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दूसरे दिन मलबा हटाने की मची रही होड़
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ज्ञानपुर। सोमवार को दोपहर बाद जंगीगंज बाजार में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अतिक्रमण के नाम पर ढहवाए गए मकानों से निकले मलबे और सामान को दूसरे दिन लोग स्वयं हटाते नजर आए। उन्हें इस बात का भय सताता रहा कि दोबारा प्राधिकरण का बुलडोजर चला तो बचा सामान भी हाथ नहीं आएगा।
महीने भर पहले से बाजार क्षेत्र के दक्षिणी लेन पर सिक्सलेन निर्माण में अतिक्रमण के दायरे में आ रहे मकान और दुकान स्वामियों को नोटिस जारी होने के बाद भी अतिक्रमण हटाया नहीं जा रहा था। इंतजार की घड़ी समाप्त होते ही प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस प्रशासन के साथ प्राधिकरण ने एक दर्जन से अधिक कीमती मकानों को पलक झपकते ही बुलडोजर चलावाकर धराशायी करा दिया गया। इसको लेकर व्यापारियों में हाय-तौबा मची थी। रिहायशी और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के जमींदोज होने के बाद दूसरे ठिकाने की तलाश में मलबे से सही सलामत बचे सामानों को टटोल रहे पीड़ित दीनदयाल मोदनवाल, गुलाब मोदनवाल, हरविलास, पप्पू विश्वकर्मा, मो. इसराइल आदि ने कहा कि एक दिन की मोहलत मिल गई होती तो लाखों रुपये के नुकसान हुए सामानों को बचा लिया जाता किंतु प्राधिकरण ने मोहलत नहीं दी। अब कानून विशेषज्ञों के साथ मुआवजे की मांग को लेकर रणनीति तैयार हो चुकी है। किसी भी दिन मामला जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर नया मोड़ ले लेगा। जानकारों का मानना है कि यदि प्राधिकरण राजमार्ग किनारे रह रहे लोगों को बेघर बना रहा है तो उसके एवज में मुआवजा भी देना चाहिए। उधर प्राधिकरण किसी भी रूप में उन्हें मुआवजा न देने पर अड़ा हुआ है। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण एनएचएआई की जमीन पर किए गए थे।
महीने भर पहले से बाजार क्षेत्र के दक्षिणी लेन पर सिक्सलेन निर्माण में अतिक्रमण के दायरे में आ रहे मकान और दुकान स्वामियों को नोटिस जारी होने के बाद भी अतिक्रमण हटाया नहीं जा रहा था। इंतजार की घड़ी समाप्त होते ही प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस प्रशासन के साथ प्राधिकरण ने एक दर्जन से अधिक कीमती मकानों को पलक झपकते ही बुलडोजर चलावाकर धराशायी करा दिया गया। इसको लेकर व्यापारियों में हाय-तौबा मची थी। रिहायशी और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के जमींदोज होने के बाद दूसरे ठिकाने की तलाश में मलबे से सही सलामत बचे सामानों को टटोल रहे पीड़ित दीनदयाल मोदनवाल, गुलाब मोदनवाल, हरविलास, पप्पू विश्वकर्मा, मो. इसराइल आदि ने कहा कि एक दिन की मोहलत मिल गई होती तो लाखों रुपये के नुकसान हुए सामानों को बचा लिया जाता किंतु प्राधिकरण ने मोहलत नहीं दी। अब कानून विशेषज्ञों के साथ मुआवजे की मांग को लेकर रणनीति तैयार हो चुकी है। किसी भी दिन मामला जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर नया मोड़ ले लेगा। जानकारों का मानना है कि यदि प्राधिकरण राजमार्ग किनारे रह रहे लोगों को बेघर बना रहा है तो उसके एवज में मुआवजा भी देना चाहिए। उधर प्राधिकरण किसी भी रूप में उन्हें मुआवजा न देने पर अड़ा हुआ है। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण एनएचएआई की जमीन पर किए गए थे।
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