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Basti News: बेलगाम इस्तेमाल बना रही बीमार, अपराधियों का भी अड्डा
Sun, 30 Jun 2024 04:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 30 Jun 2024 04:32 AM IST
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विश्व सोशल मीडिया दिवस
सोशल मीडिया के चलते लोग हो रहे एंजाइटी, अनिद्रा, एकाकीपन, अवसाद आदि के शिकार
मीडिया जगत के लिए सूचनाओं का सबसे बड़ा स्रोत बना सोशल मीडिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पूरी दुनिया को एक मंच पर समेटने की ताकत रखने वाली सोशल मीडिया ने सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित किया है। साथ ही, साइबर अपराधों में भी इजाफा हुआ है। महिलाएं ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, अश्लील चैटिंग, जासूसी या साइबर अपराध की शिकार हो रही हैं। फेक न्यूज, अर्टिफिशिल इंटेलीजेंस, साइबर धोखाधड़ी के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं।
साइबर सेल और थानों में औसतन तीन से चार शिकायतें रोज आ रही हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया युवाओं और बच्चों के लिए जीवन का हिस्सा बन गई है। सही-गलत जानकारियों का अथाह सागर बनी सोशल मीडिया मुसीबत भी बन चुकी है। डाॅक्टर बताते हैं कि सोशल मीडिया के चलते लोग एंजाइटी, अनिद्रा, एकाकीपन, अवसाद आदि के शिकार हो रहे हैं।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक एके दुबे बताते हैं कि बच्चों से लेकर वृद्ध तबके में भी सोशल मीडिया रच-बस चुकी है। युवाओं में इसका क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है। इसके साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। ज्यादा समय तक जुड़े रहने से व्यक्ति की खुद की सोचने-समझने की शक्ति कम हो रही है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप पर राजनेता, प्रशासनिक अधिकारियों की जासूसी भी हो रही है। आईजी आरके भारद्वाज बताते हैं कि सोशल मीडिया पर निरंकुश होकर पोस्ट डालना जुर्म है। इसके जरिये अपराध भी बढ़ रहे हैं। कई आपराधिक गिरोह सोशल मीडिया का इस्तेमाल जुर्म के लिए करने लगे हैं।
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डीएम तक का बना डाले फर्जी अकाउंट
सोशल मीडिया पर फर्जी एकाउंट बनाकर धोखाधड़ी व अश्लीलता के मामलों की लगातार बाढ़ आ रही है। इतना ही नहीं, तत्कालीन डीएम की फेंक आईडी बनाकर लोगों को झांसा देने का मामला भी सामने आ चुका है। आए दिन फेसबुक मैसेंजर पर फर्जी आईडी से रुपये मांगने का भी चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया पर राजनैतिक, जातीय, क्षेत्र व भाषावाद को बढ़ाने के लिए कई तरह के पोस्ट भी डाल दिए जाते हैं। लोकसभा चुनाव व अयोध्या मंदिर प्रकरण में धार्मिक भावनाओं को भड़काने की पोस्ट काफी संख्या में आ रही हैं। ऐसे मामलों में एक साल में 72 केस दर्ज हो चुके हैं।
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यह है कानूनी प्रावधान
भारतीय कानून के तहत ऐसी कोई डायरेक्ट धारा नहीं है, जो सोशल मीडिया पर किसी भी भ्रामक, अफवाह फैलाने वाली, झूठी या भ्रामक पोस्ट को शेयर करने, फॉरवर्ड करने, साझा करने पर यूजर पर लगती हो। हालांकि, ऐसे दूसरे प्रावधान हैं, जो आई एक्ट और आईपीसी के तहत आपराधिक दायित्व तय करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक रूप में किसी भी आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री का प्रकाशन करने पर आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति की सजा को 3 सालो तक बढ़ाया जा सकता है। सिर्फ जेल ही नहीं, आरोपी पर जुर्माने का भी प्रावधान है। दूसरी बार या बाद की सजा के हालातों में सजा को बढ़ाकर पांच साल तक किया जा सकता है।
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बच्चों को यौन कृत्य में शामिल करने पर सजा
आईटी एक्ट की धारा 67 ए के तहत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बच्चों को यौन कृत्य में शामिल करने वाली सामग्री को शेयर करने, पब्लिश करने या फॉरवर्ड करने पर भी सजा हो सकती है। सजा के रूप में आरोपी को पांच साल के लिए जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार या दोबारा दोष साबित होने पर ये सजा सात साल बढ़ाई जा सकती है। जुर्माना भी बढ़ाया जा सकता है।
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अपमानजनक संदेश भेजने पर
आईपीसी की धारा 153A, 153B, 292, 295A और 499 के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ कोई अपमानजनक और आपत्तिजनक मैसेज साइबर वर्ल्ड में भेजता है तो इन धाराओं के तहत कार्रवाई बनती है। ऐसे अपमानजनक और आपत्तिजनक संदेशों में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करना, अश्लीलता फैलाना, धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना और मानहानि जैसे आरोप आते हैं। इन धाराओं के तहत अलग अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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सोशल मीडिया के चलते लोग हो रहे एंजाइटी, अनिद्रा, एकाकीपन, अवसाद आदि के शिकार
