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नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस ने किया मार्च
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:37 AM IST
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ज्ञानपुर। नोटबंदी की दूसरी वर्षगांठ पर सोमवार को कांग्रेस ने पैदल मार्च निकालकर दुर्गागंज तिराहे पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा कि नोटबंदी से लघु एवं मध्यम उद्योग पूरी तरह तबाह हो गया। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान हुआ।
जिलाध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर भ्रमण कर केंद्र सरकार की गलत नीतियों को बताया। ज्ञानपुर के दुर्गागंज तिराहे पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। डॉ. नीलम मिश्रा ने कहा कि आठ नवंबर 2016 की रात को देश के प्रधानमंत्री ने नाटकीय ढंग से नोटबंदी की घोषणा कर दी। इससे एक झटके में पांच सौ और एक हजार के नोट चलन से बाहर हो गए। इसके बाद लोगों को अपने नोट बदलने के लिए बैंकों में दौड़ना पड़ा। कई लोगों की जान भी इस दौरान चली गई। नई मुद्रा छापने पर ही करीब आठ हजार करोड़ रुपये की लागत आई। सरकार के इस तुगलकी फरमान से देश को कुछ फायदा तो नहीं मिला, लेकिन नुकसान जरूर हुआ। नोटबंदी ने कई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को समाप्त कर दिया, कुटीर और छोटे सेक्टर को मिटा दिया। दैनिक मजदूरों को रोजी रोटी से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी एक घोटाला है। सरकार बताए कि नोटबंदी से देश को क्या फायदा हुआ। इस मौके पर जगदीश पासी, सुरेश उपाध्याय, संजीव दुबे, प्रेमबिहारी उपाध्याय, राजेश पांडेय, अशोक दुबे, कुलदीप श्रीवास्तव, गुलजारी उपाध्याय, लवकुश मिश्रा, अनुपम आनंद उपाध्याय, रामधनी पांडेय, अशोक मिश्रा, शारदा सरोज, रंगनाथ दुबे, अवधेश पाल, हीरामणि चौबे, तारा शंकर दुबे, जान मोहम्मद, सगीर, अबरार, डॉ. समद, सनाउल्ला, कैलाश नाथ आदि रहे।
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जिलाध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर भ्रमण कर केंद्र सरकार की गलत नीतियों को बताया। ज्ञानपुर के दुर्गागंज तिराहे पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। डॉ. नीलम मिश्रा ने कहा कि आठ नवंबर 2016 की रात को देश के प्रधानमंत्री ने नाटकीय ढंग से नोटबंदी की घोषणा कर दी। इससे एक झटके में पांच सौ और एक हजार के नोट चलन से बाहर हो गए। इसके बाद लोगों को अपने नोट बदलने के लिए बैंकों में दौड़ना पड़ा। कई लोगों की जान भी इस दौरान चली गई। नई मुद्रा छापने पर ही करीब आठ हजार करोड़ रुपये की लागत आई। सरकार के इस तुगलकी फरमान से देश को कुछ फायदा तो नहीं मिला, लेकिन नुकसान जरूर हुआ। नोटबंदी ने कई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को समाप्त कर दिया, कुटीर और छोटे सेक्टर को मिटा दिया। दैनिक मजदूरों को रोजी रोटी से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी एक घोटाला है। सरकार बताए कि नोटबंदी से देश को क्या फायदा हुआ। इस मौके पर जगदीश पासी, सुरेश उपाध्याय, संजीव दुबे, प्रेमबिहारी उपाध्याय, राजेश पांडेय, अशोक दुबे, कुलदीप श्रीवास्तव, गुलजारी उपाध्याय, लवकुश मिश्रा, अनुपम आनंद उपाध्याय, रामधनी पांडेय, अशोक मिश्रा, शारदा सरोज, रंगनाथ दुबे, अवधेश पाल, हीरामणि चौबे, तारा शंकर दुबे, जान मोहम्मद, सगीर, अबरार, डॉ. समद, सनाउल्ला, कैलाश नाथ आदि रहे।
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