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सत्संग एवं श्रीराम कथा
Updated Sat, 07 Apr 2018 12:08 AM IST
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मारवाड़ी सत्संग समाज द्वारा रजपूरा बीडा कालोनी में आयोजित दुर्लभ सत्संग एवं श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्री विजयानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। श्री रामचरित मानस छह शास्त्रों व 18 पुराणों का रस है। इसमे वेद, श्रुति एवं पुराणों के मान्य सूत्र भी समाहित है, जो व्यक्ति और समाज के जीवन के लिए आवश्यक हैं। श्रीराम कथा श्रवण के लिए श्रोता काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। महाराज ने लोगों को बताया कि कथा सुनने के साथ साथ बताए गए गुणों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की उन्नति के लिए दो बातें आवश्यक है, एक उत्तम कुल में जन्म और दूसरा श्रेष्ठ गुरू की संगति। उत्तम कुल में जन्म लेने से व्यक्ति संस्कार संपन्न हो जाता है और श्रेष्ठ गुरू का मार्गदर्शन जीवन में सर्वांगीण उन्नति प्रदान करता है। महाराज ने लोगों को बताया कि श्रीराम कथा सुनो तो उस पर विचार भी करो। विचार करोगे तो उसकी बातों का पालन करोगे जो तुम्हारे जीवन की सफलता की कुं जी है। श्रीराम कथा के दौरान आयोजक मारवाड़ी सत्संग समाज के राम गोपाल गोयल, अजय काबरा, हरीश चांडक, केके श्रीवास्तव, गोपाल हर्ष, जेएस जैन, बसंत चांडक, अनिल पोद्दार, विजय पाठक, अशोक साबू, रामू शर्मा आदि रहे।
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उन्होंने कहा कि व्यक्ति की उन्नति के लिए दो बातें आवश्यक है, एक उत्तम कुल में जन्म और दूसरा श्रेष्ठ गुरू की संगति। उत्तम कुल में जन्म लेने से व्यक्ति संस्कार संपन्न हो जाता है और श्रेष्ठ गुरू का मार्गदर्शन जीवन में सर्वांगीण उन्नति प्रदान करता है। महाराज ने लोगों को बताया कि श्रीराम कथा सुनो तो उस पर विचार भी करो। विचार करोगे तो उसकी बातों का पालन करोगे जो तुम्हारे जीवन की सफलता की कुं जी है। श्रीराम कथा के दौरान आयोजक मारवाड़ी सत्संग समाज के राम गोपाल गोयल, अजय काबरा, हरीश चांडक, केके श्रीवास्तव, गोपाल हर्ष, जेएस जैन, बसंत चांडक, अनिल पोद्दार, विजय पाठक, अशोक साबू, रामू शर्मा आदि रहे।
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