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बंधे पर पहुंचा प्रशासनिक अमला
अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 15 Jul 2016 11:40 PM IST
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डीएम बंधे पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया।
- फोटो : अमर उजाला
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लोलपुर- विक्रमजोत बंधे का कुछ भाग कटने और स्पर बहने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। शुक्रवार को डीएम नरेंद्र सिंह पटेल, एसपी कृपाशंकर सिंह बंधे पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता संजीव सिंह को कटान पर नियंत्रण की हिदायत दी।
विक्रमजोत-लोलपुर बंधे पर स्थित गौरिया नयन गांव के पास बुधवार रात दो स्पर सरयू की धार से क्षतिग्रस्त हो गए तथा बांध का एक किनारा कुछ दूर तक कटकर नदी में समा गया। गांव वालों की सूचना पर जेई मजदूरों और बोल्डर के साथ पहुंचे थे। जिम्मेदारों की लापरवाही पर गांवों में नाराजगी थी। शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने पर जिला का प्रशासनिक अमला बंधे पर नजर आया। डीएम, एसपी के साथ एसडीएम हर्रैया ने भी मौके का जायजा लिया। तट बंध के किनारे बसे गांव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अधिशाषी अंभियंता को स्थिति पर नजर रखने को कहा।
10 किलोमीटर तक प्रस्तावित था बांध
विक्रमजोत ब्लॉक के दर्जनों गांव और राष्ट्रीय राजमार्ग को बाढ़ की क्षति से बचाने के लिए शासन ने लोलपुर(गोंडा) से विक्रमजोत तक 10.300 किमी तक बांध निर्माण की संस्तुति दी। 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए। लेटलतीफी और विभागीय उदासीनता के चलते महज 1500 मीटर ही निर्माण हो सका। प्रस्तावित बंधे से नदी की दूरी करीब चार किलोमीटर थी लेकिन इन चार सालों में नदी और गांव के बीच दूरी महज 50 मीटर ही रह गई।गांवों को सरयू की मुख्य धारा से बचाने के लिए नौ स्पर बनाए गए जिसमें पिछले वर्ष चार ध्वस्त हो गए।
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राजनीति से हुआ नुकसान
2014 में जैसे ही लोलपुर-विक्रमजोत बांध निर्माण का कार्य शुरू हुआ मुंडेरी गांव से विरोध शुरू हो गया। कारण किसानों को उचित मुआवजा न मिलना रहा। प्रस्तावित बांध के अंदर कल्याणपुर गांव को लाने के लिए कुछ राजनेताओं के सह पर गांव वालों ने तहसील से लेकर डीएम कार्यालय परिसर तक धरना प्रदर्शन भी शुरू कर दिया। गांव वालों की माने तो राजस्थान से आए बांध निर्माण के मजदूरों को भगा दिया गया। बांध के अंदर कल्याणपुर को करने के लिए ग्रामीणों का समूह कमिश्नर कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। तब तक बाढ़ का मौसम आ गया और तीन गांवों की सुरक्षा ही हो सकी। कुल 10.300 किलो मीटर की जगह महज डेढ़ किलोमीटर तक ही बांध बन पाया है।
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विक्रमजोत-लोलपुर बंधे पर स्थित गौरिया नयन गांव के पास बुधवार रात दो स्पर सरयू की धार से क्षतिग्रस्त हो गए तथा बांध का एक किनारा कुछ दूर तक कटकर नदी में समा गया। गांव वालों की सूचना पर जेई मजदूरों और बोल्डर के साथ पहुंचे थे। जिम्मेदारों की लापरवाही पर गांवों में नाराजगी थी। शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने पर जिला का प्रशासनिक अमला बंधे पर नजर आया। डीएम, एसपी के साथ एसडीएम हर्रैया ने भी मौके का जायजा लिया। तट बंध के किनारे बसे गांव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अधिशाषी अंभियंता को स्थिति पर नजर रखने को कहा।
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10 किलोमीटर तक प्रस्तावित था बांध
विक्रमजोत ब्लॉक के दर्जनों गांव और राष्ट्रीय राजमार्ग को बाढ़ की क्षति से बचाने के लिए शासन ने लोलपुर(गोंडा) से विक्रमजोत तक 10.300 किमी तक बांध निर्माण की संस्तुति दी। 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए। लेटलतीफी और विभागीय उदासीनता के चलते महज 1500 मीटर ही निर्माण हो सका। प्रस्तावित बंधे से नदी की दूरी करीब चार किलोमीटर थी लेकिन इन चार सालों में नदी और गांव के बीच दूरी महज 50 मीटर ही रह गई।गांवों को सरयू की मुख्य धारा से बचाने के लिए नौ स्पर बनाए गए जिसमें पिछले वर्ष चार ध्वस्त हो गए।
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राजनीति से हुआ नुकसान
2014 में जैसे ही लोलपुर-विक्रमजोत बांध निर्माण का कार्य शुरू हुआ मुंडेरी गांव से विरोध शुरू हो गया। कारण किसानों को उचित मुआवजा न मिलना रहा। प्रस्तावित बांध के अंदर कल्याणपुर गांव को लाने के लिए कुछ राजनेताओं के सह पर गांव वालों ने तहसील से लेकर डीएम कार्यालय परिसर तक धरना प्रदर्शन भी शुरू कर दिया। गांव वालों की माने तो राजस्थान से आए बांध निर्माण के मजदूरों को भगा दिया गया। बांध के अंदर कल्याणपुर को करने के लिए ग्रामीणों का समूह कमिश्नर कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। तब तक बाढ़ का मौसम आ गया और तीन गांवों की सुरक्षा ही हो सकी। कुल 10.300 किलो मीटर की जगह महज डेढ़ किलोमीटर तक ही बांध बन पाया है।