{"_id":"598f51af4f1c1bfe538b49d3","slug":"131502564783-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिर्फ जिला अस्पताल में मिलती है आक्सीजन सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिर्फ जिला अस्पताल में मिलती है आक्सीजन सुविधा
Updated Sun, 13 Aug 2017 01:04 AM IST
विज्ञापन
सिर्फ जिला अस्पताल में मिलती है आक्सीजन सुविधा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर (भदोही)। जिले के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। मरीजों को रेफर करने की प्रवृत्ति के चलते सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन सिलेंडर की खपत ही न के बराबर है। जिला अस्पताल में भी 10 से 12 दिन में महज एक सिलेंडर की खपत हो पाती है। इससे जिले के सरकारी अस्पताल गोरखपुर जैसी घटना को लेकर बेफिक्र हैं लेकिन वह गंभीर भी नहीं है कि अगर सभी जिलों के अस्पताल रेफर करने की प्रवृत्ति से बाज आकर कुछ गंभीर मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी अपने स्तर पर ही ले लेते तो बनारस, लखनऊ के बड़े अस्पतालों पर दबाव ज्यादा न बढ़ता।
गोरखपुर में करीब 30 बच्चों की मौत की घटना के बाद जिले में स्वास्थ्य एवं जिला प्रशासन ने इस बाबत कोई सक्रियता नहीं दिखाई है। हालांकि उस मुकाबले जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं। फिर भी जिले में जीवन रक्षक व्यवस्था की दरकार है। जिले में आईसीयू व्यवस्था से लैस एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। सिर्फ महराजा चेतसिंह जिला अस्पताल ही ऐसा हैं, जहां सेंट्रल ऑक्सीजन की सप्लाई इमर्जेंसी के प्रत्येक बेड पर है। एक बार आक्सीजन के सिलेंडरों की रीफिलिंग कराने पर तीन-चार महीने के लिए फुरसत हो जाती है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तो है, साथ ही व्यवस्था दुरुस्त रखने को लेकर भी कई बिंदुओं पर चूक देखी जाती है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी के बेडों पर लगे उपकरणों से जो ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, उसकी रीफिलिंग वाराणसी के कैनाल रोड स्थित दी कामरूप इंड्रस्ट्री लिमिटेड के यहां से होती है। रीफिलिंग में करीब पांच हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके लिए अस्पताल पर कोई बकाया नहीं है। अस्पताल में कुल नौ मेगा सिलेंडर हैं। 12 छोटे सिलेंडर हैं। मेगा सिलेंडर से ऑक्सीजन की आपूर्ति बेड तक होती है। अस्पताल में एनीस्थीसिया समेत गंभीर रोग के मरीज आने पर ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। जिले के अस्पतालों में जो दवाएं उपलब्ध रहती हैं, उसी से मरीजों में बांटकर काम चलाया जाता है। दवाओं के खत्म होने पर अगली खेप आने तक दवा नहीं मिलती। खास बात कि जिले में स्वास्थ्य महकमे के अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी सुविधाओं को लेकर अधिक सक्रिय नहीं रहते। जनप्रतिनिधियों का हाल तो पूछिए ही मत।
आईसीयू सुविधा रहने पर ही आक्सीजन की खपत होती है। जिला अस्पताल में सेंट्रल सप्लाई है लेकिन गंभीर मरीजों को जरूरत पर सुविधा मिलती है। गोरखपुर घटना को लेकर शासन से किसी तरह का दिशा-निर्देश नहीं मिला है। - डॉ. सतीश सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर में करीब 30 बच्चों की मौत की घटना के बाद जिले में स्वास्थ्य एवं जिला प्रशासन ने इस बाबत कोई सक्रियता नहीं दिखाई है। हालांकि उस मुकाबले जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं। फिर भी जिले में जीवन रक्षक व्यवस्था की दरकार है। जिले में आईसीयू व्यवस्था से लैस एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। सिर्फ महराजा चेतसिंह जिला अस्पताल ही ऐसा हैं, जहां सेंट्रल ऑक्सीजन की सप्लाई इमर्जेंसी के प्रत्येक बेड पर है। एक बार आक्सीजन के सिलेंडरों की रीफिलिंग कराने पर तीन-चार महीने के लिए फुरसत हो जाती है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तो है, साथ ही व्यवस्था दुरुस्त रखने को लेकर भी कई बिंदुओं पर चूक देखी जाती है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी के बेडों पर लगे उपकरणों से जो ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, उसकी रीफिलिंग वाराणसी के कैनाल रोड स्थित दी कामरूप इंड्रस्ट्री लिमिटेड के यहां से होती है। रीफिलिंग में करीब पांच हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके लिए अस्पताल पर कोई बकाया नहीं है। अस्पताल में कुल नौ मेगा सिलेंडर हैं। 12 छोटे सिलेंडर हैं। मेगा सिलेंडर से ऑक्सीजन की आपूर्ति बेड तक होती है। अस्पताल में एनीस्थीसिया समेत गंभीर रोग के मरीज आने पर ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। जिले के अस्पतालों में जो दवाएं उपलब्ध रहती हैं, उसी से मरीजों में बांटकर काम चलाया जाता है। दवाओं के खत्म होने पर अगली खेप आने तक दवा नहीं मिलती। खास बात कि जिले में स्वास्थ्य महकमे के अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी सुविधाओं को लेकर अधिक सक्रिय नहीं रहते। जनप्रतिनिधियों का हाल तो पूछिए ही मत।
विज्ञापन
आईसीयू सुविधा रहने पर ही आक्सीजन की खपत होती है। जिला अस्पताल में सेंट्रल सप्लाई है लेकिन गंभीर मरीजों को जरूरत पर सुविधा मिलती है। गोरखपुर घटना को लेकर शासन से किसी तरह का दिशा-निर्देश नहीं मिला है। - डॉ. सतीश सिंह, सीएमओ
विज्ञापन