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डंप हो रहा कचरा, निस्तारण के इंतजाम नाकाफी
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ज्ञानपुर। जिले के नगरीय इलाकों में प्रतिदिन 90 टन से अधिक कूड़ा निकल रहा है। इसमें भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा भी शामिल रहता है। इससे पर्यावरण संरक्षण की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। रोक के बावजूद प्लास्टिक पर रोक नहीं लग पाई। तालाबों पर अतिक्रमण और अवैैध खनन जारी है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का मसौदा अब तक मूर्त रूप नहीं ले पाया।
केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में स्वच्छ भारत मिशन शामिल है। सफाई को लेकर जहां तमाम जतन हो रहे हैं, वहीं सफाई के बाद निकलने वाले कूड़ों को निस्तारित करने को लेकर कोई पहल नहीं हो रही है। 17 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में दो नगर पालिका और सात नगर पंचायतें बनी हैं। नगरों में हर रोज साफ-सफाई के बाद 90 से 95 एमटी कूड़ा निकलता है। नगर प्रशासन की ओर से इन कूड़ों को ठिकाने लगाने की व्यवस्था नहीं है। इससे प्रतिदिन इधर-उधर खाली स्थानों पर ही इसे फेंका जा रहा है। भदोही नगर के आसपास खाली स्थानों पर जहां कूड़ा डंप किया जा रहा है, वहीं ज्ञानपुर के वीएनजीआईसी के समीप, गोपीगंज के विभिन्न मोहल्लों में कूड़े एकत्रित हो रहे हैं। इसी तरह घोसिया, सुरियावां, खमरिया, नई बाजार में भी कूड़ा-कचरा खाली स्थानों पर ही जमा किया जा रहा है। कूड़ों से उठने वाली दुर्गंध जहां लोगों को परेशान कर रही है, वहीं वातावरण भी दूषित हो रहा है। इस कूड़े में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पॉलीथिन होती है। यानी हर रोज 40 टन पॉलीथिन निकल रही है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए जमीन भी पिपरीस में चयनित की गई थी। उसके लिए धन भी जारी हुआ था। अहाता निर्माण का कार्य भी प्रारंभ हुआ था, लेकिन ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते निर्माण रुक गया जो अब तक शुरू नहीं हो सका।
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केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में स्वच्छ भारत मिशन शामिल है। सफाई को लेकर जहां तमाम जतन हो रहे हैं, वहीं सफाई के बाद निकलने वाले कूड़ों को निस्तारित करने को लेकर कोई पहल नहीं हो रही है। 17 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में दो नगर पालिका और सात नगर पंचायतें बनी हैं। नगरों में हर रोज साफ-सफाई के बाद 90 से 95 एमटी कूड़ा निकलता है। नगर प्रशासन की ओर से इन कूड़ों को ठिकाने लगाने की व्यवस्था नहीं है। इससे प्रतिदिन इधर-उधर खाली स्थानों पर ही इसे फेंका जा रहा है। भदोही नगर के आसपास खाली स्थानों पर जहां कूड़ा डंप किया जा रहा है, वहीं ज्ञानपुर के वीएनजीआईसी के समीप, गोपीगंज के विभिन्न मोहल्लों में कूड़े एकत्रित हो रहे हैं। इसी तरह घोसिया, सुरियावां, खमरिया, नई बाजार में भी कूड़ा-कचरा खाली स्थानों पर ही जमा किया जा रहा है। कूड़ों से उठने वाली दुर्गंध जहां लोगों को परेशान कर रही है, वहीं वातावरण भी दूषित हो रहा है। इस कूड़े में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पॉलीथिन होती है। यानी हर रोज 40 टन पॉलीथिन निकल रही है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए जमीन भी पिपरीस में चयनित की गई थी। उसके लिए धन भी जारी हुआ था। अहाता निर्माण का कार्य भी प्रारंभ हुआ था, लेकिन ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते निर्माण रुक गया जो अब तक शुरू नहीं हो सका।
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