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Basti News: कौन करे अब लेखा-जोखा, जीवन में क्या खोया-पाया
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- पुण्य तिथि पर याद किए गए जन कवि बालसोम गौतम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ‘ये शाम और ये फूलों का मुरझाना देख उदासी क्यों, जब तय है होगी सुबह, खिलेंगे फूल हजारों नए-नए’ जैसी रचनाओं से समाज को संदेश देने वाले जन कवि बालसोम गौतम को बुधवार को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया गया। बालसोम गौतम स्मृति संस्थान की ओर से बुधवार को प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में कवि, शायरों ने बालसोम गौतम के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि बालसोम गौतम की रचना संसार विविधता लिए हुए है। वे अपने समय के सशक्त हस्ताक्षर थे, उनकी कविताएं हमें संकट में साहस देती हैं। बालसोम गौतम के शिष्य डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि बालसोम गौतम को याद करना इतिहास के कई बिंदुओं को खंगालने जैसा है। वे स्वयं में अप्रतिम कवि थे। उनकी कविता ‘ हर पल गीत प्रेम के गाया, नहीं किसी का हृदय दुःखाया, कौन करे अब लेखा जोखा, जीवन में क्या खोया पाया’ को श्रोताओं ने सराहा। डॉ. जगमग ने बाल सोम जी की कविताओं को सुनाते हुए कई प्रसंगोें की चर्चा की।
इस मौके पर राम नरेश सिंह मंजुल, विनोद कुमार उपाध्याय ‘हर्षित’, हरीश दरवेश, सुरेश सिंह गौतम, श्याम प्रकाश शर्मा, रामदत्त जोशी, डाॅ. अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, डाॅ. सतीश चंद्र, रहमान अली ‘रहमान’ के साथ ही अनेक कवि, साहित्यकार उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ‘ये शाम और ये फूलों का मुरझाना देख उदासी क्यों, जब तय है होगी सुबह, खिलेंगे फूल हजारों नए-नए’ जैसी रचनाओं से समाज को संदेश देने वाले जन कवि बालसोम गौतम को बुधवार को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया गया। बालसोम गौतम स्मृति संस्थान की ओर से बुधवार को प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में कवि, शायरों ने बालसोम गौतम के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि बालसोम गौतम की रचना संसार विविधता लिए हुए है। वे अपने समय के सशक्त हस्ताक्षर थे, उनकी कविताएं हमें संकट में साहस देती हैं। बालसोम गौतम के शिष्य डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि बालसोम गौतम को याद करना इतिहास के कई बिंदुओं को खंगालने जैसा है। वे स्वयं में अप्रतिम कवि थे। उनकी कविता ‘ हर पल गीत प्रेम के गाया, नहीं किसी का हृदय दुःखाया, कौन करे अब लेखा जोखा, जीवन में क्या खोया पाया’ को श्रोताओं ने सराहा। डॉ. जगमग ने बाल सोम जी की कविताओं को सुनाते हुए कई प्रसंगोें की चर्चा की।
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इस मौके पर राम नरेश सिंह मंजुल, विनोद कुमार उपाध्याय ‘हर्षित’, हरीश दरवेश, सुरेश सिंह गौतम, श्याम प्रकाश शर्मा, रामदत्त जोशी, डाॅ. अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, डाॅ. सतीश चंद्र, रहमान अली ‘रहमान’ के साथ ही अनेक कवि, साहित्यकार उपस्थित रहे।
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