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फसलीय अवशेषों को जलाने से घटती है उत्पादन क्षमता

Thu, 30 May 2019 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 May 2019 11:43 PM IST
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फसलीय अवशेषों को जलाने से घटती है उत्पादन क्षमता
ऊंज। विकास खंड डीघ के दरवांसी गांव में वृहस्पतिवार को प्रसार निदेशालय कृषि, शुआट्स की ओर से आयोजित कृषक प्रशिक्षण गोष्ठी में किसानों को ग्रीष्म कालीन जुताई, वर्षा ऋतु की फसलों का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ हरित क्रांति के तहत वृहद पौधरोपण और हानिकारक घटकों पर चर्चा कर जागरूक किया गया।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिशिर कुमार ने कहा कि फसलीय अवशेषों को ऊपजाऊ खेतों में जलाने की अपेक्षा गहरी जुताई करा कर छोड़ देने से अवशेष वर्मी कंपोस्ट के रूप में बदल कर मिट्टी को अधिक ताकतवर बनाते हैं। जानकारी के अभाव में बड़े पैमाने पर किसान अवशेष को जला देते हैं जो नहीं करना चाहिए। आग से जहां मृदा कला तापक्रम बढ़ जाता है, वहीं सख्त मिट्टी जल धारण करने की क्षमता कम कर देती है। गर्म तापमान के कारण लाभदायक कीटों और सूक्ष्म जीवों की क्षीणता अधिक हानिकारक हो जाती है। डॉ. टीडी मिश्रा ने बताया कि वर्षा कालीन फसलों की नर्सरी डालने के लिए पाली हाउस बहुपयोगी है। ग्रीष्म कालीन जुताई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रबी फसलों की कटाई के बाद 15 सेमी की जुताई करा देने से खेत की मिट्टी भुरभुरी होकर नमी संरक्षित रखने की क्षमता बढ़ा देती है। बारिश के दौरान वायुमंडल में नत्रजन भी जल में घुल कर खेत में संग्रहित होकर उर्वराशक्ति बढ़ाती है। कटाई के बाद फसल के बचे अवशेषों को रोटावेटर, श्रब मास्टर, कटर कम स्प्रेडर मशीनों से खेत की मिट्टी पलट कर भराई करने से छूटे डंठल, खरपतवार सड़कर आगे की खेती में उत्पादन को बढ़ाने में मददगार बनते हैं। वहीं कद्दू वर्गीय फसलों में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई, पौधों के कमजोर होने पर आवश्यकतानुसार यूरिया की टाप ड्रेसिंग की सलाह दी। यूरिया की अधिकता फसल को झुलसाकर नुकसान पहुंचाती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। बताया हल्दी-अदरक और सूरन की बुवाई के बाद खेत को सूखे पुआल, पत्ती आदि से ढंकना चाहिए। इससे फसलों का जमाव अच्छे ढंग से होता है। अंत में शासन की ओर से मिलने वालीं सुविधाओं, कीटों से बचाव, ग्लोबल वार्मिंग को संरक्षित रखने के लिए बहुसंख्या में पौधरोपण की जानकारी दी गई। इस मौके पर कृषि रक्षा विशेषज्ञ, डॉ. अवधेश कुमार संत, मनीष सिंह, सत्य नारायण, किसान अनिल सिंह, हिंछलाल यादव, संजय सिंह, हरिश्चंद्र पांडेय, धर्मराज सिंह, इंद्रपाल सिंह, शिवपूजन सिंह, पप्पू यादव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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