मीडिया जगत के लिए सूचनाओं का सबसे बड़ा स्रोत बना सोशल मीडिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पूरी दुनिया को एक मंच पर समेटने की ताकत रखने वाली सोशल मीडिया ने सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित किया है। साथ ही, साइबर अपराधों में भी इजाफा हुआ है। महिलाएं ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, अश्लील चैटिंग, जासूसी या साइबर अपराध की शिकार हो रही हैं। फेक न्यूज, अर्टिफिशिल इंटेलीजेंस, साइबर धोखाधड़ी के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं।
साइबर सेल और थानों में औसतन तीन से चार शिकायतें रोज आ रही हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया युवाओं और बच्चों के लिए जीवन का हिस्सा बन गई है। सही-गलत जानकारियों का अथाह सागर बनी सोशल मीडिया मुसीबत भी बन चुकी है। डाॅक्टर बताते हैं कि सोशल मीडिया के चलते लोग एंजाइटी, अनिद्रा, एकाकीपन, अवसाद आदि के शिकार हो रहे हैं।
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जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक एके दुबे बताते हैं कि बच्चों से लेकर वृद्ध तबके में भी सोशल मीडिया रच-बस चुकी है। युवाओं में इसका क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है। इसके साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। ज्यादा समय तक जुड़े रहने से व्यक्ति की खुद की सोचने-समझने की शक्ति कम हो रही है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप पर राजनेता, प्रशासनिक अधिकारियों की जासूसी भी हो रही है। आईजी आरके भारद्वाज बताते हैं कि सोशल मीडिया पर निरंकुश होकर पोस्ट डालना जुर्म है। इसके जरिये अपराध भी बढ़ रहे हैं। कई आपराधिक गिरोह सोशल मीडिया का इस्तेमाल जुर्म के लिए करने लगे हैं।
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डीएम तक का बना डाले फर्जी अकाउंट
सोशल मीडिया पर फर्जी एकाउंट बनाकर धोखाधड़ी व अश्लीलता के मामलों की लगातार बाढ़ आ रही है। इतना ही नहीं, तत्कालीन डीएम की फेंक आईडी बनाकर लोगों को झांसा देने का मामला भी सामने आ चुका है। आए दिन फेसबुक मैसेंजर पर फर्जी आईडी से रुपये मांगने का भी चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया पर राजनैतिक, जातीय, क्षेत्र व भाषावाद को बढ़ाने के लिए कई तरह के पोस्ट भी डाल दिए जाते हैं। लोकसभा चुनाव व अयोध्या मंदिर प्रकरण में धार्मिक भावनाओं को भड़काने की पोस्ट काफी संख्या में आ रही हैं। ऐसे मामलों में एक साल में 72 केस दर्ज हो चुके हैं।
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यह है कानूनी प्रावधान
भारतीय कानून के तहत ऐसी कोई डायरेक्ट धारा नहीं है, जो सोशल मीडिया पर किसी भी भ्रामक, अफवाह फैलाने वाली, झूठी या भ्रामक पोस्ट को शेयर करने, फॉरवर्ड करने, साझा करने पर यूजर पर लगती हो। हालांकि, ऐसे दूसरे प्रावधान हैं, जो आई एक्ट और आईपीसी के तहत आपराधिक दायित्व तय करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक रूप में किसी भी आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री का प्रकाशन करने पर आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति की सजा को 3 सालो तक बढ़ाया जा सकता है। सिर्फ जेल ही नहीं, आरोपी पर जुर्माने का भी प्रावधान है। दूसरी बार या बाद की सजा के हालातों में सजा को बढ़ाकर पांच साल तक किया जा सकता है।
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बच्चों को यौन कृत्य में शामिल करने पर सजा
आईटी एक्ट की धारा 67 ए के तहत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बच्चों को यौन कृत्य में शामिल करने वाली सामग्री को शेयर करने, पब्लिश करने या फॉरवर्ड करने पर भी सजा हो सकती है। सजा के रूप में आरोपी को पांच साल के लिए जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार या दोबारा दोष साबित होने पर ये सजा सात साल बढ़ाई जा सकती है। जुर्माना भी बढ़ाया जा सकता है।
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अपमानजनक संदेश भेजने पर
आईपीसी की धारा 153A, 153B, 292, 295A और 499 के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ कोई अपमानजनक और आपत्तिजनक मैसेज साइबर वर्ल्ड में भेजता है तो इन धाराओं के तहत कार्रवाई बनती है। ऐसे अपमानजनक और आपत्तिजनक संदेशों में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करना, अश्लीलता फैलाना, धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना और मानहानि जैसे आरोप आते हैं। इन धाराओं के तहत अलग अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान है।