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ओडीएफ का सच!
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:24 AM IST
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सीतामढ़ी। 12 हजार रुपये की छोटी सी इमदाद देकर गांवों को खुले में शौच मुक्त करने की मुहिम छेड़ तो दी गई, लेकिन असलियत को खंगालकर गड़बड़ी को दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई गई। लिहाजा केंद्र सरकार का स्वच्छता मिशन जिले में लड़खड़ा गया है। इस धनराशि से शौचालय निर्माण संभव नहीं है, लेकिन आंख मूंदकर जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया और सरकारी धन की बंदरबांट की गई। अधिसंख्य शौचालय अपूर्ण हैं। रविवार को अमर उजाला ने डीघ ब्लॉक के गांवों में शौचालय निर्माण की हकीकत देखी। असलियत ऐसी कि माथा पकड़ लिया जाए।
डीघ विकास खंड की खेमापुर ग्रामसभा की आबादी लगभग डेढ़ हजार है। जबकि मतदाता नौ सौ के आसपास हैं। गांव में शौचालयों के निर्माण की स्थिति काफी खराब है। इस ग्राम पंचायत में दो सौ से अधिक शौचालयों के निर्माण के लिए 25 लाख के आसपास धन आया था, लेकिन तमाम शौचालय जहां अधूरे हैं, वहीं अधिकतर के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है। दलित बस्ती के लोगों का आरोप है कि उनके शौचालयों का निर्माण आधा-अधूरा करवाकर छोड़ दिया गया है। गांव के करौलेश्वर, छविनाथ, काके, राजगुरु, शिवमूरत आदि ने आरोप लगाया कि उनके शौचालय लंबे समय से अधूरे पड़े हैं। इसके कारण लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है। इसी तरह ग्रामसभा अरई में शौचालय तो बने हैं, लेकिन ग्रामसभा की पाल बस्ती के लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान बस्ती के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार करते हैं। लगभग 50 घरों की बस्ती में प्रधान ने एक भी सरकारी शौचालय नहीं बनवाया है, जिसके कारण बस्ती के लोगों को खुले में शौच जाना मजबूरी है। बस्ती के रामसिंगारे पाल के शौचालय का निर्माण प्रधान ने कराया, लेकिन वह अधूरा पड़ा है। बस्ती की तमाम महिलाओं लालती देवी, मालती, सुखराजी, धनराजी, ऊषा पाल, जयदेवी, रानी पाल, रेखा पाल, पूजा पाल, रेशमा पाल, सितावी, मंजू, सुम्मारी, शिवराज, रामप्रकाश, आशीष आदि ने शौचालय निर्माण की मांग की जिलाधिकारी से की है। यही हाल ब्लॉक क्षेत्र के अन्य तमाम गांवों में भी है।
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...तो सच्चाई कड़वी है
शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से लाभार्थियों को दी जाती है। मकसद यह है कि इस धनराशि की मदद से वे खुद का भी पैसा लगाकर शौचालय बनवा लें। लेकिन, ज्यादातर लाभार्थी यह बोझ भी झेलने की स्थिति में नहीं रहते। ऊपर से इस प्रोत्साहन राशि में भी कमीशनखोरी और चढ़ावे का घुन लग जाता है। हालत यह है कि कछ गांवों में शौचालय के नाम पर दो से ढाई फीट का गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। उसमें स्वच्छता मुहिम दफन होती जा रही है।
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शौचालय निर्माण की जांच कराई जा रही है। प्रोत्साहन राशि का सही उपयोग नहीं किया गया तो जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
हरिशंकर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
डीघ विकास खंड की खेमापुर ग्रामसभा की आबादी लगभग डेढ़ हजार है। जबकि मतदाता नौ सौ के आसपास हैं। गांव में शौचालयों के निर्माण की स्थिति काफी खराब है। इस ग्राम पंचायत में दो सौ से अधिक शौचालयों के निर्माण के लिए 25 लाख के आसपास धन आया था, लेकिन तमाम शौचालय जहां अधूरे हैं, वहीं अधिकतर के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है। दलित बस्ती के लोगों का आरोप है कि उनके शौचालयों का निर्माण आधा-अधूरा करवाकर छोड़ दिया गया है। गांव के करौलेश्वर, छविनाथ, काके, राजगुरु, शिवमूरत आदि ने आरोप लगाया कि उनके शौचालय लंबे समय से अधूरे पड़े हैं। इसके कारण लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है। इसी तरह ग्रामसभा अरई में शौचालय तो बने हैं, लेकिन ग्रामसभा की पाल बस्ती के लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान बस्ती के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार करते हैं। लगभग 50 घरों की बस्ती में प्रधान ने एक भी सरकारी शौचालय नहीं बनवाया है, जिसके कारण बस्ती के लोगों को खुले में शौच जाना मजबूरी है। बस्ती के रामसिंगारे पाल के शौचालय का निर्माण प्रधान ने कराया, लेकिन वह अधूरा पड़ा है। बस्ती की तमाम महिलाओं लालती देवी, मालती, सुखराजी, धनराजी, ऊषा पाल, जयदेवी, रानी पाल, रेखा पाल, पूजा पाल, रेशमा पाल, सितावी, मंजू, सुम्मारी, शिवराज, रामप्रकाश, आशीष आदि ने शौचालय निर्माण की मांग की जिलाधिकारी से की है। यही हाल ब्लॉक क्षेत्र के अन्य तमाम गांवों में भी है।
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...तो सच्चाई कड़वी है
शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से लाभार्थियों को दी जाती है। मकसद यह है कि इस धनराशि की मदद से वे खुद का भी पैसा लगाकर शौचालय बनवा लें। लेकिन, ज्यादातर लाभार्थी यह बोझ भी झेलने की स्थिति में नहीं रहते। ऊपर से इस प्रोत्साहन राशि में भी कमीशनखोरी और चढ़ावे का घुन लग जाता है। हालत यह है कि कछ गांवों में शौचालय के नाम पर दो से ढाई फीट का गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। उसमें स्वच्छता मुहिम दफन होती जा रही है।
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शौचालय निर्माण की जांच कराई जा रही है। प्रोत्साहन राशि का सही उपयोग नहीं किया गया तो जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
हरिशंकर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी