{"_id":"5c8159b2bdec22145e480685","slug":"181551980978-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूमि विवाद में फंसे दो पशु आश्रय स्थल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूमि विवाद में फंसे दो पशु आश्रय स्थल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ज्ञानपुर। डीघ ब्लॉक क्षेत्र के फुलवरिया और सागररायपुर गांव में बनने वाले पशु आश्रय स्थलों पर भूमि विवाद के कारण ग्रहण लगता जा रहा है। बार-बार राजस्व विभाग को अवगत कराने के बाद भी अधिकारी मामले को हल कराने की बजाए उलझाने में लगे हैं। माना जा रहा है कि शीघ्र ही मामला नहीं सुलझाया जा सका तो किसानों को और भी गंभीर परिस्थितियों से जूझना पड़ सकता है।
किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रहे छुट्टा घूमने वाले पशुओं के लिए प्रदेश सरकार भारीभरकम बजट निर्धारित कर आश्रय स्थलों के निर्माण पर जोर दे रही है। संरक्षण समिति और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयास से ग्राम पंचायत एवं निजी व्यवस्थाओं के तहत सड़कों, खलिहानों में टहल रहे पशुओं को आश्रय स्थल स्थापित कराने की कार्ययोजना को हरी झंडी दी गई, लेकिन डीघ क्षेत्र में यह योजना आरोप-प्रत्यारोप के जंजाल में उलझ गई। शुरुआती दौर में अन्य स्थानों की अपेक्षा डीघ क्षेत्र काफी पीछे था। अधिकारियों की पहल पर जंगीगंज पशु अस्पताल से संबद्घ सागररायपुर एवं डीघ पशु अस्पताल से जुड़े फुलवरिया गांव में जैसे ही बुनियाद रखी गई, वैसे ही ग्रामीणों ने झमेला डालकर रुकावट पैदा कर दी। डीघ के पशु चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार शुक्ला का कहना था कि मनरेगा के तहत बनने वाले आश्रय स्थलों का जब तक राजस्व विभाग पैमाइश नहीं कराएगा, तब तक निर्माण असंभव है। वहीं जंगीगंज के प्रभारी चिकित्सक डॉ. राम सिंह ने भी वही बात दोहराकर मामला ग्राम प्रधान पर छोड़ दिया। किसान रामराज, राजेश कुमार, सुखदेव, रामदुलार का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने आश्रय स्थलों के निर्माण को लेकर सक्रियता न दिखाई तो आगे भी छुट्टा टहल रहे पशुओं की भेंट चढ़कर फसलें बर्बादी हो जाएंगी। जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए राजस्व विभाग से अविलंब पैमाइश कराकर मामला हल कराने की गुहार लगाई है।
किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रहे छुट्टा घूमने वाले पशुओं के लिए प्रदेश सरकार भारीभरकम बजट निर्धारित कर आश्रय स्थलों के निर्माण पर जोर दे रही है। संरक्षण समिति और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयास से ग्राम पंचायत एवं निजी व्यवस्थाओं के तहत सड़कों, खलिहानों में टहल रहे पशुओं को आश्रय स्थल स्थापित कराने की कार्ययोजना को हरी झंडी दी गई, लेकिन डीघ क्षेत्र में यह योजना आरोप-प्रत्यारोप के जंजाल में उलझ गई। शुरुआती दौर में अन्य स्थानों की अपेक्षा डीघ क्षेत्र काफी पीछे था। अधिकारियों की पहल पर जंगीगंज पशु अस्पताल से संबद्घ सागररायपुर एवं डीघ पशु अस्पताल से जुड़े फुलवरिया गांव में जैसे ही बुनियाद रखी गई, वैसे ही ग्रामीणों ने झमेला डालकर रुकावट पैदा कर दी। डीघ के पशु चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार शुक्ला का कहना था कि मनरेगा के तहत बनने वाले आश्रय स्थलों का जब तक राजस्व विभाग पैमाइश नहीं कराएगा, तब तक निर्माण असंभव है। वहीं जंगीगंज के प्रभारी चिकित्सक डॉ. राम सिंह ने भी वही बात दोहराकर मामला ग्राम प्रधान पर छोड़ दिया। किसान रामराज, राजेश कुमार, सुखदेव, रामदुलार का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने आश्रय स्थलों के निर्माण को लेकर सक्रियता न दिखाई तो आगे भी छुट्टा टहल रहे पशुओं की भेंट चढ़कर फसलें बर्बादी हो जाएंगी। जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए राजस्व विभाग से अविलंब पैमाइश कराकर मामला हल कराने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन