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धनतेरस आज, सज गए बाजार
Updated Mon, 05 Nov 2018 12:45 AM IST
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ज्ञानपुर। धनधान्य के पर्व धनतेरस को लेकर बाजार सज गये हैं। सोमवार को सुबह से लेकर देर शाम तक बाजारों में खरीदारी होगी। शुभ मुहूर्त में धातु की खरीदारी को देखते हुए आभूषण, बर्तन, ऑटोमोबाइल्स की दुकानों को आकर्षक ढंग से सजा दिया गया है। त्योहार के लिए अग्रिम बुकिंग कराने का सिलसिला भी चलता रहा।
धनतेरस को धन की देवी लक्ष्मी की पूजन की मान्यता है। आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरी की जयंती भी इसी दिन मानी जाती है। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन धातु से बनी वस्तुओं की खरीदारी शुभ फलदायी है। यही कारण है कि हर कोई विशेष मुहूर्त में खरीदी के लिए उत्सुक रहता है। कई दिनों पहले से ही बाजारों में इसका असर दिखने लगा था। ग्राहकों को लुभाने के लिए जहां नई-नई वैरायटी के सामान मंगाए गए हैं, वहीं दुकानों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
धनतेरस पर सबसे ज्यादा बिक्री सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन, इलेक्ट्रिक सामान और ऑटोमोबाइल्स की होती है। लिहाजा इन दुकानों पर एक दिन पहले से ही उत्सव की रंगत दिखने लगी है। दुकानदार भी इस बार अच्छे कारोबार को लेकर उत्साहित हैं। उधर, दीपोत्सव के मद्देनजर बाजारों में दीपक, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं, कलश आदि की दुकानें भी सज गई हैं। इन पर भी धनतेरस से खरीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। रविवार को ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, जंगीगंज, सुरियावां आदि बाजारों में धनतेरस की पूर्व संध्या पर बाजार रंग बिरंगी रोशनी में दुल्हन सा सजा नजर आया। चाट टिक्की वाले तक धनतेरस की तैयारी करते दिखे। दुकानदारों का कहना है कि चूंकि इस बार महंगाई पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा है।
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इनसेट
यह है मान्यता
समुद्र मंथन के अंत में भगवान धनवंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। उस दिन भी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी थी। तभी से धनवंतरि भगवान का प्रकटोत्सव मान लिया गया है। तभी से इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।
इनसेट
इस तरह करें भगवान धनवंतरि की पूजा
डुहिया के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल शास्त्री ने कहा कि विधिवत पूजन आम आदमी के लिए लाभ देने वाला होता है। सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान धनवंतरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। स्वयं पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं। पूजन स्थल पर आसन देने की भावना से चावल चढ़ाएं। आचमन के लिए जल छोड़ें। चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली आदि चढ़ाएं। चांदी के पात्र में खीर का नैवेद्य लगाएं। इसके बाद जल छोड़ें। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपाड़ी चढ़ाएं। शंखपुष्पी, तुलसी सहित कई औषधियों को चढ़ाने से लोग निरोगी होते हैं।
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धनतेरस को धन की देवी लक्ष्मी की पूजन की मान्यता है। आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरी की जयंती भी इसी दिन मानी जाती है। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन धातु से बनी वस्तुओं की खरीदारी शुभ फलदायी है। यही कारण है कि हर कोई विशेष मुहूर्त में खरीदी के लिए उत्सुक रहता है। कई दिनों पहले से ही बाजारों में इसका असर दिखने लगा था। ग्राहकों को लुभाने के लिए जहां नई-नई वैरायटी के सामान मंगाए गए हैं, वहीं दुकानों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
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धनतेरस पर सबसे ज्यादा बिक्री सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन, इलेक्ट्रिक सामान और ऑटोमोबाइल्स की होती है। लिहाजा इन दुकानों पर एक दिन पहले से ही उत्सव की रंगत दिखने लगी है। दुकानदार भी इस बार अच्छे कारोबार को लेकर उत्साहित हैं। उधर, दीपोत्सव के मद्देनजर बाजारों में दीपक, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं, कलश आदि की दुकानें भी सज गई हैं। इन पर भी धनतेरस से खरीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। रविवार को ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, जंगीगंज, सुरियावां आदि बाजारों में धनतेरस की पूर्व संध्या पर बाजार रंग बिरंगी रोशनी में दुल्हन सा सजा नजर आया। चाट टिक्की वाले तक धनतेरस की तैयारी करते दिखे। दुकानदारों का कहना है कि चूंकि इस बार महंगाई पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा है।
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यह है मान्यता
समुद्र मंथन के अंत में भगवान धनवंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। उस दिन भी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी थी। तभी से धनवंतरि भगवान का प्रकटोत्सव मान लिया गया है। तभी से इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।
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इस तरह करें भगवान धनवंतरि की पूजा
डुहिया के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल शास्त्री ने कहा कि विधिवत पूजन आम आदमी के लिए लाभ देने वाला होता है। सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान धनवंतरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। स्वयं पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं। पूजन स्थल पर आसन देने की भावना से चावल चढ़ाएं। आचमन के लिए जल छोड़ें। चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली आदि चढ़ाएं। चांदी के पात्र में खीर का नैवेद्य लगाएं। इसके बाद जल छोड़ें। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपाड़ी चढ़ाएं। शंखपुष्पी, तुलसी सहित कई औषधियों को चढ़ाने से लोग निरोगी होते हैं।