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गंगा दशहरा पर उमड़ा आस्था का सैलाब
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सीतामढ़ी/गोपीगंज। मोक्षदायिनी गंगा के अवतरण दिवस गंगा दशहरा पर बुधवार को हजारों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने मां गंगा का पूजन कर लोक कल्याण की कामना की। विभिन्न मंदिरों में देवी-देवताओं का दर्शन-पूजन और दान कर पुण्य अर्जित किया।
कोनिया क्षेत्र के कलातुलसी गंगा तट पर गायत्री परिवार की ओर से गंगा स्वच्छता कार्यक्रम के तहत घाट की साफ सफाई की गई। परंपरा के अनुसार शाम को किसानों ने अपने खेतों में पांच स्थानों पर कूड़े करकट के ढेर जलाए। उड़िया बाबा आश्रम सीतामढ़ी के महंत एवं वयोवृद्ध संत बंशीधरदास उड़िया बाबा ने कहा कि सनातन धर्म में गंगा दशहरा का बड़ा महत्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाने की परंपरा रही है। गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस दिन गंगा में श्रद्धापूर्वक स्नान कर दान पुण्य करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं और भवसागर से मुक्ति मिल जाती है। कहा कि गंगा मोक्षदायिनी हैं। गंगा के नित्य दर्शन से हर कष्टों का निवारण होता है। जनपद के धार्मिक स्थलों सीतामढ़ी, बाबा सेमराध नाथ, बाबा जोगेश्वरनाथ धाम, बाबा धवासानाथ धाम, अचलेश्वरनाथ धाम, पश्चिम वाहिनी सहित कलिंजरा, गोपालापुर, बारीपुर, बनकट, डीघ, अरई, इटहरा, धनतुलसी, छेछुआ आदि गंगा घाटों पर तड़के ही स्नानार्थियों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगा कर पुण्य लाभ लिया।
गोपीगंज के रामपुर गंगा घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर गंगा दशहरा पर आस्थावानों की भीड़ उमड़ी। गंगा घाट पर बच्चों के साथ पहुंचे नर-नारियों ने आस्था की डुबकी लगाई और दान कर पुण्य अर्जित किया। बुधवार को भोर से ही श्रद्धालुओं का घाटों पर पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। समय के साथ घाटों पर भीड़ बढ़ती गई। जनपद के प्रमुख रामपुर गंगा घाट के साथ चतुर्मुखी घाट, गुलौरी जहांगीराबाद, डेरवां, बरजी, भवानीपुर, बिहरोजपुर, बेरासपुर, इब्राहिमपुर आदि घाटों पर स्नान दान का क्रम चलता रहा। स्नान-दान कर लोगों ने मां गंगा का विधिविधान से पूजन किया। घाटों पर लगे बालू के ढेर और गंदगी से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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कोनिया क्षेत्र के कलातुलसी गंगा तट पर गायत्री परिवार की ओर से गंगा स्वच्छता कार्यक्रम के तहत घाट की साफ सफाई की गई। परंपरा के अनुसार शाम को किसानों ने अपने खेतों में पांच स्थानों पर कूड़े करकट के ढेर जलाए। उड़िया बाबा आश्रम सीतामढ़ी के महंत एवं वयोवृद्ध संत बंशीधरदास उड़िया बाबा ने कहा कि सनातन धर्म में गंगा दशहरा का बड़ा महत्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाने की परंपरा रही है। गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस दिन गंगा में श्रद्धापूर्वक स्नान कर दान पुण्य करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं और भवसागर से मुक्ति मिल जाती है। कहा कि गंगा मोक्षदायिनी हैं। गंगा के नित्य दर्शन से हर कष्टों का निवारण होता है। जनपद के धार्मिक स्थलों सीतामढ़ी, बाबा सेमराध नाथ, बाबा जोगेश्वरनाथ धाम, बाबा धवासानाथ धाम, अचलेश्वरनाथ धाम, पश्चिम वाहिनी सहित कलिंजरा, गोपालापुर, बारीपुर, बनकट, डीघ, अरई, इटहरा, धनतुलसी, छेछुआ आदि गंगा घाटों पर तड़के ही स्नानार्थियों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगा कर पुण्य लाभ लिया।
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गोपीगंज के रामपुर गंगा घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर गंगा दशहरा पर आस्थावानों की भीड़ उमड़ी। गंगा घाट पर बच्चों के साथ पहुंचे नर-नारियों ने आस्था की डुबकी लगाई और दान कर पुण्य अर्जित किया। बुधवार को भोर से ही श्रद्धालुओं का घाटों पर पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। समय के साथ घाटों पर भीड़ बढ़ती गई। जनपद के प्रमुख रामपुर गंगा घाट के साथ चतुर्मुखी घाट, गुलौरी जहांगीराबाद, डेरवां, बरजी, भवानीपुर, बिहरोजपुर, बेरासपुर, इब्राहिमपुर आदि घाटों पर स्नान दान का क्रम चलता रहा। स्नान-दान कर लोगों ने मां गंगा का विधिविधान से पूजन किया। घाटों पर लगे बालू के ढेर और गंदगी से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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