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हर्रैया में ही मिलेगा बिजली ट्रांसफॉर्मर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2016 11:54 PM IST
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ट्रांसफार्मर।
- फोटो : अमर उजाला
बस्ती। हर्रैया विधानसभा क्षेत्र के लोगों को अब बिजली का ट्रांसफार्मर जल जाने के बाद न तो बस्ती आना पड़ेगा और न ही कोई परेशानी उठानी पड़ेगी। कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह की पहल पर विभाग ने 10 से सौ केवीए के ट्रांसफॉर्मर हर्रैया में ही उपलब्ध हो जाएंगे। मुख्य अभियंता सीपी गुप्त ने बताया कि हर्रैया में फिलहाल 25 ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध हैं। रविवार को कुछ लोग ले भी गए हैं।
मुख्य अभियंता ने बताया कि इस व्यवस्था के लागू हो जाने से क्षेत्र के लोगोें को 24 घंटे के अंदर जला हुआ ट्रांसफॉर्मर बदला जा सकता है। बिजली के जले हुए ट्रांसफॉर्मर को बदलवाना अभी तक उपभोक्ताओं के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था, उपभोक्ताओं का आरोप है कि एक जले हुए ट्रांसफॉर्मर को बदलने के लिए गांव वालों को एक माह से अधिक समय लग जाता था, कभी कभी तो इससे अधिक समय लग जाता था।
उपभोक्ता हर्रैया के उपभोक्ता कलाम अहमद, कन्हैयालाल, रामशंकर यादव और रविचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अगर कोई ट्रांसफॉर्मर जल जाता है तो अव्वल वह जल्दी बदला नहीं जाता है, अगर बदला जाता है तो उसके लिए तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। उसके बाद गांव वालों को खुद जिला मुख्यालय जाकर ट्रैक्टर ट्राली में लादकर गांव तक लाना पड़ता है। गांव में जब ट्रांसफॉर्मर पहुंच जाता है, तो उसे लगवाने के लिए अलग से रकम देनी पड़ती है। बताया कि इस तरह ट्रांसफॉर्मर जलने का सबसे अधिक लाभ विभाग के लोग ही उठाते हैं।
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मुख्य अभियंता ने बताया कि इस व्यवस्था के लागू हो जाने से क्षेत्र के लोगोें को 24 घंटे के अंदर जला हुआ ट्रांसफॉर्मर बदला जा सकता है। बिजली के जले हुए ट्रांसफॉर्मर को बदलवाना अभी तक उपभोक्ताओं के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था, उपभोक्ताओं का आरोप है कि एक जले हुए ट्रांसफॉर्मर को बदलने के लिए गांव वालों को एक माह से अधिक समय लग जाता था, कभी कभी तो इससे अधिक समय लग जाता था।
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उपभोक्ता हर्रैया के उपभोक्ता कलाम अहमद, कन्हैयालाल, रामशंकर यादव और रविचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अगर कोई ट्रांसफॉर्मर जल जाता है तो अव्वल वह जल्दी बदला नहीं जाता है, अगर बदला जाता है तो उसके लिए तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। उसके बाद गांव वालों को खुद जिला मुख्यालय जाकर ट्रैक्टर ट्राली में लादकर गांव तक लाना पड़ता है। गांव में जब ट्रांसफॉर्मर पहुंच जाता है, तो उसे लगवाने के लिए अलग से रकम देनी पड़ती है। बताया कि इस तरह ट्रांसफॉर्मर जलने का सबसे अधिक लाभ विभाग के लोग ही उठाते हैं।
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