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एकमा में जीएसटी पर कार्यशाला (तीन खबरें)
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:47 AM IST
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जीएसटी से न घबराएं कालीन निर्यातक
जीएसटी पर एकमा सभागार में कार्यशाला में बोले आयुक्त जीएसटी
माल निर्यात पर मिलेगा शत प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट
अमर उजाला ब्यूरो
भदोही।
आयुक्त जीएसटी इलाहाबाद पीएन तिवारी ने कहा कि जीएसटी से कालीन निर्यातकों और व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह व्यापारियों के हित के लिए लाया गया है। इससे न केवल व्यापारी सुरक्षित रहेंगे बल्कि उन्हें काम करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि यह भ्रांति है कि कालीन निर्यातकों को मुश्किलें आएंगी और उन्हें अतिरिक्त खर्च करना होगा। वे गुरूवार को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के सभागार में निर्यातकों, उत्पादकों और व्यापारियों को संबोधित कर रहे थे।
आयुक्त ने कहा कि सरकार की नीति साफ है। कालीन निर्यात होने के तत्काल बाद 90 प्रतिशत तक भुगतान किया हुआ जीएसटी रिफंड हो जाएगा। बाकी 10 प्रतिशत भी एक मियाद के भीतर वापस मिल जाएगा। कहा कि एक बार जीएसटी में अभ्यस्त होते ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा। कहा कि अधिकतर लोग बुनकरों और मजदूरों पर जीएसटी को दुश्वारी बता रहे हैं। जबकि यह सेवा क्षेत्र में आता है। और पहले भी लोग सेवाकर देते रहे हैं।
एकमा अध्यक्ष गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने कालीन उद्यमियों की ओर से 15 सवालों का एक मांग पत्र सौंपा और आयुक्त से उन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने पूछा कि जीएसटी चार्ज करने वाला व्यापारी यदि जीएसटी जमा न करे तो इनपुट टैक्स क्रेडिट कैसे प्राप्त होगा? 30 जून तक जो स्टाक है उसे हम कहां और कैसे दिखाएंगे? अक्सर आयातक दिए हुए आर्डर को 6 माह से अधिक समय के लिए रोक देता है। उस स्थिति में कालीन निर्यातक क्या करेंगें। अक्सर पोर्ट से भी परिस्थितिवश माल वापस मंगाना पड़ता है। उस स्थिति में क्या निदान है? दूसरे प्रांतों में माल उत्पादन करने और माल निर्यात करने की स्थिति में हमारे व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आदि सवालों के जवाब मांगे। आयुक्त की ओर से कई सवालों के जवाब दिए गए और कुछ के बारे में दोबारा आकर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही गई। कार्यशाला को संयुक्त महानिदेशक, विदेश व्यापार वाराणसी अमित कुमार और प्रमोद शिवराम ने भी संबोधित किया। संचालन विनय कपूर ने किया। एकमा के संयुक्त सचिव शमीम आलम, अश्फाक अंसारी, रजा खां, पीसी जायसवाल, उमेश गुप्ता, मकसूद अंसारी, हाजी फिरोज वजीरी, भरतलाल मौर्य, तनवीर हुसैन, रुपेश बरनवाल, हाजी अब्दुल सत्तार, शाहिद अंसारी, सीए विकास महर्षि, केपी दूबे, अंकुश ठुकराल, रामचंद्र यादव, जेपी गुप्ता, एचएन मौर्य, दिलीप गुप्ता, जाबिर बाबू अंसारी, मास्टर मोबीन, हाजी शाहिद हुसैन, संजय बरनवाल, नसीम अंसारी, श्रीराम मौर्य आदि मौजूद रहे।
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वर्षों बाद उमड़ी भारी भीड़
भदोही। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से आम निर्यातक और व्यापारी कितना पशोपेश में हैं। इसका अंदाजा आज कार्यशाला के दौरान खचाखच भरे एकमा सभागार से लग रहा था। अंदर सभी कुर्सियां भरने के बाद भारी संख्या में लोग खड़े होकर जीएसटी के बारे में जानकारी ले रहे थे। इतना ही नहीं, तीन दर्जन से अधिक लोग सभागार के बाहर खड़े होकर अंदर का नजारा ले रहे थे। लोगों में इस बात की भी चर्चा रही कि वर्षों बाद एकमा के किसी कार्यक्रम में इतनी भीड़ उमड़ी। बहुत से लोगों ने अव्यवस्था के लिए एकमा को जिम्मेदार ठहराया।
अनुत्तरित रह गए 15 में से अधिकतर सवाल
भदोही (ब्यूरो)। कार्यशाला शुरू होने से पूर्व ही एकमा पदाधिकारियों ने कालीन उद्यमियों की ओर से जीएसटी से संबंधित 15 सवालों का प्रश्नावली तैयार कर ली थी। इस बाबत पूर्व एकमा ध्यक्ष विनय कपूर ने बताया कि जहां-जहां चीजें स्पष्ट नहीं थी, हम लोगों ने सवाल बनाए थे। लेकिन जीएसटी आयुक्त की ओर से मुश्किल से 5 प्रश्नों के जवाब ही दे पाए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जैसे जैसे जीएसटी अपनाते जाएंगे, आने वाली समस्याओं के निराकरण का अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है।
