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26 साल गुजरे, अब भी विकास की दरकार

Mon, 29 Jun 2020 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2020 10:21 PM IST
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26 years passed, still in need of development
ज्ञानपुर। 30 जून 1994 का दिन कालीन नगरी के लोगों के लिए स्वर्णिम दिन रहा। जब काशी से कटकर भदोही को जिले का दर्जा मिला। अस्तित्व में आए जिले को करीब 26 साल गुजर गए, लेकिन अब भी मूलभूत सुविधाएं मयस्सर नहीं हो सकी हैं। ढाई सौ करोड़ की परियोजनाएं जहां अधूरी लटकी हैं, वहीं 30 करोड़ की स्वास्थ्य सुविधाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
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30 जून 1994 को जनपद बनने के बाद उम्मीद की किरण जगी कि अब विकास की इबारत लिखी जाएगी, हालांकि ऐसा हो न सका। विकास भवन, कलक्ट्रेट, दीवानी कचहरी की इमारतें जनपद को मिलीं तो कारागार, स्टेडियम और पुलिस लाइन का सृजन भी हुआ। इमारतें जितनी सुंदर बनी हैं बुनियादी सुविधाएं उतनी ही बदरंग हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहले भी वाराणसी और प्रयागराज पर निर्भरता थी और आज भी है। बिजली का संकट बरकरार है। शुद्ध पेयजल के लिए आज भी लोगों को तरसना पड़ता है।
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करीब ढाई दशक के बाद भी मोढ़, सुरियावां, सुभाषनगर, महराजगंज, चौरी जैसे रूट पर प्राइवेट वाहनों का सहारा है। सबसे अधिक नुकसान औद्योगिक क्षेत्र में हुआ। 25 सालों में पूर्वांचल की शान कही जाने वाली औराई चीनी मिल, इंदिरा मिल बंद हो गई तो कई छोटी-छोटी कालीन कंपनियां भी दम तोड़ चुकी हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र सेज की परिकल्पना शुरू होने के साथ ही दम तोड़ गई। स्वास्थ्य सुविधाओं के हिसाब से सौ शैया का जिला अस्पताल एक दशक में अपूर्ण है तो अभोली में सीएचसी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। ट्रामा सेंटर से लेकर कई अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं लंबित हैं। तकनीकी शिक्षा के नाम पर एक राजकीय पॉलिटेक्निक और आईटीआई है। इससे इंटर के बाद होनहारों को दूसरे शहरों की तरफ रुख करना पड़ता है।
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14 दिन की पदयात्रा से हिल गई थी सरकार
ज्ञानपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित श्यामधर मिश्र ने 1985 में भदोही को अलग जिला बनाने की हवा दी। उसके बाद जनसमर्थन मिला तो कारवां बढ़ता गया। 1994 में जनपद सृजन विकास मंच के संयोजक शिवभूषण सिंह मानस के नेतृत्व में 14 दिन की पदयात्रा निकाली गई। जिले की सीमा भदरांव से शुरू होकर पदयात्रा भदोही की सीमाओं पर गई, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला। समिति के मंत्री रहे भरतराज सिंह की माने तो 14 दिन की पदयात्रा के बाद 30 जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने नए जिले की घोषणा की।
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