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केएनपीजी के छात्रसंघ अध्यक्ष को नहीं मिली राहत
Updated Sat, 01 Jul 2017 01:31 AM IST
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ज्ञानपुर। अभिलेखों में हेराफेरी कर एडमिशन कराने के बाद चुनाव लड़ने के आरोप में फंसे काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष किशन शुक्ला की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी कोर्ट) की अदालत ने शुक्रवार को छात्रसंघ अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज कर दी।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अमन शुक्ला ने आरोप लगाया गया था कि किशन शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट से निर्देशित लिंगदोह समिति के नियमों का उल्लंघन कर चुनाव लड़ा था। उसने अभिलेखों में अपनी जन्मतिथि में हेरफेर कर चुनाव लड़ा था। आरोप है कि किशन शुक्ला ने चुनाव लड़ने के मकसद से दो कक्षाओं में प्रवेश के दौरान कक्षा 10 के अंकपत्र में दो अलग-अलग जन्म तिथियां प्रस्तुत किया था, जबकि रोल नंबर और प्राप्तांक समान थे। इसमें एक अंकपत्र रामेश्वरी शिवनंदन इंटर कॉलेज कूसा जौनपुर का लगाया था, जिसमें रोल नंबर 2917364 था और जन्मतिथि 11 दिसंबर 1991 अंकित थी, जबकि दूसरी मार्कशीट एसएलपीआई सीबीपुर करियांव, भदोही का लगाया था, जिसमें रोल नंबर भी वही था, विषयों के अंक भी वही थे, लेकिन जन्मतिथि 11 जून 1991 थी। इस संबंध में पुलिस को दिए बयान में जौनपुर के विद्यालय ने कहा कि उसके यहां से किशन शुक्ला नाम का व्यक्ति 10वीं कक्षा में पढ़ा ही नहीं था, जबकि केएनपीजी के प्राचार्य ललित मोहन जोशी ने जो बयान दिया है, उसमें जौनपुर के स्कूल के अंकपत्र से चुनाव लड़ने की बात कही गई है। दोनों पक्षों के तर्क और बहस सुनने के बाद न्यायाधीश मृदुल कुमार मिश्र ने आरोप की गंभीरता को देखते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष किशन शुक्ला की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी दिनेश सिंह, पंकज तिवारी, सुधाकर पांडेय, सत्येंद्र सिंह और स्वामीनाथ मिश्र ने की।
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पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अमन शुक्ला ने आरोप लगाया गया था कि किशन शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट से निर्देशित लिंगदोह समिति के नियमों का उल्लंघन कर चुनाव लड़ा था। उसने अभिलेखों में अपनी जन्मतिथि में हेरफेर कर चुनाव लड़ा था। आरोप है कि किशन शुक्ला ने चुनाव लड़ने के मकसद से दो कक्षाओं में प्रवेश के दौरान कक्षा 10 के अंकपत्र में दो अलग-अलग जन्म तिथियां प्रस्तुत किया था, जबकि रोल नंबर और प्राप्तांक समान थे। इसमें एक अंकपत्र रामेश्वरी शिवनंदन इंटर कॉलेज कूसा जौनपुर का लगाया था, जिसमें रोल नंबर 2917364 था और जन्मतिथि 11 दिसंबर 1991 अंकित थी, जबकि दूसरी मार्कशीट एसएलपीआई सीबीपुर करियांव, भदोही का लगाया था, जिसमें रोल नंबर भी वही था, विषयों के अंक भी वही थे, लेकिन जन्मतिथि 11 जून 1991 थी। इस संबंध में पुलिस को दिए बयान में जौनपुर के विद्यालय ने कहा कि उसके यहां से किशन शुक्ला नाम का व्यक्ति 10वीं कक्षा में पढ़ा ही नहीं था, जबकि केएनपीजी के प्राचार्य ललित मोहन जोशी ने जो बयान दिया है, उसमें जौनपुर के स्कूल के अंकपत्र से चुनाव लड़ने की बात कही गई है। दोनों पक्षों के तर्क और बहस सुनने के बाद न्यायाधीश मृदुल कुमार मिश्र ने आरोप की गंभीरता को देखते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष किशन शुक्ला की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी दिनेश सिंह, पंकज तिवारी, सुधाकर पांडेय, सत्येंद्र सिंह और स्वामीनाथ मिश्र ने की।
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