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दो सौ शिक्षकों के तबादले रद्द होंगे
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Thu, 18 Aug 2016 11:12 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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लगभग दो साल पहले शिक्षामित्र से समायोजित होने वाले ऐसे दो सौ उन सहायक अध्यापकों का तबादला रद्द होने जा रहा है, जिन्होंने जुगाड़, राजनैतिक दबाव और धन के बल पर मूल तैनाती से इतर इच्छित स्थानों पर तबादला करवा लिया था। घर बैठक कर नौकरी करने वाले इन शिक्षकों को अब अपने मूल तैनाती वाले स्कूलों में जाना होगा। इस आशय का एक पत्र बेसिक शिक्षा सचिव की ओर से बस्ती सहित अन्य जनपदों के बीएसए को 17 अगस्त को जारी किया गया। पत्र मिलते ही बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई, आनन फानन में अनियमित रूप से किए गए तबादले की सूची बनाने के निर्देश दिए गए।
लगभग दो साल पहले एक लाख 70 हजार शिक्षामित्रों को सरकार ने सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया था, जनपद में इसका लाभ लगभग ढाई हजार शिक्षा मित्रों को भी मिला। समायोजित हो जाने के बाद जब शिक्षकों की तैनाती होने लगी तो उसमें लगभग दो सौ ऐसे शिक्षामित्र थे, जिनका तबादला दूसरे ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में कर दिया गया। जिससे उन्हें परेशानी होने लगी। कुछ दिन तक तो इन शिक्षकों ने अपना कार्य किया। इसी बीच हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन और नियुक्ति को अवैध मानते उसे निरस्त कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट गया, जहां पर उसकी सुनवाई 24 अगस्त 2016 को होनी है।
इसी बीच जनपद के लगभग दो सौ शिक्षकों ने कोर्ट के रोक लगाने के बावजूद अपना तबादला पहले वाले स्थान पर करवा लिया। जबकि इसमें कई शिक्षकों का एक साल का प्रोबेशन भी पूरा नहीं हुआ था। नियमानुसार प्रोबेशन का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही तबादला करने का प्राविधान है। हालांकि नियम विरुद्ध यह तबादला कमोवेश पूरे प्रदेश में हुआ, और जिसकी जांच भी प्रदेश स्तर पर चल रही है। इसमें कुछ जनपदों कें बीएसए सचिव के कहने पर तबादले को निरस्त भी कर चुके हैं, मगर बस्ती में अभी तक इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
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मामला उस समय गंभीर हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों के मामले में 24 अगस्त को बेसिक सचिव को तलब कर लिया। कहा जा रहा है कि तलब होने से पहले सचिव ने सभी बीएसए को कोर्ट के निर्णय के बाद किए गए तबादले को निरस्त करने का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कोर्ट के अवहेलना से बचने के लिए की जा रही है। इस मामले में एक खंड शिक्षा अधिकारी का कहना है कि तबादला निरस्त करना बीएसए की मजबूरी हो गई, वरना कोर्ट के अवहेलना करने के आरोप में कार्रवाई भी हो सकती है। बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि सचिव के आदेश का हर हाल में पालन किया जाएगा, और इसके लिए शिक्षकों की सूची बनाने का निर्देश दिया जा चुका है।
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लगभग दो साल पहले एक लाख 70 हजार शिक्षामित्रों को सरकार ने सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया था, जनपद में इसका लाभ लगभग ढाई हजार शिक्षा मित्रों को भी मिला। समायोजित हो जाने के बाद जब शिक्षकों की तैनाती होने लगी तो उसमें लगभग दो सौ ऐसे शिक्षामित्र थे, जिनका तबादला दूसरे ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में कर दिया गया। जिससे उन्हें परेशानी होने लगी। कुछ दिन तक तो इन शिक्षकों ने अपना कार्य किया। इसी बीच हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन और नियुक्ति को अवैध मानते उसे निरस्त कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट गया, जहां पर उसकी सुनवाई 24 अगस्त 2016 को होनी है।
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इसी बीच जनपद के लगभग दो सौ शिक्षकों ने कोर्ट के रोक लगाने के बावजूद अपना तबादला पहले वाले स्थान पर करवा लिया। जबकि इसमें कई शिक्षकों का एक साल का प्रोबेशन भी पूरा नहीं हुआ था। नियमानुसार प्रोबेशन का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही तबादला करने का प्राविधान है। हालांकि नियम विरुद्ध यह तबादला कमोवेश पूरे प्रदेश में हुआ, और जिसकी जांच भी प्रदेश स्तर पर चल रही है। इसमें कुछ जनपदों कें बीएसए सचिव के कहने पर तबादले को निरस्त भी कर चुके हैं, मगर बस्ती में अभी तक इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
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मामला उस समय गंभीर हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों के मामले में 24 अगस्त को बेसिक सचिव को तलब कर लिया। कहा जा रहा है कि तलब होने से पहले सचिव ने सभी बीएसए को कोर्ट के निर्णय के बाद किए गए तबादले को निरस्त करने का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कोर्ट के अवहेलना से बचने के लिए की जा रही है। इस मामले में एक खंड शिक्षा अधिकारी का कहना है कि तबादला निरस्त करना बीएसए की मजबूरी हो गई, वरना कोर्ट के अवहेलना करने के आरोप में कार्रवाई भी हो सकती है। बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि सचिव के आदेश का हर हाल में पालन किया जाएगा, और इसके लिए शिक्षकों की सूची बनाने का निर्देश दिया जा चुका है।