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रावण वध के बाद अयोध्या लौटे श्रीराम
Updated Tue, 30 Oct 2018 01:16 AM IST
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चौरी। इलाके के लठिया गांव में चल रही दस दिवसीय रामलीला रविवार की रात रावण वध के साथ संपन्न हो गई। विभीषण को लंका का राजा बनाने के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौट आए। दशरथ नंदन के आने की खबर सुनकर पूरे राज्य में जश्न का माहौल हो जाता है। रामलीला में अंतिम दिन कुंभकर्ण के वध की खबर सुनने के बाद लंकापति रावण परेशान हो जाता है। उसने अहिरावण को युद्ध के लिए भेजा। विभीषण का वेश धारण कर अहिरावण राम-लक्ष्मण का हरण कर पाताल लोक ले जाता है। इसके बाद हनुमान जी अहिरावण का वध कर प्रभु राम और लक्ष्मण को वापस लाते हैं। जैसे ही रावण को अहिरावण के वध की खबर मिलती है, वह स्वयं युद्धभूमि में जाता है। राम-रावण के बीच भयंकर युद्ध होता है। रावण का सिर बार-बार कटने पर उग आता है। इससे वानरी सेना ही नहीं, राम की सेना भी चिंतित हो जाती है। विभीषण के बताने पर श्रीराम रावण की नाभि में बाण चलाते हैं। अंत में प्रभु श्रीराम ने रावण का वध कर दिया। लंका में विभीषण का राज्याभिषेक करने के बाद प्रभु राम सीता और लक्ष्मण संग अयोध्या आ जाते हैं। राम के अयोध्या लौटने पर पूरे राज्य में जश्न का माहौल हो जाता है। इस मौके पर कृपा शंकर पाठक, रमाकांत, विष्णुकांत त्रिपाठी, डबलू चौबे, भोले तिवारी, मोनू तिवारी आदि रहे। वहीं, सुरियावां इलाके के आदर्श रामलीला समिति हरीपुर अभिया में चल रही रामलीला में रविवार की रात चित्रकूट में भरत मिलाप और पंचवटी में सीताहरण के प्रसंगों का मंचन हुआ। भरत को जब यह पता चला कि भगवान राम माता कैकेयी की वजह से वनवास चले गए तो उन्हें बेहद दुख हुआ। वह अयोध्या की पूरी प्रजा के साथ चित्रकूट में प्रभु राम को मानने आए। यहां वहां चारों भाइयों का मिलन हुआ। प्रभु श्रीराम के न मानने पर भरत जी खड़ाऊं लेकर नंदीग्राम लौट आए। इसके बाद पंचवटी में सूर्पणखा की नाक कटी और रावण ने सीता का हरण कर लिया। पंचवटी में रावण की बहन सूर्पणखा ने सुंदरी रूप में राम और लक्ष्मण के सामने विवाह का निवेदन किया। प्रभु राम ने स्वयं विवाहित होने की बात कह अपना पीछा छुड़ा लिया। इसके बाद वह लक्ष्मण के पास गई। लक्ष्मण ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इससे क्रोधित सूर्पणखा अपने वास्तविक स्वरूप में आकर सीता की झपटी तो लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए। इसके बाद सूर्पणखा अपने भाई रावण के पास पहुंची और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। बदला लेने के लिए मारीच के सहयोग से रावण ने सीता का हरण कर लिया।
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