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स्टेशन पर पेयजल संकट
Updated Mon, 19 Jun 2017 01:27 AM IST
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सुरियावां/चौरी। वाराणसी- प्रतापगढ़ रेल प्रखंड और पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख स्टेशनों पर पेयजल संकट यात्रियों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। भीषण गर्मी और उसम के बीच लंबी दूरी से सफर कर आ रहे यात्रियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। भदोही और माधोसिंह स्टेशन को छोड़ दिया जाए तो करीब पांच स्टेशनों पर हैंडपंप के सहारे प्यास बुझती है। ज्यादातर स्टेशनों पर हैंडपंप खराब होने से लोगों को प्यास बुझाने के लिए जूझना पड़ता है। कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के पेयजल संकट के बीच ग्रामीण बाल्टी और जग से पानी को बेच रहे हैं।
रेलवे मंत्रालय स्टेशनों को आधुनिक करने की पहल कर रहा है लेकिन पेयजल को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही है। ट्रैक दोहरीकरण से लेकर यात्रियों को बैठने की व्यवस्था स्टेशनों पर कर दी गई है लेकिन पानी की बेहतर आपूर्ति के लिए कोई व्यवस्था न होने से यात्रियों को पानी के लिए परेशाना होना पड़ता है। वाराणसी-प्रतापगढ़ रेल रूट पर काशी विश्वनाथ, दादर- गोरखपुर, जनता एक्सप्रेस, इंटरसिटी, मेमू, पैसेंजर समेत कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन होता है जबकि पूर्वोत्तर रेलवे रूट पर पवन एक्सप्रेस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पैसेंजर, विभूति एक्सप्रेस समेत दर्जन भर से अधिक प्रमुख ट्रेनों हर रोज आती-जाती हैं। लंबी दूरी से चलने वाली ट्रेनों में बैठने वाले यात्री गर्मी में प्यास बुझाने के लिए स्टेशनों पर उतरते हैं लेकिन पानी न मिलने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ जाता है। आर्थिक रूप से मजबूत लोग दूकानों से पानी की बोतल लेते हैं लेकिन सामान्य लोग हैंडपंप आदि पर ही पानी भरने के लिए पहुंचते हैं। ज्ञानपुर रोड स्टेशन, सरायकंसराय, परसीपुर, मोढ़, जंगीगंज, कटका पर लगे दो से तीन हैंडपंप खराब हो गए हैं। सुरियावां स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर लगा हैंडपंप तीन दिन से खराब है जबकि एक पर पहले से ही पेयजल संकट चल रहा है। दोनो प्लेटफार्म पर पानी की व्यवस्था न होने से लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। सरायकंसराय और परसीपुर स्टेशन पर तो स्थिति यह है कि लोग बाल्टी और लोटा लेकर पानी बेचने के लिए पहुंच जाते हैं।
सुरियावां के स्टेशन अधीक्षक एलबी राम ने कहा कि खराब हैंडपंप को सही करने के लिए विभागीय अधिकारियों को सूचना दी गई है। एक या दो दिन में उसे सही कर लिया जाएगा।
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रेलवे मंत्रालय स्टेशनों को आधुनिक करने की पहल कर रहा है लेकिन पेयजल को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही है। ट्रैक दोहरीकरण से लेकर यात्रियों को बैठने की व्यवस्था स्टेशनों पर कर दी गई है लेकिन पानी की बेहतर आपूर्ति के लिए कोई व्यवस्था न होने से यात्रियों को पानी के लिए परेशाना होना पड़ता है। वाराणसी-प्रतापगढ़ रेल रूट पर काशी विश्वनाथ, दादर- गोरखपुर, जनता एक्सप्रेस, इंटरसिटी, मेमू, पैसेंजर समेत कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन होता है जबकि पूर्वोत्तर रेलवे रूट पर पवन एक्सप्रेस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पैसेंजर, विभूति एक्सप्रेस समेत दर्जन भर से अधिक प्रमुख ट्रेनों हर रोज आती-जाती हैं। लंबी दूरी से चलने वाली ट्रेनों में बैठने वाले यात्री गर्मी में प्यास बुझाने के लिए स्टेशनों पर उतरते हैं लेकिन पानी न मिलने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ जाता है। आर्थिक रूप से मजबूत लोग दूकानों से पानी की बोतल लेते हैं लेकिन सामान्य लोग हैंडपंप आदि पर ही पानी भरने के लिए पहुंचते हैं। ज्ञानपुर रोड स्टेशन, सरायकंसराय, परसीपुर, मोढ़, जंगीगंज, कटका पर लगे दो से तीन हैंडपंप खराब हो गए हैं। सुरियावां स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर लगा हैंडपंप तीन दिन से खराब है जबकि एक पर पहले से ही पेयजल संकट चल रहा है। दोनो प्लेटफार्म पर पानी की व्यवस्था न होने से लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। सरायकंसराय और परसीपुर स्टेशन पर तो स्थिति यह है कि लोग बाल्टी और लोटा लेकर पानी बेचने के लिए पहुंच जाते हैं।
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सुरियावां के स्टेशन अधीक्षक एलबी राम ने कहा कि खराब हैंडपंप को सही करने के लिए विभागीय अधिकारियों को सूचना दी गई है। एक या दो दिन में उसे सही कर लिया जाएगा।
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