{"_id":"5c12a41342c7925cd540cb0b","slug":"201544725523-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छुट्टा पशु रौंद रहे किसानों की मेहनत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छुट्टा पशु रौंद रहे किसानों की मेहनत
Updated Fri, 14 Dec 2018 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोपीगंज। ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशु लोगों के लिए मुश्किलों का सबब बन गए हैं। सिवान में विचरण कर रहे झुंड के झुंड छुट्टा पशु किसानों की गाढ़ी कमाई को पैरों तले रौंदते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं।
क्षेत्र के गोपपुर सहित विभिन्न गांवों में छुट्टा पशुओं की दहशत बढ़ गई है। इसके चलते किसानों की कमाई जहां बर्बाद हो जा रही है, वहीं सड़क पर आए दिन हो रही दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बार- बार मांग के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने से लोगों में रोष है। नगर के साथ गांवों खासकर गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। गंगा पार से देर शाम नाव से ले आकर पशुओं को छोड़ दिया जाता है। नीलगायों के उत्पात से परेशान ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए अब बछड़े, सांड़ और भैंसे भी मुसीबत बन गए हैं। किसानों का कहना है कि ये पशु घंटे-दो घंटे में ही पूरी फसल नष्ट कर रहे हैं। कई छुट्टा पशु खेत से बाहर निकालने का प्रयास करने पर हमला कर देते हैं। पिछले दिनों अछवर गांव में एक वृद्ध किसान की सांड़ हांकने के दौरान उसके हमले से मौत हो गई थी। ये पशु सड़क पर वाहन चालकों के लिए भी मुसीबत बन गए हैं। सड़क पर छुट्टा पशुओं से टकरा कर आए दिन लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। वन विभाग और जिला प्रशासन के पास छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने का कोई कारगर जवाब नहीं है।
क्षेत्र के गोपपुर सहित विभिन्न गांवों में छुट्टा पशुओं की दहशत बढ़ गई है। इसके चलते किसानों की कमाई जहां बर्बाद हो जा रही है, वहीं सड़क पर आए दिन हो रही दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बार- बार मांग के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने से लोगों में रोष है। नगर के साथ गांवों खासकर गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। गंगा पार से देर शाम नाव से ले आकर पशुओं को छोड़ दिया जाता है। नीलगायों के उत्पात से परेशान ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए अब बछड़े, सांड़ और भैंसे भी मुसीबत बन गए हैं। किसानों का कहना है कि ये पशु घंटे-दो घंटे में ही पूरी फसल नष्ट कर रहे हैं। कई छुट्टा पशु खेत से बाहर निकालने का प्रयास करने पर हमला कर देते हैं। पिछले दिनों अछवर गांव में एक वृद्ध किसान की सांड़ हांकने के दौरान उसके हमले से मौत हो गई थी। ये पशु सड़क पर वाहन चालकों के लिए भी मुसीबत बन गए हैं। सड़क पर छुट्टा पशुओं से टकरा कर आए दिन लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। वन विभाग और जिला प्रशासन के पास छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने का कोई कारगर जवाब नहीं है।
विज्ञापन