{"_id":"63cedc8a285aa551237b2068","slug":"xray-room-closed-from-3-years-basti-news-c-7-1-34389-2023-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: विभागीय उपेक्षा से डिजिटल एक्स-रे सेंटर पर तीन साल से ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: विभागीय उपेक्षा से डिजिटल एक्स-रे सेंटर पर तीन साल से ताला
Tue, 24 Jan 2023 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 24 Jan 2023 12:44 AM IST
विज्ञापन
तकनीकी दिक्कत के चलते गरीबों को मिलने वाली निशुल्क सेवा ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित जिला चिकित्सालय में सब कुछ है, लेकिन, यहां डिजिटल एक्स-रे सेंटर करीब तीन साल से बंद है। लिहाजा, यहां चिकित्सक की सलाह मिलने के बाद मरीजों को निजी सेंटरों पर जांच करानी पड़ती है। इसके एवज में उनसे चार सौ रुपये वसूले जाते हैं। अस्पताल प्रशासन की उपेक्षा के चलते गरीबों को मिलने वाली निशुल्क सेवा पूरी तरह से बंद ठप है। वहीं, जिम्मेदार इसके लिए सिस्टम की खराबी बता रहे हैं।
जिला अस्पताल में करीब चार साल पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन संचालित की गई। हर दिन यहां करीब पचास मरीजों का एक्स-रे होता था। करीब एक साल तक यह मशीन बेहतर ढंग से संचालित होती रही। इसी बीच एकाध बार मशीन में तकनीकी दिक्कत आई तो तत्कालीन अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखा, जिस पर कंपनी से आए तकनीकी टीम ने उसे ठीक कर दिया। हालांकि, इसके खराब होने का क्रम लगातार जारी रहा मगर अस्पताल का तंत्र इसे लेकर केवल पत्र लिखने में व्यस्त रहा। एक वर्ष बाद सप्ताह में एक दिन मशीन में कोई न कोई दिक्कत आने लगी और करीब तीन वर्ष पहले यह पूरी तरह बंद हो गई।
इसके बाद डिजिटल एक्स-रे सिस्टम में खराबी बताकर इसके कमरे पर ताला लटका दिया गया। यहां के कर्मी सामान्य एक्स-रे के लिए वापस भेज दिए गए। तब से लेकर आज तक न तो इसकी किसी ने सुध ली और न ही यह मशीन फिर से संचालित हो सकी।
विज्ञापन
निजी सेंटरों पर चार सौ में डिजिटल एक्स-रे
निजी सेंटर के संचालकों ने बताया कि सामान्य एक्स-रे का दो से ढाई सौ तो डिजिटल एक्स-रे के लिए चार से साढ़े चार सौ रुपये मरीज से लिए जाते हैं। एक से अधिक शरीर के हिस्सों के लिए डिजिटल में अलग-अलग रुपये लिए जाते हैं।
शासन को लिखा गया है पत्र पोर्टेबुल मशीन से भर्ती मरीजों का डिजीटल एक्सरे किया जा रहा है, मगर ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए यह सुविधा नहीं है। क्योंकि अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब है। इसके सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आ गई है। इसको ठीक कराने के लिए कई पत्र लिखे गए।
डॉ. आलोक वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित जिला चिकित्सालय में सब कुछ है, लेकिन, यहां डिजिटल एक्स-रे सेंटर करीब तीन साल से बंद है। लिहाजा, यहां चिकित्सक की सलाह मिलने के बाद मरीजों को निजी सेंटरों पर जांच करानी पड़ती है। इसके एवज में उनसे चार सौ रुपये वसूले जाते हैं। अस्पताल प्रशासन की उपेक्षा के चलते गरीबों को मिलने वाली निशुल्क सेवा पूरी तरह से बंद ठप है। वहीं, जिम्मेदार इसके लिए सिस्टम की खराबी बता रहे हैं।
जिला अस्पताल में करीब चार साल पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन संचालित की गई। हर दिन यहां करीब पचास मरीजों का एक्स-रे होता था। करीब एक साल तक यह मशीन बेहतर ढंग से संचालित होती रही। इसी बीच एकाध बार मशीन में तकनीकी दिक्कत आई तो तत्कालीन अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखा, जिस पर कंपनी से आए तकनीकी टीम ने उसे ठीक कर दिया। हालांकि, इसके खराब होने का क्रम लगातार जारी रहा मगर अस्पताल का तंत्र इसे लेकर केवल पत्र लिखने में व्यस्त रहा। एक वर्ष बाद सप्ताह में एक दिन मशीन में कोई न कोई दिक्कत आने लगी और करीब तीन वर्ष पहले यह पूरी तरह बंद हो गई।
विज्ञापन
इसके बाद डिजिटल एक्स-रे सिस्टम में खराबी बताकर इसके कमरे पर ताला लटका दिया गया। यहां के कर्मी सामान्य एक्स-रे के लिए वापस भेज दिए गए। तब से लेकर आज तक न तो इसकी किसी ने सुध ली और न ही यह मशीन फिर से संचालित हो सकी।
विज्ञापन
निजी सेंटरों पर चार सौ में डिजिटल एक्स-रे
निजी सेंटर के संचालकों ने बताया कि सामान्य एक्स-रे का दो से ढाई सौ तो डिजिटल एक्स-रे के लिए चार से साढ़े चार सौ रुपये मरीज से लिए जाते हैं। एक से अधिक शरीर के हिस्सों के लिए डिजिटल में अलग-अलग रुपये लिए जाते हैं।
शासन को लिखा गया है पत्र पोर्टेबुल मशीन से भर्ती मरीजों का डिजीटल एक्सरे किया जा रहा है, मगर ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए यह सुविधा नहीं है। क्योंकि अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब है। इसके सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आ गई है। इसको ठीक कराने के लिए कई पत्र लिखे गए।
डॉ. आलोक वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक