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स्टेशनों पर बेपटरी हुए पेयजल संसाधन,सूख रही यात्रियों की हलक
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ज्ञानपुर। नार्दन और पूर्वोत्तर रेलवे की साख बढ़ाने के लिए रेल विकास निगम की ओर से करोड़ों खर्च कर विद्युतीकरण एवं दोहरीकरण तो किया गया लेकिन यात्री सुविधाओं के नाम पर आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हो सकीं। एकाध स्टेशन को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश स्टेशनों पर पेयजल संकट गहरा गया है। समय रहते नहीं चेता गया तो मई-जून की गर्मी में यात्रियों की हलक सूखी ही रह जाएगी।
उत्तर रेलवे के जंघई वाया भदोही रूट पर पड़ने वाले मोढ़, सुरियावां, चौरी, परसीपुर, भदोही एवं पूर्वोत्तर रेलवे के जंगीगंज, ज्ञानपुररोड, अहिमनपुर, माधोसिंह, कटका और सरायजगदीश हाल्ट में भदोही को छोड़ दिया जाए तो अन्य स्टेशनों पर पानी का संकट है। दो दशक पूर्व स्थापित पेयजल संयंत्रों के जवाब देने से यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। दोनों रेल खंडों पर मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद, कानपुर, गोरखपुर, अयोध्या, फैजाबाद, प्रयागराज, फूूलपुर, बिहार, दानापुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, पटना, सिंकदराबाद जैसे प्रमुख नगरों-महानगरों को जोड़ने वालीं ट्रेनों का संचालन कराया जाता है। यह भी नहीं कि यात्रियों की संख्या में कमी हो। सीजन होने न होने के बाद भी यात्रा करने वालों से स्टेशन परिसर भरे रहते हैं। अन्य दिनों की अपेक्षा गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए किल्लत का सामना यात्रियों को करना पड़ता है। स्थिति उस समय जटिल हो जाती हैं जब ट्रेनों का एक-दूसरे से क्रासिंग होती है। दूरदराज क्षेत्रों से यात्रा कर रहे लोग प्यास से व्याकुल होकर एक साथ स्टेशनों पर पानी के लिए दौड़ पड़ते हैं लेकिन हैंडपंपो से पानी न आने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।
उत्तर रेलवे के जंघई वाया भदोही रूट पर पड़ने वाले मोढ़, सुरियावां, चौरी, परसीपुर, भदोही एवं पूर्वोत्तर रेलवे के जंगीगंज, ज्ञानपुररोड, अहिमनपुर, माधोसिंह, कटका और सरायजगदीश हाल्ट में भदोही को छोड़ दिया जाए तो अन्य स्टेशनों पर पानी का संकट है। दो दशक पूर्व स्थापित पेयजल संयंत्रों के जवाब देने से यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। दोनों रेल खंडों पर मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद, कानपुर, गोरखपुर, अयोध्या, फैजाबाद, प्रयागराज, फूूलपुर, बिहार, दानापुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, पटना, सिंकदराबाद जैसे प्रमुख नगरों-महानगरों को जोड़ने वालीं ट्रेनों का संचालन कराया जाता है। यह भी नहीं कि यात्रियों की संख्या में कमी हो। सीजन होने न होने के बाद भी यात्रा करने वालों से स्टेशन परिसर भरे रहते हैं। अन्य दिनों की अपेक्षा गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए किल्लत का सामना यात्रियों को करना पड़ता है। स्थिति उस समय जटिल हो जाती हैं जब ट्रेनों का एक-दूसरे से क्रासिंग होती है। दूरदराज क्षेत्रों से यात्रा कर रहे लोग प्यास से व्याकुल होकर एक साथ स्टेशनों पर पानी के लिए दौड़ पड़ते हैं लेकिन हैंडपंपो से पानी न आने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।
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