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जिला योजना: पांच साल में खर्च हुए 510 करोड़
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:47 AM IST
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ज्ञानपुर। जिला योजना समिति की बैठकों में जनपद के विकास को लेकर बनने वाला खाका जमीन पर दिखता नजर नहीं आ रहा है। पांच वर्षों में भले ही 510 करोड़ से अधिक खर्च हो गया, लेकिन मौके पर आज भी विकास की हालत पतली ही है। उपेक्षित इलाकों में अब भी लोगों को तमाम समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क से लेकर गांव के विकास पर सबसे अधिक जोर दिया जाता है। इसके लिए अलग-अलग विभागों में खर्च होने वाली प्रस्तावित धनराशि की सूची शासन स्तर पर भेजी जाती है, जिस पर मंथन के बाद बजट स्वीकृत किया जाता है। इसके लिए हर साल अप्रैल से लेकर जून तक जिला योजना समिति की बैठक होती है। जिले में वैसे तो पिछले पांच साल में जिला योजना के माध्यम से करीब 510 करोड़ खर्च हुए पर धरातल पर विकास कम ही दिख रहा है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष 2014-15 में 83.69 करोड़ अनुमोदित हुआ जिसमें 25.47 करोड़ अवमुक्त हो सका। वर्ष 2015-16 में 186.86 में से 129 करोड़ मिले और खर्च कर दिए गए। वर्ष 2016-17 में अनुमोदित 188.47 करोड़ के सापेक्ष 94 करोड़ 97 लाख खर्च किया गया। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 188 करोड़ 47 लाख रुपये अनुमोदित किया गया था। इसके सापेक्ष 112 करोड़ 78 लाख 24 हजार रुपये व्यय किया गया था। इसी क्रम में चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में कुल 197 करोड़ 90 लाख रुपये का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। प्रभारी मंत्री की ओर से आंशिक संशोधन करने के बाद प्रस्ताव को स्वीकृत प्रदान किया गया। इसमें 150 करोड़ तक बजट स्वीकृत हो चुका है। जिला योजना की बैठकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और गांव के विकास पर सबसे अधिक खर्च किया गया। दो साल में स्वच्छता मिशन पर सरकार ने खजाना खोल दिया। 2017 में ग्रामीण स्वच्छता पर 20 करोड़, प्राथमिक शिक्षा पर 528 लाख, माध्यमिक शिक्षा पर 700 लाख, ग्रामीण आवास पर 54 करोड़, समाज कल्याण के लिए 14.28 करोड़, महिला कल्याण पर नौ करोड़ 15 लाख स्वीकृत हुआ। इसी तरह 2018 में समाज कल्याण पर 18.36 करोड़, महिला कल्याण पर 15.66 करोड़, प्राथमिक शिक्षा पर 4.78 करोड़, माध्यमिक शिक्षा पर पांच करोड़ 39 लाख, ग्रामीण आवास 27.36 करोड़ खर्च किया गया। अगर जिला योजना के अनुमोदन पर नजर डालें तो पांच साल में 900 करोड़ का अनुमोदन किया गया।
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