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Bhadohi News: 92 रुपये के टीके लिए 250 रुपये किराया, 70 किमी का चक्कर

Fri, 19 Dec 2025 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2025 12:24 AM IST
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250 rupees for a vaccine worth 92 rupees, a round trip of 70 km
सरपतहां ​स्थित डायलिसिस यूनिट में डायलिसिस करा रहे मरीज। संवाद - फोटो : credit
ज्ञानपुर। जिले के सौ शय्या अस्पताल में डायलिसिस के लिए आने वाले 101 किडनी मरीजों को हेपेटाइटिस-बी का टीका खरीदकर लगवाना पड़ रहा है। 92 रुपये की इस वैक्सीन के लिए मरीजों एवं उनके तीमारदारों को वाराणसी और प्रयागराज तक 70-70 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसमें 250 रुपये से अधिक किराए में खर्च हो जाते हैं और समय बर्बाद होता है सो अलग। अस्पताल में वैक्सीन न मिलने से कई बार मरीजों को उसे निजी मेडिकल स्टोर पर ढूंढ़ना पड़ता है। सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल की डायलिसिस यूनिट पर 101 किडनी मरीजों की डायलिसिस चल रही है। फरवरी 2022 में इस यूनिट का संचालन शुरू हुआ था। यहां मरीजों की संख्या हर साल बढ़ रही है। यह जिले का इकलौता डायलिसिस यूनिट है, जहां मरीजों की निशुल्क डायलिसिस की जाती है। यूनिट के संचालन के तीन साल बाद भी अब तक यहां मरीजों को हेपेटाइटिस-बी का टीका नहीं लगाया जा रहा है। मरीज निजी मेडिकल स्टोर से वैक्सीन खरीदकर लगवाते हैं। आला अधिकारी यूनिट का निरीक्षण जब करते हैं तो मरीज वैक्सीन उपलब्ध करवाने की मांग करते हैं। जहां अधिकारियों की ओर से अगली बार से वैक्सीन का इंतजाम करने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन अब तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। मरीजों के अलावा यह टीका वहां रहने वाले कर्मचारियों को भी लगना अनिवार्य है। टीका न लगने से शरीर में इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। सौ शय्या अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में 101 मरीजों की डायलिसिस 13 बेडों पर की जाती है। जबकि आठ मरीज प्रतीक्षारत हैं। एक बेड पॉजिटिव मरीज के लिए आरक्षित है। एक मरीज ने बताया कि जिले में हेपेटाइटिस-बी का टीका जल्दी नहीं मिलता। इसके लिए वाराणसी, प्रयागराज का चक्कर लगाना पड़ता है। 92 रुपये की वैक्सीन मिलती है, 250 रुपये किराये में खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा दिनभर के समय की बर्बादी होती है। सौ शय्या अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुनील कुमार पासवान ने बताया कि हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लगाने से शरीर में इन्फेक्शन नहीं फैलता है। बताया कि डायलिसिस प्रक्रिया में रक्त और रक्त के अवयव बार-बार संपर्क में आते हैं। उपकरण भी साझा होने की आशंका रहती है। इसके अलावा त्वचा के बार-बार छिद्रित होने से हेपेटाइटिस-बी वायरस का जोखिम रहता है। इसलिए यह टीका न सिर्फ मरीजों को बल्कि साथ रहने वाले तीमारदारों और यूनिट में काम करने वाले कर्मचारियों को भी लगवाना अनिवार्य होता है।
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