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पांच महीने बाद भी नहीं हो सकी जांच,शिकायतकर्ता हलकान
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लालानगर। डीघ विकास खंड क्षेत्र के तटवर्ती गांव अमिलौर-उपरवार में अनियमितता की भेंट चढ़ चुके शौचालयों और अधूरे पड़े आवास के मामले में पांच माह बाद भी जांच प्रक्रिया शुरू न कराने का मामला चर्चा में आ गया है। बुधवार को ग्रामीणों ने शिकायत शासन को भेज कर राम पंचायतों का लेखा-जोखा रखने वाले संबंधित विभागों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
गांव निवासी बुद्घिराम, नंदलाल, गोविंद, समरजीत, मितई समेत दर्जनों शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बीते वित्तीय वर्ष में छह सौ से अधिक शौचालय और 25 की संख्या में आवासों का आवंटन पात्रों के लिए किया गया था। जहां ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने शासन-प्रशासन की मंशा के विपरीत अपात्रों का चयन कर लाखों की हेराफेरी कर दी। यहां तक कि शौचालयों के लक्ष्य का आधा हिस्सा भी पात्रों तक न पहुंचाया जा सका, जबकि जिन-जिन पात्रों को आवास मिला, वे आज भी या तो अधूरे पड़े हैं या मानक की अनदेखी की भेंट चढ़कर शासन के फरमान को आईना दिखा रहे हैं। योजनाओं में व्यापक गड़बड़ी और सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायत 10 दिसंबर 2018 को शपथ पत्र के साथ की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से विकास भवन कार्यालय में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत प्रधान एवं सेक्रेटरी को खुली छूट मिलने की आशंका बन गई। बुधवार को शिकायतकर्ताओं ने शपथ पत्र के साथ ग्राम विकास सचिव लखनऊ को मामले से अवगत करा कर डीपीआरओ, जिला पंचायत राज अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी को भी प्रति सौंपी। चेतावनी दी गई कि मामले में जिला प्रशासन ने उचित कदम न उठाया तो शपथ पत्र के साथ लखनऊ पहुंचने में देर नहीं लगेगी। निष्पक्ष जांच हो गई तो ओडीएफ की हकीकत भी सामने आ जाएगी।
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गांव निवासी बुद्घिराम, नंदलाल, गोविंद, समरजीत, मितई समेत दर्जनों शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बीते वित्तीय वर्ष में छह सौ से अधिक शौचालय और 25 की संख्या में आवासों का आवंटन पात्रों के लिए किया गया था। जहां ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने शासन-प्रशासन की मंशा के विपरीत अपात्रों का चयन कर लाखों की हेराफेरी कर दी। यहां तक कि शौचालयों के लक्ष्य का आधा हिस्सा भी पात्रों तक न पहुंचाया जा सका, जबकि जिन-जिन पात्रों को आवास मिला, वे आज भी या तो अधूरे पड़े हैं या मानक की अनदेखी की भेंट चढ़कर शासन के फरमान को आईना दिखा रहे हैं। योजनाओं में व्यापक गड़बड़ी और सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायत 10 दिसंबर 2018 को शपथ पत्र के साथ की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से विकास भवन कार्यालय में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत प्रधान एवं सेक्रेटरी को खुली छूट मिलने की आशंका बन गई। बुधवार को शिकायतकर्ताओं ने शपथ पत्र के साथ ग्राम विकास सचिव लखनऊ को मामले से अवगत करा कर डीपीआरओ, जिला पंचायत राज अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी को भी प्रति सौंपी। चेतावनी दी गई कि मामले में जिला प्रशासन ने उचित कदम न उठाया तो शपथ पत्र के साथ लखनऊ पहुंचने में देर नहीं लगेगी। निष्पक्ष जांच हो गई तो ओडीएफ की हकीकत भी सामने आ जाएगी।
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