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केदारपुर में मिले रहस्यमय सिक्के
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कौलापुर। केदारपुर गांव में शनिवार को एक खेत से मिले सिक्के कौतूहल का सबब बन गए। बारिश होते ही बच्चे और गांव के लोग खेत में गए और कई सिक्के बीन कर घर ले आए। पीली धातु और कॉपर के रंग में दिख रहे सिक्कों को ग्रामीण सोने और तांबे का सिक्का बता रहे थे। गांव के कुछ बुजुुुर्गों ने कहा कि हर वर्ष पहली बारिश में गांव के खेतों में कुछ न कुछ विशेष मिलता है। लेकिन, ये सिक्के कहां से आते हैं, कोई नहीं जानता।
केदारपुर गांव में मूर्त गोसाईं मंदिर के समीप कमलाशंकर यादव का खेत है। यादव ने इन दिनों खेत को जोतकर छोड़ा हुआ है। शनिवार को इस सीजन की पहली बारिश हुई तो गांव के ऋषि, साक्षी, अट्टी, नान्हक गौड़, सुरक्षा यादव आदि बच्चों ने खेत में जाकर देखा तो पीले और तांबे के रंग में छोटे-छोटे कई सिक्के मिले। बताते हैं कि बच्चों ने थोड़ी खुदाई करके भी सिक्के निकाले। सिक्कों पर प्राचीन आकृति बनी हुई है। ये सिक्के सोने के हैं या किसी अन्य धातु के, यह जांच का विषय है, लेकिन यह रहस्य हर वर्ष पहली बारिश में ग्रामीणों के सामने आता है। गांव के लगभग 65 वर्षीय निर्भयराज सिंह ने कहा कि पहली बारिश में हर वर्ष इस खेत में सिक्के या कुछ न कुछ विशेष मिलता है। लेकिन, ये सिक्के कहां से आते हैं, यह कोई नहीं जानता। हालांकि गांव के प्रधान दिनेश शुक्ला ने इसे अफवाह बताया। कहा कि पता चलने पर मैंने फोन कर जानकारी ली तो पता चला कि ऐसा कुछ नहीं है।
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केदारपुर गांव में मूर्त गोसाईं मंदिर के समीप कमलाशंकर यादव का खेत है। यादव ने इन दिनों खेत को जोतकर छोड़ा हुआ है। शनिवार को इस सीजन की पहली बारिश हुई तो गांव के ऋषि, साक्षी, अट्टी, नान्हक गौड़, सुरक्षा यादव आदि बच्चों ने खेत में जाकर देखा तो पीले और तांबे के रंग में छोटे-छोटे कई सिक्के मिले। बताते हैं कि बच्चों ने थोड़ी खुदाई करके भी सिक्के निकाले। सिक्कों पर प्राचीन आकृति बनी हुई है। ये सिक्के सोने के हैं या किसी अन्य धातु के, यह जांच का विषय है, लेकिन यह रहस्य हर वर्ष पहली बारिश में ग्रामीणों के सामने आता है। गांव के लगभग 65 वर्षीय निर्भयराज सिंह ने कहा कि पहली बारिश में हर वर्ष इस खेत में सिक्के या कुछ न कुछ विशेष मिलता है। लेकिन, ये सिक्के कहां से आते हैं, यह कोई नहीं जानता। हालांकि गांव के प्रधान दिनेश शुक्ला ने इसे अफवाह बताया। कहा कि पता चलने पर मैंने फोन कर जानकारी ली तो पता चला कि ऐसा कुछ नहीं है।
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