथ भाजपा हाईकमान के दिल पर भी छाना होगा। जनसभा में मोदी की हुंकार कितनी असरकारक हुई, यह तो 23 मई को मतगणना के बाद पता चलेगा, लेकिन अलमऊ की धरती से भदोही और फूलपुर दो लोकसभा क्षेत्रों को साधने का उन्होंने पूरा प्रयास किया।
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प्रधानमंत्री मोदी ने अलमऊ की जनसभा के जरिए भदोही के साथ-साथ फूलपुर सीट को भी साधने का प्रयास किया। मंच पर भदोही प्रत्याशी रमेश चंद्र बिंद के अलावा फूलपुर से भाजपा प्रत्याशी केशरी पटेल भी मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री के आगमन से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान दोनों प्रत्याशियों को मंच पर खड़ा कराया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री के आगमन के बाद दोनों प्रत्याशी बैठ गए। इस दौरान पूरी जनसभा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद और उनके भाषण पर केंद्रित रही। मोदी ने भदोही के साथ फूलपुर लोकसभा क्षेत्रों का नाम लेते हुए पूर्वांचल भर में भाजपा को जिताने का आह्वान किया, लेकिन मंच पर मौजूद दोनों प्रत्याशियों का नाम नहीं लिया। इसके पीछे मोदी और भाजपा हाईकमान की रणनीतिक मंशा चाहे जो रही हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस मसले के सियासी निहितार्थ जरूर निकाले जाने लगे हैं। चर्चा तेज हो गई कि 15 वर्षों तक बसपा में विधायक रहने के बाद इस बार के लोकसभा चुनाव से चंद दिनों पहले जातिगत सांचे के हिसाब से भदोही लोकसभा के रणक्षेत्र में उतारने के लिए भाजपा में शामिल कराए गए रमेशचंद्र बिंद को अपने प्रदर्शन के बूते भदोही की जनता के साथ-साथ भाजपा हाईकमान के दिल पर भी छाना होगा। जनसभा में मोदी की हुंकार कितनी असरकारक हुई, यह तो 23 मई को मतगणना के बाद पता चलेगा, लेकिन अलमऊ की धरती से भदोही और फूलपुर दो लोकसभा क्षेत्रों को साधने का उन्होंने पूरा प्रयास किया।
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