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Basti News: मोबाइल चलाने पर डांट पड़ी तो लखनऊ चले गए भाई-बहन

Sat, 29 Jun 2024 02:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 29 Jun 2024 02:12 AM IST
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When scolded for using mobile, brother and sister went to Lucknow
हर्रैया क्षेत्र के महादेवरी गांव से बृहस्पतिवार को लापता हुए थे दोनों
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प्राइवेट बस से खुद ही लौटकर हर्रैया पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हर्रैया थाना क्षेत्र के महादेवरी गांव से लापता हुए भाई-बहन नाराज होकर लखनऊ चले गए थे। वहां किसी ने उनकी परिस्थिति समझते हुए पुलिस को फोन कर जानकारी दी। दोनों को बस पर बैठा दिया। हर्रैया पहुंचते ही पुलिस ने भाई-बहन को बस से उतार लिया और समझा-बुझाकर पिता को सौंप दिया। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि मोबाइल फोन अक्सर घर पर डांट पड़ती थी, इसलिए घर से चले गए थे।

महादेवरी गांव का एक शख्स चाट की दुकान चलाकर परिवार का गुजारा करता है। परिजनों के मुताबिक, बृहस्पतिवार शाम तीन बजे बेटी रागिनी (16) और बेटा बिक्कू (14) घर से दूसरे वाले मकान पर जाने की बात कहकर निकले थे। जब परिजन उस घर पर पहुंचे तो वहां पर ताला बंद मिला। परिजन दोनों की खोजबीन करने लगे तो कहीं पता नहीं चला। देर शाम परिजनों ने घटना की सूचना हरैया थाने पर दी।
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पुलिस मामले में गुमशुदगी दर्ज कर दोनों बच्चों की खोजबीन शुरू कर दी । परिजनों ने पुलिस को बताया कि पिछले 6 महीने से एक युवक फोन करता था और दोनों बच्चों से बात करता था। परिजन इसे फोन करने वाले युवक से भी जोड़ रहे थे। मगर, दोनों के लौटकर आने के बाद पता चला कि उन्हें किसी ने बहकाया नहीं था, बल्कि खुद ही नाराज होकर घर छोड़कर भागे थे। सीओ हरैया अशोक कुमार मिश्र ने बताया कि बच्चों को ढूंढने के लिए कई टीमें लगाई गई थीं। मगर शुक्रवार को दोपहर में दोनों बच्चे प्राइवेट बस से खुद ही आ गए। मामले में कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं है।
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सजा और इनाम दोनों जरूरी
समाजशास्त्री डॉ.. रघुवर पांडेय ने बताया कि आजकल बच्चे माता-पिता की ज्यादा रोक-टोक बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। इसलिए बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्हें सजा और इनाम दोनों की बराबर अहमियत देनी चाहिए। यह तरकीब काफी कारगर है। घरेलू स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और गलत बर्ताव के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा का तात्पर्य शारीरिक तकलीफ नहीं, बल्कि उनको मिलने वाली छूट व सुविधा में कटौती है।


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बच्चों का घर छोड़ना चिंता का विषय
आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। सबसे जरूरी है संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। बच्चे से परस्पर संवाद बनाए रखने से इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
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