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Basti News: दफ्तर-दफ्तर चक्कर काटने के बाद नहीं मिला महिला को आवास
Sun, 21 May 2023 01:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 21 May 2023 01:47 AM IST
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बस्ती। सरकारी योजनाओं को पलीता उसके खेवनहार ही लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना भी इसी का शिकार है। जनपद के सदर विकास खंड क्षेत्र के बरसांव गांव की महिला निर्मला आवास के लिए तीन साल से दफ्तर-दफ्तर चक्कर लगा रही है। हर बार उन्हें कोई न कोई बहाना बनाकर जिम्मेदार लौटा देते हैं। निर्मला ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल से लगायत अन्य उच्चाधिकारियों तक लिखा-पढ़ी शुरू की, फिर भी अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। निर्मला के इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों के स्तर से जारी पत्रक का जवाब तैयार करने तक पूरी कार्रवाई सिमट कर रह गई। नतीजा वह खुले आसमान तले अभी भी बच्चों के साथ रहने को विवश है।
निर्मला के पति राधेश्याम मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते है। उनके पास तीन बेटियां हैं। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर निर्मला के पास रहने को घर नहीं है। प ुराना मिट्टी का मकान जीर्ण-शीर्ण अवस्था में तब्दील हो गया है। ऊपर छत नहीं है। खुले आसमान तले पूरे परिवार का रहना, खाना, सोना सब होता है। आवास, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं इनके चौखट पर अभी तक नहीं पहुंची है। सरकारी आवास की ख्वाहिश लिए निर्मला ने घर की दहलीज से बाहर आकर सक्षम अधिकारियों के चौखट पर कदम रखा। पहले दो साल तक बीडीओ, सीडीओ के कार्यालय पर पहुंचकर मौखिक गुहार लगाती रही। सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर गुहार लगाना शुरू की। लेकिन यह भी उसके लिए बेमतलब साबित हुई। जनवरी 23 में जिलाधिकारी ने पोर्टल पर निर्मला को आवास न मिलने की शिकायत पर बीडीओ सदर से जवाब तलब किया। जिसके जवाब में यह लिख भी गया कि निर्मला आवास के लिए पात्र है। नई सूची में उनका नाम भी अंकित बताया गया। आश्वासन मिला कि साइट खुलने पर उनका चयन हो जाएगा। इसके बाद जिम्मेदार भूल गए। पांच माह बीतने को है फिर भी निर्मला आवास योजना के लाभ से वंचित है।
बहुत परेशान हुए नहीं मिला आवास
निर्मला कहती है कि मुख्यमंत्री आवास योजना में लाभार्थी बनने के लिए दौड़ते-दौड़ते थक गए। अधिकारियों ने नहीं सुना। हर बार आश्वासन मिलता है। हमारे पास खुद का बजट भी नहीं है। पति किसी तरह मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। धूप, गर्मी, सर्दी हर मौसम में हम बच्चों के साथ बिना छत के जीर्ण-शीर्ण घर में रहने को विवश है। बारिश में तो हम लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। खाना बनाने से लेकर सोने तक की दिक्कत रहती है। ब्लाक, तहसील दिवस और सीडीओ कार्यालय में कई बार जाकर अपनी आपबीती सुना डाली। मगर कोई भी उनकी मदद को आगे नहीं आया।
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प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि महिला वास्तविक पात्र है तो उसे लाभार्थी बनाया जाएगा। हम प्रकरण को दिखवाते हैं। मामला सही पाए जाने पर संबंधित को योजना का लाभ दिलवाया जाएगा।
राजेश कुमार प्रजापति, सीडीओ, बस्ती।
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निर्मला के पति राधेश्याम मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते है। उनके पास तीन बेटियां हैं। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर निर्मला के पास रहने को घर नहीं है। प ुराना मिट्टी का मकान जीर्ण-शीर्ण अवस्था में तब्दील हो गया है। ऊपर छत नहीं है। खुले आसमान तले पूरे परिवार का रहना, खाना, सोना सब होता है। आवास, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं इनके चौखट पर अभी तक नहीं पहुंची है। सरकारी आवास की ख्वाहिश लिए निर्मला ने घर की दहलीज से बाहर आकर सक्षम अधिकारियों के चौखट पर कदम रखा। पहले दो साल तक बीडीओ, सीडीओ के कार्यालय पर पहुंचकर मौखिक गुहार लगाती रही। सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर गुहार लगाना शुरू की। लेकिन यह भी उसके लिए बेमतलब साबित हुई। जनवरी 23 में जिलाधिकारी ने पोर्टल पर निर्मला को आवास न मिलने की शिकायत पर बीडीओ सदर से जवाब तलब किया। जिसके जवाब में यह लिख भी गया कि निर्मला आवास के लिए पात्र है। नई सूची में उनका नाम भी अंकित बताया गया। आश्वासन मिला कि साइट खुलने पर उनका चयन हो जाएगा। इसके बाद जिम्मेदार भूल गए। पांच माह बीतने को है फिर भी निर्मला आवास योजना के लाभ से वंचित है।
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बहुत परेशान हुए नहीं मिला आवास
निर्मला कहती है कि मुख्यमंत्री आवास योजना में लाभार्थी बनने के लिए दौड़ते-दौड़ते थक गए। अधिकारियों ने नहीं सुना। हर बार आश्वासन मिलता है। हमारे पास खुद का बजट भी नहीं है। पति किसी तरह मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। धूप, गर्मी, सर्दी हर मौसम में हम बच्चों के साथ बिना छत के जीर्ण-शीर्ण घर में रहने को विवश है। बारिश में तो हम लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। खाना बनाने से लेकर सोने तक की दिक्कत रहती है। ब्लाक, तहसील दिवस और सीडीओ कार्यालय में कई बार जाकर अपनी आपबीती सुना डाली। मगर कोई भी उनकी मदद को आगे नहीं आया।
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प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि महिला वास्तविक पात्र है तो उसे लाभार्थी बनाया जाएगा। हम प्रकरण को दिखवाते हैं। मामला सही पाए जाने पर संबंधित को योजना का लाभ दिलवाया जाएगा।
राजेश कुमार प्रजापति, सीडीओ, बस्ती।