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करोड़ों का सेज खटाई में
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ज्ञानपुर/चौरी। दुनिया भर में मशहूर भदोही के कालीन कारोबार को पंख देने के लिए भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर शुरू की गई विशेष आर्थिक परिक्षेत्र (एसईजेड) की परिकल्पना काफी महंगी साबित होने जा रही है। 16 करोड़ 66 लाख रुपये मुआवजे से 111 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने के बाद कालीन कारोबार को सिंगल विंडो देने की कवायद कारोबारियों को सब्जबाग दिखाकर हवा-हवाई हो गई। मौजूदा स्थिति यह है कि सेज के लिए अधिग्रहीत तकरीबन 60 फीसदी जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। मुआवजा लेने वाले कुछ किसानों ने जमीनों पर खेतीबारी शुरू कर दी है।
भदोही के कालीन कारोबार को सहूलियत देने के लिए वर्ष 2006 में भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) के निर्माण की परिकल्पना धरातल पर आई। इसके लिए भदोही के चौरी और बनारस के कपसेठी क्षेत्र के कुछ इलाके को मिलाकर सेज निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। यूपीएसआईडीसी ने जिला प्रशासन के सहयोग से भदोही-वाराणसी जनपद की सीमा पर कंधिया फाटक के पास 220 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था। शुरू में भदोही के कंधिया, धनापुर, जोलहापुर, टिकैतपुर, हड़ईबारी, गोपालपुर, चांदीगहना, लच्छापुर और बनारस के शिवदासपुर, घोड़ा इमाम, दौलतिया आदि गांवों के 1036 किसानों को मुआवजा देकर 111 हेक्टेयर जमीन को अधिकृत किया गया। बाकी जमीन के अधिग्रहण को लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मामला लटक गया। हालांकि इस दौरान कई बार किसानों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बीच जिला प्रसाशन की नरमी देख किसान न्यायालय चले गए और 738 किसान अपनी जमीन न देने पर अड़ गए। इस तरह जिले में सेज निर्माण का सपना अधर में लटक गया। धीरे-धीरे लगभग डेढ़ दशक गुजरने के बाद अब अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा शुरू हो गया है। 60 फीसदी से अधिक सेज की अधिग्रहीत भूमि पर खेतीबारी शुरू हो गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सेज निर्माण का कार्य यूपीएसआईडीसी के जिम्मे था। उनका कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां नहीं होने के कारण मौजूदा हालात पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हां, अगर वे लोग चाहेंगे तो अधिग्रहीत जमीन पर हो रहे कब्जे आदि के मसले पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नहीं बरती गई गंभीरता
कहा जा रहा है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र को लेकर जिला प्रसाशन अगर गंभीर होता तो इसके निर्माण का काम अधर में नहीं लटकता और न ही अधिकृत जमीनों पर खेती होती। लापरवाही का हाल यह है कि अधिग्रहण के बाद बंजर दिख रही जमीन पर अब सरसो और गेहूं की फसल लहलहा रही है। एक विशाल मैदान अब खेतों में तब्दील हो गया है।
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भदोही के कालीन कारोबार को सहूलियत देने के लिए वर्ष 2006 में भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) के निर्माण की परिकल्पना धरातल पर आई। इसके लिए भदोही के चौरी और बनारस के कपसेठी क्षेत्र के कुछ इलाके को मिलाकर सेज निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। यूपीएसआईडीसी ने जिला प्रशासन के सहयोग से भदोही-वाराणसी जनपद की सीमा पर कंधिया फाटक के पास 220 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था। शुरू में भदोही के कंधिया, धनापुर, जोलहापुर, टिकैतपुर, हड़ईबारी, गोपालपुर, चांदीगहना, लच्छापुर और बनारस के शिवदासपुर, घोड़ा इमाम, दौलतिया आदि गांवों के 1036 किसानों को मुआवजा देकर 111 हेक्टेयर जमीन को अधिकृत किया गया। बाकी जमीन के अधिग्रहण को लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मामला लटक गया। हालांकि इस दौरान कई बार किसानों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बीच जिला प्रसाशन की नरमी देख किसान न्यायालय चले गए और 738 किसान अपनी जमीन न देने पर अड़ गए। इस तरह जिले में सेज निर्माण का सपना अधर में लटक गया। धीरे-धीरे लगभग डेढ़ दशक गुजरने के बाद अब अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा शुरू हो गया है। 60 फीसदी से अधिक सेज की अधिग्रहीत भूमि पर खेतीबारी शुरू हो गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सेज निर्माण का कार्य यूपीएसआईडीसी के जिम्मे था। उनका कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां नहीं होने के कारण मौजूदा हालात पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हां, अगर वे लोग चाहेंगे तो अधिग्रहीत जमीन पर हो रहे कब्जे आदि के मसले पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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नहीं बरती गई गंभीरता
कहा जा रहा है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र को लेकर जिला प्रसाशन अगर गंभीर होता तो इसके निर्माण का काम अधर में नहीं लटकता और न ही अधिकृत जमीनों पर खेती होती। लापरवाही का हाल यह है कि अधिग्रहण के बाद बंजर दिख रही जमीन पर अब सरसो और गेहूं की फसल लहलहा रही है। एक विशाल मैदान अब खेतों में तब्दील हो गया है।
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