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Basti News: फरवरी में अप्रैल जैसा मौसम... गेहूं की फसल पर संकट
Mon, 03 Feb 2025 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 03 Feb 2025 12:11 AM IST
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कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया में लहलहाती फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शीतलहर का दौर खत्म होते ही सूरज के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। इससे गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। गेहूं और जौ की फसल के लिए अधिकतम 23 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।
पिछले तीन दिन से तापमान अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। मौसम में तेजी से हुए बदलाव से किसानों को गेहूं की पैदावार कम होने की चिंता सताने लगी है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 120 से 135 दिन में पकने वाली गेहूं की प्रजातियों में 20 से 30 फीसदी तक पैदावार घट सकती है। जिले में रबी सीजन में 1.71 लाख हेक्टेयर में फसलों की बोवाई की गई है। इनमें से 1.41 लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल बोई गई है।
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किसान नागेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने इस माह में पिछले कई सालों में इतना गर्म मौसम नहीं देखा है। दिन का तापमान अधिकतम 25 से 27 डिग्री तक पहुंच रहा है, जो गेहूं की फसल के लिए अनुकूल नहीं है। मौसम के तेवर को देखते हुए किसान के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. एसएन सिंह के मुताबिक, पछुआ हवा और तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। बदले मौसम के चलते गेहूं की बालियों में दाने छोटे रह जाएंगे।
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बस्ती। शीतलहर का दौर खत्म होते ही सूरज के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। इससे गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। गेहूं और जौ की फसल के लिए अधिकतम 23 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।
पिछले तीन दिन से तापमान अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। मौसम में तेजी से हुए बदलाव से किसानों को गेहूं की पैदावार कम होने की चिंता सताने लगी है।
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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 120 से 135 दिन में पकने वाली गेहूं की प्रजातियों में 20 से 30 फीसदी तक पैदावार घट सकती है। जिले में रबी सीजन में 1.71 लाख हेक्टेयर में फसलों की बोवाई की गई है। इनमें से 1.41 लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल बोई गई है।
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किसान नागेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने इस माह में पिछले कई सालों में इतना गर्म मौसम नहीं देखा है। दिन का तापमान अधिकतम 25 से 27 डिग्री तक पहुंच रहा है, जो गेहूं की फसल के लिए अनुकूल नहीं है। मौसम के तेवर को देखते हुए किसान के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. एसएन सिंह के मुताबिक, पछुआ हवा और तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। बदले मौसम के चलते गेहूं की बालियों में दाने छोटे रह जाएंगे।