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शहर में साथ लाएं या खरीद कर पीएं पानी

Tue, 03 May 2022 12:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2022 12:09 AM IST
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Wter points Damaged in city
शहर में साथ लाएं या खरीद कर पीएं पानी
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बस्ती। शरीर को झुलसाने वाली गर्मी में हर 10 मिनट पर हलक सूख रहा है। ऐसे में अगर किसी काम से शहर आ रहे हैं तो पानी साथ लेकर आना होगा। नहीं तो, शहर में इधर-उधर जाने में लगने वाले किराए से कहीं अधिक बोतलबंद पानी में खर्च कर देना होगा। वजह है कि शहर में लगे वाटर कूलर पोस्ट खराब पड़े हैं और इंडिया मार्का हैंडपंप तो खोजने से नहीं मिलेगा।
मंडल मुख्यालय में वर्ष 2000 में तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष स्नेहलता पाल ने 12 स्थानों पर वाटर कूलर पोस्ट लगवाया था। इसमें नेहरू तिराहा, कलेक्ट्रेट, शास्त्री चौक, कांग्रेस कार्यालय, एसबीआई प्रधान शाखा के सामने, जीजीआईसी, बेगम खैर, महिला कॉलेज, किसान पीजी कॉलेज, रौता चौराहा, रामेश्वरपुरी व पांडेय बाजार आदि स्थान शामिल थे। यह वह क्षेत्र हैं जहां बैंक, अन्य सरकारी कार्यालय हैं या फिर व्यावसायिक गतिविधि की वजह लोगों का सबसे अधिक आवागमन होता है। लेकिन, देखरेख के अभाव में इन स्थानों पर लगे वाटर कूलर खराब होते गए। अब तो हाल यह है कि कुछ एक जगहों को छोड़ दें तो अधिकांश वाटर कूलर ही गायब हो गए हैं। जबकि, उस समय एक लाख रुपये प्रति वाटर कूलर खर्च किया गया था। इसमें लोहे के दरवाजे वाला कमरा, मशीन के अलावा स्टेब्लाइजर लगा था, जो अब ढूंढने से भी नहीं मिलते हैं।
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ऐसे में शहर आने वाले लोगों को शीतल पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है अथवा दुकानों पर बिकने वाले 20 रुपये बोतल पानी खरीदना मजबूरी है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अखिलेश त्रिपाठी का कहना है कि शहर में जल्द ही प्याऊ की व्यवस्था कराई जाएगी। नए वाटर कूलर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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कचहरी में काम के सिलसिले में अक्सर बस्ती आना होता है। पीने का पानी साथ लेकर आते हैं, लेकिन कभी भूल गए तो रोडवेज पर उतरने के बाद पानी की बोतल खरीदनी ही पड़ती है। या फिर किसी चाय की दुकान में जाकर रुपये खर्च करने पड़ते हैं। शीतल पेयजल की व्यवस्था होती तो यह पैसे बच जाते।
सुधीर दुबे, अरईल दीगर पट्टी, मुंडेरवा
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निजी काम के सिलसिले में अभी दो दिन पहले बाइक से बस्ती शहर आए थे। रोडवेज पहुंचे तो प्यास लगी थी। पहले सोचा कि कहीं इंडिया मार्का हैंडपंप मिल जाए तो पानी पी लेंगे। लेकिन, नहीं मिला। इधर-उधर थोड़ी देर भटकने पर जब रहा नहीं गया तो एक दुकान से पानी की बोतल खरीदी, तब जाकर प्यास बुझी।
मृत्युंजय राय, निवासी ग्राम पड़री
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व्यापार के सिलसिले में हर दिन बस्ती आना-जाना होता है। रोडवेज, गांधीनगर, पांडेय बाजार में कहीं भी ऐसी जगह नहीं मिलती, जहां शुद्ध और शीतल जल पीने को मिल जाए। ऐसे में बोतलबंद पानी खरीदना ही एकमात्र विकल्प बचता है। इसमें हर दिन बीस से चालीस रुपये तो खर्च हो ही जाते हैं।

वैभव गुप्ता, निवासी भानपुर कस्बा
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कारोबार के लिए हर दिन क्षेत्र में निकलना पड़ता है। साथ पीने का पानी लेकर गए तो ठीक है। कभी-कभार भूल जाने पर बोतलबंद पानी खरीदना ही पड़ता है। इस गर्मी में शहर में तो शीतल पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए। क्योंकि हर कोई पानी खरीद कर नहीं पी सकता है। प्रशासन इस पर ध्यान दे।
राहुल गुप्ता, निवासी देईसांड़ कस्बा
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