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जीएसटी से न घबराएं कालीन निर्यातक
जीएसटी पर एकमा सभागार में कार्यशाला में बोले आयुक्त जीएसटी
माल निर्यात पर मिलेगा शत प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट
अमर उजाला ब्यूरो
भदोही।
आयुक्त जीएसटी इलाहाबाद पीएन तिवारी ने कहा कि जीएसटी से कालीन निर्यातकों और व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह व्यापारियों के हित के लिए लाया गया है। इससे न केवल व्यापारी सुरक्षित रहेंगे बल्कि उन्हें काम करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि यह भ्रांति है कि कालीन निर्यातकों को मुश्किलें आएंगी और उन्हें अतिरिक्त खर्च करना होगा। वे गुरूवार को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के सभागार में निर्यातकों, उत्पादकों और व्यापारियों को संबोधित कर रहे थे।
आयुक्त ने कहा कि सरकार की नीति साफ है। कालीन निर्यात होने के तत्काल बाद 90 प्रतिशत तक भुगतान किया हुआ जीएसटी रिफंड हो जाएगा। बाकी 10 प्रतिशत भी एक मियाद के भीतर वापस मिल जाएगा। कहा कि एक बार जीएसटी में अभ्यस्त होते ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा। कहा कि अधिकतर लोग बुनकरों और मजदूरों पर जीएसटी को दुश्वारी बता रहे हैं। जबकि यह सेवा क्षेत्र में आता है। और पहले भी लोग सेवाकर देते रहे हैं।
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एकमा अध्यक्ष गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने कालीन उद्यमियों की ओर से 15 सवालों का एक मांग पत्र सौंपा और आयुक्त से उन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने पूछा कि जीएसटी चार्ज करने वाला व्यापारी यदि जीएसटी जमा न करे तो इनपुट टैक्स क्रेडिट कैसे प्राप्त होगा? 30 जून तक जो स्टाक है उसे हम कहां और कैसे दिखाएंगे? अक्सर आयातक दिए हुए आर्डर को 6 माह से अधिक समय के लिए रोक देता है। उस स्थिति में कालीन निर्यातक क्या करेंगें। अक्सर पोर्ट से भी परिस्थितिवश माल वापस मंगाना पड़ता है। उस स्थिति में क्या निदान है? दूसरे प्रांतों में माल उत्पादन करने और माल निर्यात करने की स्थिति में हमारे व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आदि सवालों के जवाब मांगे। आयुक्त की ओर से कई सवालों के जवाब दिए गए और कुछ के बारे में दोबारा आकर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही गई। कार्यशाला को संयुक्त महानिदेशक, विदेश व्यापार वाराणसी अमित कुमार और प्रमोद शिवराम ने भी संबोधित किया। संचालन विनय कपूर ने किया। एकमा के संयुक्त सचिव शमीम आलम, अश्फाक अंसारी, रजा खां, पीसी जायसवाल, उमेश गुप्ता, मकसूद अंसारी, हाजी फिरोज वजीरी, भरतलाल मौर्य, तनवीर हुसैन, रुपेश बरनवाल, हाजी अब्दुल सत्तार, शाहिद अंसारी, सीए विकास महर्षि, केपी दूबे, अंकुश ठुकराल, रामचंद्र यादव, जेपी गुप्ता, एचएन मौर्य, दिलीप गुप्ता, जाबिर बाबू अंसारी, मास्टर मोबीन, हाजी शाहिद हुसैन, संजय बरनवाल, नसीम अंसारी, श्रीराम मौर्य आदि मौजूद रहे।
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वर्षों बाद उमड़ी भारी भीड़
भदोही। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से आम निर्यातक और व्यापारी कितना पशोपेश में हैं। इसका अंदाजा आज कार्यशाला के दौरान खचाखच भरे एकमा सभागार से लग रहा था। अंदर सभी कुर्सियां भरने के बाद भारी संख्या में लोग खड़े होकर जीएसटी के बारे में जानकारी ले रहे थे। इतना ही नहीं, तीन दर्जन से अधिक लोग सभागार के बाहर खड़े होकर अंदर का नजारा ले रहे थे। लोगों में इस बात की भी चर्चा रही कि वर्षों बाद एकमा के किसी कार्यक्रम में इतनी भीड़ उमड़ी। बहुत से लोगों ने अव्यवस्था के लिए एकमा को जिम्मेदार ठहराया।
अनुत्तरित रह गए 15 में से अधिकतर सवाल
भदोही (ब्यूरो)। कार्यशाला शुरू होने से पूर्व ही एकमा पदाधिकारियों ने कालीन उद्यमियों की ओर से जीएसटी से संबंधित 15 सवालों का प्रश्नावली तैयार कर ली थी। इस बाबत पूर्व एकमा ध्यक्ष विनय कपूर ने बताया कि जहां-जहां चीजें स्पष्ट नहीं थी, हम लोगों ने सवाल बनाए थे। लेकिन जीएसटी आयुक्त की ओर से मुश्किल से 5 प्रश्नों के जवाब ही दे पाए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जैसे जैसे जीएसटी अपनाते जाएंगे, आने वाली समस्याओं के निराकरण का अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है।