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संक्रांति का वैज्ञानिक पहलू समझाया

Tue, 15 Jan 2019 11:46 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jan 2019 11:46 PM IST
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संक्रांति का वैज्ञानिक पहलू समझाया

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ज्ञानपुर। केएनपीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने मकर संक्रांति को वैज्ञानिकता से पूर्ण त्योहार बताया। मंगलवार को उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति से ही दिन का समय बड़ा और रात की अवधि छोटी होने लगती है। इस प्रकार प्रकाश में वृद्धि और अंधकार में क्रमश: कमी होने लगती है। सूर्य के उत्तरायण होने और प्रकाश काल में वृद्धि होने से प्राणियों में चेतना और कार्यशक्ति में बढ़ोतरी होने लगती है। मकर संक्रांति से धरती के अच्छे दिन की शुरुआत हो जाती है और सूर्य के उत्तरायण होने से स्वास्थ्य और शांति में बढ़ोतरी होती है। मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया में वृद्धि होती है, जिसमें शरीर के विभिन्न रोगों को दूर करने की क्षमता होती है। तिल से निर्मित खाद्य पदार्थ और तेल आदि के उपयोग का भी खास वैज्ञानिक महत्व है। यहां तक कि इस दिन पतंग उड़ाने का भी वैज्ञानिक महत्व है। इससे कुछ देर तक धूप में रहने का मौका मिलता है, जिससे विटामिन डी की कमी पूरी होती है।
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