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Basti News: कहां रहेंगे एमबीबीएस के नए छात्र, कम पड़ रहे छात्रावास

Sun, 01 Sep 2024 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 01 Sep 2024 12:57 AM IST
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Where will new MBBS students stay, hostels are falling short
मेडिकल कॉलेज : महज 350 छात्रों के लिए ही बनाया गया था हॉस्टल, अब बढ़ गई संख्या
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फैकेल्टी आवास भी नहीं, प्रोफेसरों को भी होगी रहने में परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों के लिए छात्रावास कम पड़ रहा है। इस सत्र में यह समस्या और गहराएगी। क्योंकि नए सत्र का प्रवेश शुरू हो चुका है। एक माह में उपलब्ध सीट के मुताबिक, यहां 100 की संख्या में नए छात्र और आ जाएंगे। जबकि मेडिकल कॉलेज के निर्माण के समय 70 प्रतिशत 350 छात्रों के रहने के लिए छात्रावास बनवाए गए थे। पांचवें साल में मेडिकल छात्रों की संख्या 600 के करीब पहुंचने वाली है। गैर जनपद एवं अन्य प्रांतों से यहां प्रवेश लेने वाले करीब 150 एमबीबीएस छात्रों को हॉस्टल सुविधा मिलने में कठिनाई हो रही है।
दरअसल, मेडिकल कॉलेज के निर्माण के समय नेशलन मेडिकल काउंसिल के मानक के अनुरूप हॉस्टल का निर्माण कराया गया। इसमें 75 प्रतिशत छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा अनिवार्य होती है। तभी एनएमसी से मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिलती है। एमबीबीएस की 100 सीट वाले इस मेडिकल कॉलेज की स्थापना के समय 350 छात्रों के लिए छात्रावास भवन तैयार किए गए। इसमें एक गर्ल्स एवं और एक ब्वॉयज मिलाकर दो हॉस्टल की बिल्डिंग तैयार की गई। प्रत्येक कमरे में एक साथ दो छात्रों के रहने की व्यवस्था है।
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इसके अलावा एमबीबीएस की चार वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल इंटर्नशिप करने वाले 100 डॉक्टरों के लिए दो अलग-अलग हॉस्टल भी बनाए गए हैं। इसमें 50 लोगों के रहने की क्षमता का एक गर्ल्स और एक ब्वॉयज हॉस्टल शामिल हैं। वर्तमान में इस मेडिकल कॉलेज का पांचवां साल है। यहां 100 इंटर्न और 400 अध्ययनरत चिकित्सकों की संख्या हो चुकी है। इधर, नए सत्र में 100 छात्रों का प्रवेश फिर से शुरू कर दिया गया है। प्रवेश के बाद इस सत्र में यहां मेडिकल छात्रों की कुल संख्या 600 हो जाएगी। जबकि हॉस्टल सुविधा महज 450 छात्रों के लिए ही उपलब्ध है।
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150 अतिरिक्त छात्रों को रहने की सुविधा देने में कॉलेज प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। सरकारी कॉलेज होने की वजह से यहां ऑल इंडिया और यूपी नीट से आवंटित छात्र ही प्रवेश पाते हैं। ऐसे में गैर जनपद एवं अन्य प्रांतों से आने वाले शत-प्रतिशत छात्रों को कैंपस हॉस्टल की आवश्यकता होती है। नामांकन की शर्तों में यह भी निहित है। अब कॉलेज प्रशासन छात्रों की संख्या बढ़ जाने से सभी को हॉस्टल सुविधा मुहैया कराने को लेकर सांसत में पड़ गया है।
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पुराने छात्रों को आवासीय भवन में शिफ्ट करने की योजना
कॉलेज प्रशासन की तरफ से विकल्प के रूप में नई व्यवस्था बनाई जा रही है। कॉलेज कैंपस में बनाए गए टू-टाइप, थ्री-टाइप आवासीय भवन को खाली कराकर मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है। योजना है कि इसमें एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के लगभग 50 छात्रों को शिफ्ट किया जाएगा। इससे 500 छात्रों के रहने की व्यवस्था बन जाएगी।
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इंटर्न हॉस्टल भी कराएंगे खाली, नए छात्रों को होगा आवंटित
रैगिंग की वजह से प्रथम वर्ष के छात्रों को शैपरेट हॉस्टल देने की व्यवस्था है। इसलिए 50 महिला और 50 पुरुष इंटर्न डॉक्टरों का हॉस्टल इस बार खाली करा दिया जाएगा। इसमें प्रथम सत्र के छात्रों को शिफ्ट करने की योजना है। ताकि उन्हें सीनियर छात्रों के रैगिंग से बचाया जा सकें। इंटर्न डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था रामपुर मेडिकल कॉलेज से हटकर ओपेक चिकित्सालय कैली के आवासीय भवन में की जा रही है। यहां के दो पुराने आवासीय भवन खाली कराकर इंटर्न डॉक्टरों के रहने योग्य बनाए जा रहे हैं। महिला एवं पुरुष इंटर्न डॉक्टरों को अलग-अलग आवासीय भवन में छात्रावास की सुविधा दी जाएगी।
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फैकेल्टी आवास भी पर्याप्त नहीं
कॉलेज कैंपस में फैकेल्टी आवास भी पर्याप्त नहीं हैं। इस बार पीजी (परास्नातक) स्तर पर पैथोलॉजी विषय को भी मान्यता मिल गई है। अब एमडी पैथोलॉजी में तीन सीट बढ़ गई है। जबकि एमडी की 11 सीट पहले से आवंटित है। इस तरह एमडी की अब 14 सीट हो गई है। ऐसे में प्रोफेसरों की संख्या बढ़नी स्वाभाविक है। फैकेल्टी आवास पर्याप्त न होने की वजह से यहां तैनात प्रोफेसरों को भी आवासीय सुविधा मिलने में कठिनाई होगी।
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एमबीबीएस में 600 की संख्या वाले छात्रावास की जरूरत
एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में कुल पांच साल लग जाते हैं। इसमें चार वर्ष विषयगत पढ़ाई होती है। इसके बाद एक साल इंटर्नशिप कराया जाता है। इस तरह एक बैच को निकलने में पांच साल लग जाते हैं। तब तक नए छात्रों की संख्या बढ़ जाती है। इस तरह 100 सीट वाले मेडिकल कॉलेज में केवल एमबीबीएस छात्रों के लिए ही 600 लोगों के रहने की क्षमता का हॉस्टल होना चाहिए।

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कोट
संख्या के मुताबिक इस बार छात्रावास कम पड़ रहा है। कॉलेज प्रशासन की ओर से विकल्प तैयार कर लिया गया है। कॉलेज कैंपस और ओपेक चिकित्सालय कैली परिसर में स्थित टाइप-टू और टाइप-थ्री आवासीय भवन में कुछ सीनियर छात्र और इंटर्न डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था बनाई जा रही है।
-डॉ. मनोज कुमार, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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- इस सत्र मेंं एमबीबीएस छात्रों की संख्या- 500
- इंटर्न डॉक्टरों की संख्या- 100
- एमडी अध्ययनरत डॉक्टरों की संख्या- 14
- कुल अध्ययनरत डॉक्टर- 614
- छात्रावास क्षमता- 450
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