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अपंजीकृत निर्माता से खरीद पर खरीदार को भरना होगा जीएसटी
Updated Sun, 30 Jul 2017 01:07 AM IST
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जीएसटी पर कार्यशाला
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भदोही। कालीन उद्योग में वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के प्रभावों और बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए शनिवार को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के कालीन भवन में जीएसटी विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्यत: नगर के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, निर्यातक और व्यापारी शामिल हुए। वाराणसी के सीए अजय कुमार मिश्रा ने प्रोजेक्टर के माध्यम से लोगों को जीएसटी पर जानकारी दी। बताया कि 16 अगस्त से ई-वे बिल प्रभावी हो जाने से काफी काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगेगा।
कालीन निर्यातक अक्सर स्थानीय उत्पादकों से भी तैयार कालीन खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में जीएसटी कौन देगा? यह बड़ा सवाल सामने आया। इस बारे में सीए ने स्पष्ट किया यदि विक्रेता जीएसटी में पंजीकृत है तो वह खरीदार से जीएसटी वसूलकर जमा करेगा और यदि अपंजीकृत है तो खरीदार ही जीएसटी जमा करेगा। हालांकि दोनों ही स्थिति में निर्यातक इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त करेगा। लोगों को एक खास बिंदु यह बताया गया कि खरीदे गए उक्त माल का इनपुट टैक्स क्रेडिट तीन माह के अंदर ही लिया जा सकेगा।
सीए सुहेल अतहर ने बताया कि 16 अगस्त से ई-वे बिल व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी। इस स्थिति में समस्त खरीद बिक्री इंटरनेट के माध्यम से होंगे। जीएसटी काउंसिल में खरीदार और विक्रेता के ई-वे बिल आपस में मैच करने चाहिए। अन्यथा की स्थिति में इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा। सवाल-जवाब के सत्र में व्यापारियों, व्यवसाइयों और निर्यातकों ने तमाम सवालों के जवाब लिए। पूर्व एकमाध्यक्ष विनय कपूर ने जाब वर्क पर जीएसटी से इंडस्ट्री को होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला। सीए केपी दूबे, सीए पीएन टंडन, एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल, शमीम आलम, अश्फाक अंसारी ने भी विचार व्यक्त किए। सूर्यमणि तिवारी, शिवसागर तिवारी, तनवीर हुसैन, हाजी फिरोज वजीरी, राजकुमार कोठारी, हाजी जलील अंसारी, रुपेश बरनवाल, मकसूद अंसारी, हाजी अब्दुल सत्तार, इस्तीयाक खां, जय प्रकाश गुप्ता, शाहिद अंसारी, शाहिद हुसैन, विकास महर्षि, गौरव बरनवाल, असगर अली, शिव कुमार मौर्य, प्रशांत मिश्रा, ओजैर महमूद, उमेश शुक्ला, मजहर अंसारी, मुश्ताक अंसारी, राधेश्याम गुप्ता, सुरेंद्र यादव, मो. मुस्तफा आदि मौजूद रहे।
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कालीन निर्यातक अक्सर स्थानीय उत्पादकों से भी तैयार कालीन खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में जीएसटी कौन देगा? यह बड़ा सवाल सामने आया। इस बारे में सीए ने स्पष्ट किया यदि विक्रेता जीएसटी में पंजीकृत है तो वह खरीदार से जीएसटी वसूलकर जमा करेगा और यदि अपंजीकृत है तो खरीदार ही जीएसटी जमा करेगा। हालांकि दोनों ही स्थिति में निर्यातक इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त करेगा। लोगों को एक खास बिंदु यह बताया गया कि खरीदे गए उक्त माल का इनपुट टैक्स क्रेडिट तीन माह के अंदर ही लिया जा सकेगा।
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सीए सुहेल अतहर ने बताया कि 16 अगस्त से ई-वे बिल व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी। इस स्थिति में समस्त खरीद बिक्री इंटरनेट के माध्यम से होंगे। जीएसटी काउंसिल में खरीदार और विक्रेता के ई-वे बिल आपस में मैच करने चाहिए। अन्यथा की स्थिति में इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा। सवाल-जवाब के सत्र में व्यापारियों, व्यवसाइयों और निर्यातकों ने तमाम सवालों के जवाब लिए। पूर्व एकमाध्यक्ष विनय कपूर ने जाब वर्क पर जीएसटी से इंडस्ट्री को होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला। सीए केपी दूबे, सीए पीएन टंडन, एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल, शमीम आलम, अश्फाक अंसारी ने भी विचार व्यक्त किए। सूर्यमणि तिवारी, शिवसागर तिवारी, तनवीर हुसैन, हाजी फिरोज वजीरी, राजकुमार कोठारी, हाजी जलील अंसारी, रुपेश बरनवाल, मकसूद अंसारी, हाजी अब्दुल सत्तार, इस्तीयाक खां, जय प्रकाश गुप्ता, शाहिद अंसारी, शाहिद हुसैन, विकास महर्षि, गौरव बरनवाल, असगर अली, शिव कुमार मौर्य, प्रशांत मिश्रा, ओजैर महमूद, उमेश शुक्ला, मजहर अंसारी, मुश्ताक अंसारी, राधेश्याम गुप्ता, सुरेंद्र यादव, मो. मुस्तफा आदि मौजूद रहे।
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