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कारपेट एक्सपो मार्ट स्थल पर फैसला टला
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भदोही। इंडिया कारपेट एक्सपो के आयोजकों कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उच्चस्तरीय दल ने शुक्रवार को कारपेट एक्सपो मार्ट आयोजन के लिए न्यूनतम जरूरतें पूरी नहीं मिली। उद्योग विभाग के अधिकारियों की ओर से समय मांगने पर दो सप्ताह और इंतजार करने का निर्णय लिया गया। सीईपीसी चेयरमैन महावीर प्रताप शर्मा ने कहा कि हमारे पास वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजन का विकल्प खुला है। दो सप्ताह में भी जरूरतें पूरी नहीं कर पाने की स्थिति में वाराणसी में आयोजन को हरी झंडी दे दी जाएगी।
चेयरमैन ने बताया कि आठ मार्च को यहीं पर बैठक कर उद्योग विभाग और उप्र निर्माण निगम के अधिकारियों को 26 बिंदुओं पर काम पूरा करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके यहां एक्सपो आयोजन के लिए न्यूनतम जरूरतें पूरी नहीं की गई। बताया अक्तूबर एक्सपो जो वाराणसी में होता आया है उसकी तिथियां घोषित होने में विलंब हो रहा है। जबकि मझोले उद्यमियों के हितों को ध्यान में रखते हुए हम भदोही में आयोजन करना चाहते हैं। बताया कि 26 बिंदुओं में वातानुकूल, शीशे के दरवाजे, शौचालय, बिजली, लिफ्ट, फ्लोर आदि कुछ ऐसी बुनियादी जरूरतें हैं जो पूरी होने पर यहां आयोजन के लिए सोचा जा सकता है।
निरीक्षण में में सीईपीसी के प्रशासनिक सदस्य उमेश कुमार गुप्ता, एकमा उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल हादी, संयुक्त सचिव आलोक बरनवाल, हाजी अब्दुल रब, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, ओएन मिश्रा, हुसैन जाफर हुसैनी, श्रीराम मौर्या, वासिफ अंसारी आदि मौजूद थे।
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रिजल्ट दें नहीं तो होगी एफआईआर
भदोही। निरीक्षण और प्रेस वार्ता में मौजूद संयुक्त आयुक्त (उद्योग) उमेश सिंह ने कहा कि शासन की भी मंशा है कि यहां कारपेट एक्सपो का आयोजन हो। क्योंकि सरकार की प्राथमिकता सूची में कालीन उद्योग भी है। 15 दिन में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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निर्माण एजेंसी के रुके हैं 3.65 करोड़
भदोही। जिस दुग्गल एसोसिएट्स ने एक्सपो मार्ट का निर्माण कराया है उसके परियोजनाधिकारी पुनीत कुमार मिश्रा भी आज मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे जो काम करके निर्माण निगम को दे चुके हैं उसमे से अब भी 3.65 करोड़ रुपये भुगतान नहीं हो सका है। कहा यदि भुगतान किए बगैर किसी अन्य एजेंसी से काम पूरा कराने का प्रयास किया गया तो वे अपने हितों की रक्षा के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को बाध्य होंगे। मिश्रा ने कहा कि मैं महीनों से पूर्ति प्रमाण के कागजात के लिए अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर लगा रहा हूं लेकिन कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह भी कहा कि मैं अपेक्षित कार्य को 15 दिन में पूरा करके दे सकता हूं लेकिन उससे पहले या तो निगम हमारा भुगतान करे अथवा पूर्ति प्रमाणपत्र जारी करे।
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प्रशासनिक सदस्य ने जताई नाराजगी
फोटो-52
भदोही। निरीक्षण के बाद निर्माण एजेंसी को दो सप्ताह की और मोहलत देने पर सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य उमेश कुमार गुप्ता ने नाराजगी जताई। कहा जो काम दो महीने में भी अधिकारी नहीं कर सके और लापरवाह बने रहे वे 15 दिन में और क्या कर सकते हैं? कहा कि इसके चलते जो देरी हो रही है उसका असर एक्सपो पर पड़ेगा। कहा अक्टूबर एक्सपो में अब समय नहीं बचा है जितनी भी देरी होगी उसका आयोजन पर असर पड़ेगा।
चेयरमैन ने बताया कि आठ मार्च को यहीं पर बैठक कर उद्योग विभाग और उप्र निर्माण निगम के अधिकारियों को 26 बिंदुओं पर काम पूरा करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके यहां एक्सपो आयोजन के लिए न्यूनतम जरूरतें पूरी नहीं की गई। बताया अक्तूबर एक्सपो जो वाराणसी में होता आया है उसकी तिथियां घोषित होने में विलंब हो रहा है। जबकि मझोले उद्यमियों के हितों को ध्यान में रखते हुए हम भदोही में आयोजन करना चाहते हैं। बताया कि 26 बिंदुओं में वातानुकूल, शीशे के दरवाजे, शौचालय, बिजली, लिफ्ट, फ्लोर आदि कुछ ऐसी बुनियादी जरूरतें हैं जो पूरी होने पर यहां आयोजन के लिए सोचा जा सकता है।
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निरीक्षण में में सीईपीसी के प्रशासनिक सदस्य उमेश कुमार गुप्ता, एकमा उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल हादी, संयुक्त सचिव आलोक बरनवाल, हाजी अब्दुल रब, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, ओएन मिश्रा, हुसैन जाफर हुसैनी, श्रीराम मौर्या, वासिफ अंसारी आदि मौजूद थे।
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रिजल्ट दें नहीं तो होगी एफआईआर
भदोही। निरीक्षण और प्रेस वार्ता में मौजूद संयुक्त आयुक्त (उद्योग) उमेश सिंह ने कहा कि शासन की भी मंशा है कि यहां कारपेट एक्सपो का आयोजन हो। क्योंकि सरकार की प्राथमिकता सूची में कालीन उद्योग भी है। 15 दिन में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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निर्माण एजेंसी के रुके हैं 3.65 करोड़
भदोही। जिस दुग्गल एसोसिएट्स ने एक्सपो मार्ट का निर्माण कराया है उसके परियोजनाधिकारी पुनीत कुमार मिश्रा भी आज मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे जो काम करके निर्माण निगम को दे चुके हैं उसमे से अब भी 3.65 करोड़ रुपये भुगतान नहीं हो सका है। कहा यदि भुगतान किए बगैर किसी अन्य एजेंसी से काम पूरा कराने का प्रयास किया गया तो वे अपने हितों की रक्षा के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को बाध्य होंगे। मिश्रा ने कहा कि मैं महीनों से पूर्ति प्रमाण के कागजात के लिए अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर लगा रहा हूं लेकिन कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह भी कहा कि मैं अपेक्षित कार्य को 15 दिन में पूरा करके दे सकता हूं लेकिन उससे पहले या तो निगम हमारा भुगतान करे अथवा पूर्ति प्रमाणपत्र जारी करे।
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प्रशासनिक सदस्य ने जताई नाराजगी
फोटो-52
भदोही। निरीक्षण के बाद निर्माण एजेंसी को दो सप्ताह की और मोहलत देने पर सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य उमेश कुमार गुप्ता ने नाराजगी जताई। कहा जो काम दो महीने में भी अधिकारी नहीं कर सके और लापरवाह बने रहे वे 15 दिन में और क्या कर सकते हैं? कहा कि इसके चलते जो देरी हो रही है उसका असर एक्सपो पर पड़ेगा। कहा अक्टूबर एक्सपो में अब समय नहीं बचा है जितनी भी देरी होगी उसका आयोजन पर असर पड़ेगा।