{"_id":"5ba29b66867a553da22ccd66","slug":"111537383270-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जोरईं को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, भदोही का बढ़ा मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जोरईं को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, भदोही का बढ़ा मान
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। स्वच्छता के क्षेत्र में नजीर बन चुके जोरईं के परिषदीय विद्यालय को मंगलवार को राष्ट्रीय पुरस्कार (स्वच्छ स्कूल पुरस्कार) से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर ने प्रधानपति रामधनी यादव और प्रधानाध्यापिका आरती गुप्ता ने पुरस्कार प्रदान किया। साथ ही ग्राम प्रधान के प्रयास को सराहा। वहीं, सम्मान मिलने की खबर से शिक्षकों, बच्चों संग अधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई।
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए प्रदेश सरकार से लेकर अधिकारी तक संजीदा हैं। पूर्व जिलाधिकारी विशाख जी की ओर से मॉडल स्कूल के लिए नामित जोरईं के पूर्व माध्यमिक विद्यालय ने दो साल के अंदर स्वच्छता की दिशा में अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि उसकी गूंज दिल्ली तक पहुंच गई। राष्ट्रीय पुरस्कार 2017-18 के लिए देशभर के 52 विद्यालयों को चयनित किया गया था, जिसमें सूबे में भदोही के जोरईं और चित्रकूट के एक विद्यालय को चयनित किया गया। चयन होने से पूर्व हकीकत देखने के लिए कई संस्थाएं स्कूल पर पहुंची। स्कूल के स्वच्छता को लेकर स्थानीय और विदेशी संस्थाएं भी काम कर रही हैं। 2017-18 में जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कुल 727 राजकीय एवं निजी विद्यालयों को राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार के लिए चिह्नित किया गया था। यूनीसेफ और राष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से हकीकत देखने के बाद देशभर से 52 स्कूल चयनित किए गए। मंगलवार को दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री ने चयनित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और ग्राम प्रधानों को पुरस्कार प्रदान किया। वहीं, पुरस्कार मिलने के बाद स्कूल के शिक्षकों और बच्चों में खुशी की लहर दौड़ गई। जोरईं स्कूल ने भदोही का मान बढ़ा दिया।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए प्रदेश सरकार से लेकर अधिकारी तक संजीदा हैं। पूर्व जिलाधिकारी विशाख जी की ओर से मॉडल स्कूल के लिए नामित जोरईं के पूर्व माध्यमिक विद्यालय ने दो साल के अंदर स्वच्छता की दिशा में अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि उसकी गूंज दिल्ली तक पहुंच गई। राष्ट्रीय पुरस्कार 2017-18 के लिए देशभर के 52 विद्यालयों को चयनित किया गया था, जिसमें सूबे में भदोही के जोरईं और चित्रकूट के एक विद्यालय को चयनित किया गया। चयन होने से पूर्व हकीकत देखने के लिए कई संस्थाएं स्कूल पर पहुंची। स्कूल के स्वच्छता को लेकर स्थानीय और विदेशी संस्थाएं भी काम कर रही हैं। 2017-18 में जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कुल 727 राजकीय एवं निजी विद्यालयों को राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार के लिए चिह्नित किया गया था। यूनीसेफ और राष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से हकीकत देखने के बाद देशभर से 52 स्कूल चयनित किए गए। मंगलवार को दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री ने चयनित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और ग्राम प्रधानों को पुरस्कार प्रदान किया। वहीं, पुरस्कार मिलने के बाद स्कूल के शिक्षकों और बच्चों में खुशी की लहर दौड़ गई। जोरईं स्कूल ने भदोही का मान बढ़ा दिया।
विज्ञापन