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बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:48 AM IST
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ज्ञानपुर। बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन है। उनके जीवन चक्र को असंतुलित कर असामान्य बनाता है। कुप्रथा से बच्चों की प्रतिभा कुंठित होती है और विकास के अवसर सीमित हो जाते हैं। इस बुराई से लड़ने और इसके उन्मूलन के लिए समाज के हर वर्ग के लोगों को सामने आना चाहिए। उक्त बातें राष्ट्रीय बालिका दिवस एवं उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी विशाखजी ने डॉ. शंभूनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन एवं प्लान इंडिया की ओर से बाल विवाह कुप्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित बाल विवाह चेतना रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में कही। उन्होंने कहा कि बाल विवाह कुप्रथा से बचाकर बच्चों को एक बेहतर जीवन के लिए अवसर देना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस दौरान कार्यक्रम के संयोजक राजीव सिंह ने कहा कि इस चेतना अभियान से समाज में बाल विवाह कुप्रथा में कमी आएगी और भविष्य में इसके पूरी तरह उन्मूलन में मदद मिलेगी। कार्यक्रम की निदेशिका डॉ. रोली सिंह ने बाल विवाह के प्रति लोगों को सचेत करते हुए कहा कि इससे समाज में गरीबी और बीमारी को बढ़ावा मिलता है। कम उम्र में विवाह से जहां बालक और बालिकाओं को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना पड़ता है, वहीं उनकी होने वाली संतानों पर कुपोषण आदि का खतरा रहता है। कार्यक्रम में संस्थान के लोगों ने अपने हाथों में बाल विवाह है अभिशाप चलो मिटाएं हम और आप... और बाल विवाह अभी नहीं कभी नहीं आदि नारे लिखे तख्तियां और बैनर आदि से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। यात्रा का संयोजन महेंद्र शुक्ल और संचालन लालारक सिंह और अजय मिश्र ने किया। इस दौरान पूजा, डिम्पल, खुशबू, साक्षी, आरती, अन्नू दूबे, शर्मिला, रमेश, अरविंद, सत्यदेव आदि प्रमुख रूप से रहे।
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