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कब्जे के विरोध में अनशन जारी
Updated Fri, 26 Oct 2018 11:13 PM IST
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कब्जे के विरोध में अनशन जारी
ट्रस्ट की बेचैनी बढ़ी, अनशन रोकने की जुगत तेज
अमर उजाला ब्यूरो
सीतामढ़ी। जिले की प्रमुख धार्मिक संस्था सीता समाहित स्थल ट्रस्ट पर ग्रामीणों की जमीनों और पुराने मंदिर पर जबरन कब्जे के विरोध में शुक्रवार को भी बनकट गांव निवासी राकेश तिवारी का अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। इससे ट्रस्ट के लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी है। बदनामी से बचने के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारी अनशन समाप्त कराने की कोशिशों में जुट गए हैं।
शुक्रवार को तहसीलदार ज्ञानपुर और थानाध्यक्ष कोइरौना ने अनशन स्थल पर पहुंचकर अनशन समाप्त कराने के लिए भरपूर प्रयास किए। उन्होंने राकेश को आश्वाशन दिया कि थाना दिवस तक समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन अनशनकारी राकेश तिवारी का कहना है कि वह न्याय मिलने तक अनशन नहीं तोउ़ेंगे। उधर ट्रस्ट के प्रबंधक कैलाश चंद्र ने कहा कि शुरुआती दौर में 16 में 13 लोगों ने अपनी भूमि की रजिस्ट्री कर दी थी। जिन तीन लोगों ने रजिस्ट्री नहीं की, उन्होंने मंदिर को दान देने की बात कही थी। इसके बाद डीडीसी ने रिफरेंस के जरिए उन्हें अन्यत्र जमीन देकर इस जमीन को ट्रस्ट के नाम कर दिया। बाद में राकेश तिवारी ने हाईकोर्ट में रिट की, जहां से यथास्थिति रखने का आदेश किया गया। तब से वही स्थिति चल रही है।
इनसेट
18 साल से हक की लड़ाई, न्याय की आस
सीतामढ़ी। 18 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे बनकट गांव निवासी राकेश तिवारी को मोदीराज में न्याय मिल पाएगा यह प्रश्न खड़ा हो गया है। भूमिधरी जमीन और पुराने सीता मंदिर के लिए न्याय नहीं मिलने से दुुखी राकेश बृहस्पतिवार से सीता समाहित स्थल प्रांगण में बेमियादी अनशन पर बैठे हैं। न्यायालय का आदेश और तमाम लोग राकेश तिवारी के पक्ष में हैं, वही प्रशासनिक अमला एक रसूखदार व्यक्ति और उनकी धार्मिक संस्था के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है। न्याय पाने के लिए जिस जमीन के लिए राकेश तिवारी अनशन कर रहे हैं, उसकी खतौनी पर गौर करें तो राकेश तिवारी के पक्ष में उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया है।
ट्रस्ट की बेचैनी बढ़ी, अनशन रोकने की जुगत तेज
अमर उजाला ब्यूरो
सीतामढ़ी। जिले की प्रमुख धार्मिक संस्था सीता समाहित स्थल ट्रस्ट पर ग्रामीणों की जमीनों और पुराने मंदिर पर जबरन कब्जे के विरोध में शुक्रवार को भी बनकट गांव निवासी राकेश तिवारी का अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। इससे ट्रस्ट के लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी है। बदनामी से बचने के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारी अनशन समाप्त कराने की कोशिशों में जुट गए हैं।
शुक्रवार को तहसीलदार ज्ञानपुर और थानाध्यक्ष कोइरौना ने अनशन स्थल पर पहुंचकर अनशन समाप्त कराने के लिए भरपूर प्रयास किए। उन्होंने राकेश को आश्वाशन दिया कि थाना दिवस तक समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन अनशनकारी राकेश तिवारी का कहना है कि वह न्याय मिलने तक अनशन नहीं तोउ़ेंगे। उधर ट्रस्ट के प्रबंधक कैलाश चंद्र ने कहा कि शुरुआती दौर में 16 में 13 लोगों ने अपनी भूमि की रजिस्ट्री कर दी थी। जिन तीन लोगों ने रजिस्ट्री नहीं की, उन्होंने मंदिर को दान देने की बात कही थी। इसके बाद डीडीसी ने रिफरेंस के जरिए उन्हें अन्यत्र जमीन देकर इस जमीन को ट्रस्ट के नाम कर दिया। बाद में राकेश तिवारी ने हाईकोर्ट में रिट की, जहां से यथास्थिति रखने का आदेश किया गया। तब से वही स्थिति चल रही है।
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18 साल से हक की लड़ाई, न्याय की आस
सीतामढ़ी। 18 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे बनकट गांव निवासी राकेश तिवारी को मोदीराज में न्याय मिल पाएगा यह प्रश्न खड़ा हो गया है। भूमिधरी जमीन और पुराने सीता मंदिर के लिए न्याय नहीं मिलने से दुुखी राकेश बृहस्पतिवार से सीता समाहित स्थल प्रांगण में बेमियादी अनशन पर बैठे हैं। न्यायालय का आदेश और तमाम लोग राकेश तिवारी के पक्ष में हैं, वही प्रशासनिक अमला एक रसूखदार व्यक्ति और उनकी धार्मिक संस्था के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है। न्याय पाने के लिए जिस जमीन के लिए राकेश तिवारी अनशन कर रहे हैं, उसकी खतौनी पर गौर करें तो राकेश तिवारी के पक्ष में उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया है।
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