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बड़ी नोटों के बंद होने से मच गया हाहाकार
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Wed, 09 Nov 2016 11:24 PM IST
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पांच सौ और एक हजार का नोट न चलने के कारण सुना पड़ा कपड़े का शो रूम।
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मंगलवार रात जैसे ही पांच सौ और एक हजार के नोटों पर आधी रात से पाबंदी की खबर आई हाहाकार मच गया। रात में ही लोग जैसे तैसे नोटों को खपाने की जतन करने लगे। कुछ लोग एटीएम की ओर भागे तो कुछ पेट्रोल पंपों की ओर। बड़ी संख्या में लोग देर रात तक एटीएम में रुपया निकालते और जमा करते देखे गए। एक समय ऐसा आया जब एटीएम से सौ रुपये की नोट निकलनी बंद हो गई और मशीनों की रुपया जमा करने की क्षमता भी खत्म हो गई। वहीं रात 11 बजे तक पेट्रोल पंपो पर लाइन देखी गई।
वहीं बुधवार की सुबह बाजार औंधे मुंह गिर गए। अधिकांश दुकानें बंद नजर आई। शापिंग माल तो खुले मिले मगर उनमें सन्नाटा नजर आया। सर्राफा की अधिकांश दुकानें बंद नजर आई। दवा की दुकानें भी अधिकतर बंद मिलीं। अस्पतालों के आसपास दवा दुकाने खुली तो रहीं, मगर उन पर कोई खास बिक्री नहीं हुई। सब्जी मंडी में भी नोटों के बंद होने का असर दिखा। ऐसे लोग जिनके पास पांच सौ और हजार के नोट थे वह खरीददारी नहीं कर सके। डाकघर खुले तो रहे, पर वहां बंद हो चुके नोटों को जमा करने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। वहीं शहर में जगह जगह महज पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद करने की चर्चा होती रही। कोई इसे बेहतर कदम बता रहा था तो कोई आम आदमी को तत्कालिक नुकसान पहुंचाने वाला। हर आदमी अपने अपने हिसाब से पीएम मोदी के फैसले की समीक्षा कर रहा था।
इससे पहले मंगलवार की रात पीएम की घोषणा के बाद अधिकांश लोग सौ के नोट के चक्कर में एटीएम से चार सौ रुपए निकालते रहे। हालांकि अधिकांश एटीएम में सौ के नोट नहीं थे, मगर जिनमें थे उनमें उसे निकालने की होड़ लगी रही। पेट्रोल पंपों पर तेल भराने वालों की भी लंबी लाइनें थीं। कुछ ही देर बाद सेल्समैनों ने भी हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था कि लोग एक हजार की नोट लेकर सौ रुपये का पेट्रोल भरा रहे थे, ऐसे में उन्हे नौ सौ रुपये देना पड़ता था। बाद में पंप से उन्हींलोगों को तेल दिया गया जो पांच सौ या फिर हजार रुपये का तेल ले रहे थे। पांच सौ रुपये से कम का तेल लेने के चक्कर में कई पेट्रोल पंपो का ग्राहकों और सेल्समैनों के बीच नोंक झोंक हुई।
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इन दिनों मुस्लिम वर्ग में लगन चल रहा है। बैंकों और एटीएम से हजार पांच सौ के नोट निकालकर शादी के लिए खरीददारी की तैयारी कर रहे परिवारों की मुसीबत बढ़ गई। कटरा निवासी मोहम्मद आजम कहते हैं कि उनके परिवार में बेटी की शादी है, ऐन मौके पर बड़ी नोटों के बंद होने से परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
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वहीं बुधवार की सुबह बाजार औंधे मुंह गिर गए। अधिकांश दुकानें बंद नजर आई। शापिंग माल तो खुले मिले मगर उनमें सन्नाटा नजर आया। सर्राफा की अधिकांश दुकानें बंद नजर आई। दवा की दुकानें भी अधिकतर बंद मिलीं। अस्पतालों के आसपास दवा दुकाने खुली तो रहीं, मगर उन पर कोई खास बिक्री नहीं हुई। सब्जी मंडी में भी नोटों के बंद होने का असर दिखा। ऐसे लोग जिनके पास पांच सौ और हजार के नोट थे वह खरीददारी नहीं कर सके। डाकघर खुले तो रहे, पर वहां बंद हो चुके नोटों को जमा करने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। वहीं शहर में जगह जगह महज पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद करने की चर्चा होती रही। कोई इसे बेहतर कदम बता रहा था तो कोई आम आदमी को तत्कालिक नुकसान पहुंचाने वाला। हर आदमी अपने अपने हिसाब से पीएम मोदी के फैसले की समीक्षा कर रहा था।
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इससे पहले मंगलवार की रात पीएम की घोषणा के बाद अधिकांश लोग सौ के नोट के चक्कर में एटीएम से चार सौ रुपए निकालते रहे। हालांकि अधिकांश एटीएम में सौ के नोट नहीं थे, मगर जिनमें थे उनमें उसे निकालने की होड़ लगी रही। पेट्रोल पंपों पर तेल भराने वालों की भी लंबी लाइनें थीं। कुछ ही देर बाद सेल्समैनों ने भी हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था कि लोग एक हजार की नोट लेकर सौ रुपये का पेट्रोल भरा रहे थे, ऐसे में उन्हे नौ सौ रुपये देना पड़ता था। बाद में पंप से उन्हींलोगों को तेल दिया गया जो पांच सौ या फिर हजार रुपये का तेल ले रहे थे। पांच सौ रुपये से कम का तेल लेने के चक्कर में कई पेट्रोल पंपो का ग्राहकों और सेल्समैनों के बीच नोंक झोंक हुई।
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इन दिनों मुस्लिम वर्ग में लगन चल रहा है। बैंकों और एटीएम से हजार पांच सौ के नोट निकालकर शादी के लिए खरीददारी की तैयारी कर रहे परिवारों की मुसीबत बढ़ गई। कटरा निवासी मोहम्मद आजम कहते हैं कि उनके परिवार में बेटी की शादी है, ऐन मौके पर बड़ी नोटों के बंद होने से परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।