{"_id":"5ce19ea4bdec22071c2dfd0c","slug":"121558290084-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन से खिलवाड़, 50 लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन से खिलवाड़, 50 लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। जीवन देने वाली दवाओं में भी व्यापक स्तर पर धांधली की जा रही है। मोटी कमाई के चक्कर में मेडिकल स्टोर संचालक लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे। मिलती-जुलती कंपनी के नाम पर मरीजों को नकली दवाएं पकड़ा दे रहे। बिना फार्मासिस्ट के मेडिकल स्टोर संचालित करने के साथ ही मानक पूरा न करने पर औषधि विभाग की ओर से 50 लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की गई। माना जा रहा है कि ड्रग लाइसेंस ऍथारिटी मेडिकल संचालकों संग दवा बनाने वाली कंपनी पर भी शिकंजा कसेगी।
सरकार हर किसी को सस्ते उपचार के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। इसके अलावा महंगी दवाओं से राहत देने के लिए सस्ती दवा उपलब्ध करा रही है लेकिन चिकित्सक और ड्रग माफियाओं के तालमेल से आम लोगों को सुविधाएं नहीं पहुंच पाती। कमीशनखोरी के फैले मायाजाल में आम आदमी पिस कर रह जाता है। मानक पूरा न करने वाले मेडिकल स्टोर संचालक नकली दवाएं भी बेच कर आम लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। औषधि विभाग की जांच में जो खुलासा हुआ वह काफी चौंकाने वाला है। भदोही के तीन और ज्ञानपुर, गोपीगंज के एक-एक मेडिकल स्टोर पर नकली दवाएं बिकती पाई गई हैं। यही नहीं जिले में संचालित 700 मेडिकल स्टोर पर 100 से अधिक पर फार्मासिस्ट ही नहीं है। संचालक खुद ही दवाओं को बेचते खरीदते हैं। मानक पूरा न करने पर औषधि निरीक्षक ने 50 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस को निरस्त करने की संस्तुति की। ड्रग लाइसेंस अथारिटी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। सूत्रों की माने तो 50 फीसदी से अधिक मेडिकल स्टोर संचालक एक फार्मासिस्ट के अभिलेख की फोटाकॉपी लगा कर दुकान चलाते हैं। औषधि निरीक्षक एके बंसल ने कहा कि पांच मेडिकल स्टोर पर नकली दवाएं बिकती मिली। उनके खिलाफ मुकदमा लिखाने की अनुमति उच्चाधिकारियों से मिल गई है। 50 दुकानों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए संस्तुति की गई है। बिना फार्मासिस्ट के संचालित दुकानों को सीज किया जाएगा।
विज्ञापन
सरकार हर किसी को सस्ते उपचार के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। इसके अलावा महंगी दवाओं से राहत देने के लिए सस्ती दवा उपलब्ध करा रही है लेकिन चिकित्सक और ड्रग माफियाओं के तालमेल से आम लोगों को सुविधाएं नहीं पहुंच पाती। कमीशनखोरी के फैले मायाजाल में आम आदमी पिस कर रह जाता है। मानक पूरा न करने वाले मेडिकल स्टोर संचालक नकली दवाएं भी बेच कर आम लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। औषधि विभाग की जांच में जो खुलासा हुआ वह काफी चौंकाने वाला है। भदोही के तीन और ज्ञानपुर, गोपीगंज के एक-एक मेडिकल स्टोर पर नकली दवाएं बिकती पाई गई हैं। यही नहीं जिले में संचालित 700 मेडिकल स्टोर पर 100 से अधिक पर फार्मासिस्ट ही नहीं है। संचालक खुद ही दवाओं को बेचते खरीदते हैं। मानक पूरा न करने पर औषधि निरीक्षक ने 50 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस को निरस्त करने की संस्तुति की। ड्रग लाइसेंस अथारिटी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। सूत्रों की माने तो 50 फीसदी से अधिक मेडिकल स्टोर संचालक एक फार्मासिस्ट के अभिलेख की फोटाकॉपी लगा कर दुकान चलाते हैं। औषधि निरीक्षक एके बंसल ने कहा कि पांच मेडिकल स्टोर पर नकली दवाएं बिकती मिली। उनके खिलाफ मुकदमा लिखाने की अनुमति उच्चाधिकारियों से मिल गई है। 50 दुकानों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए संस्तुति की गई है। बिना फार्मासिस्ट के संचालित दुकानों को सीज किया जाएगा।
विज्ञापन