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Basti News: विषम परिस्थितियों में विदिशा व प्रियदर्शनी ने हासिल की सफलता

Sat, 13 May 2023 01:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 13 May 2023 01:42 AM IST
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Vidisha and Priyadarshini achieved success in difficulties
प्रियदर्शनी
बस्ती। सीबीएससी के 10 वीं व 12वीं का परीक्षा परिणाम शुक्रवार को आ गया। इस परीक्षा में जहां विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने सफलता की बुलंदी छू कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन्हीं बच्चों में शामिल विदिशा ने 12वीं में 94 प्रतिशत और प्रियदर्शनी ने 10वीं में 65 प्रतिशत अंक हासिल किए। यह केवल अंक नहीं, बल्कि इन छात्राओं की मां के अरमान हैं। पिता की मौत से टूटी इन दोनों छात्राओं की शिक्षा संघर्ष के बीच पूरी हो रही है। विदिशा व प्रियदर्शनी की तमन्ना है कि वे डॉक्टर बनें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों तैयारी में जुटी हैं।
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12वीं में टॉपर बनकर अपनी मेधा का प्रदर्शन करने वाली विदिशा के पिता लेक्चरर थे। कोविड में पिता मनीष की मौत के बाद माता अमिता सिंह का धैर्य जवाब दे गया। आर्थिक तंगी के बीच थोड़ा सा साहस सरकारी मदद ने बंधाया। विदिशा की मां गृहिणी हैं। ऐसे में बेटी को लेकर उन्हें चिंता सताने लगी कि इसकी आगे पढ़ाई कैसे होगी। जैसे-तैसे हाईस्कूल उत्तीर्ण करने के बाद विदिशा की आगे की पढ़ाई ठहर गई। इसकी जानकारी स्कूल की प्रधानाचार्य अपर्णा सिंह को हुई तो वे विदिशा की मां से मिलीं और स्कूल से निशुल्क शिक्षा व सहयोग का आश्वासन दिया। इससे उन्हें संबल मिला और बेटी ने इंटर टॉप कर मां के अरमानों को भी पंख लगा दिए। विदिशा ने कहा कि वह डॉक्टर बनेगी। इसके लिए मां भी तैयार है। लिटिल फ्लावर्स स्कूल ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए सहयोग का आश्वासन दिया है।
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दूसरी ओर 10वीं में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाली प्रियदर्शनी का परिवार तो करीब छह माह से आर्थिक तंगी झेल रहा है। सितंबर 2022 में पिता डॉ. पीके सिंह की दुर्घटना में मौत से बेटी व मां सदमे में आ गईं। क्योंकि परिवार के कमाऊ सदस्य केवल पिता थे। मौत के 5 माह तक मां सुधबुध खो बैठी थीं, मगर परिवार को चलाने के लिए कुछ करने की जरूरत ने उनके कदम घर के बाहर निकाले। वह घर के निकट एक निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू कर दीं, मगर यहां वेतन बेहद कम था, जिससे परिवार का ही खर्च चलाना मुश्किल था। बेटी की प़ढ़ाई बाधित हो गई। स्कूल ने जब संपर्क साधा तो आर्थिक तंगी से बेटी की पढ़ाई न कराने की बात सुनकर स्कूल की ओर से प्रियदर्शनी को निशुल्क पढ़ाई की अनुमति दी गई। पिता की मौत से टूट चुकी प्रियदर्शनी ने बेहतर परिणाम दिया। प्रियदर्शनी की मां माला सिंह ने कहा कि स्कूल का सहयोग मिला तो बेटी पढ़ाई कर रही है। उसका लक्ष्य पिता की तरह चिकित्सक बनना है। हर हाल में उसके लिए मेहनत कर मुकाम हासिल करा दूंगी।

प्रियदर्शनी

प्रियदर्शनी

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