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Basti News: 96 लाख की हेराफेरी मामले की जांच तीन माह बाद भी बेनतीजा
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बस्ती। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में हुई सेंधमारी की जांच करीब तीन माह बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। जांच टीम का कहना है कि 96 लाख रुपये किन लोगों के खाते में भेजे गए यह स्पष्ट करने के लिए अभी कुछ और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच सुस्त होने के चलते सेंधमारी में शामिल जालसाजों तक पहुंचने में अभी वक्त लग सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मातृ वंदना योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों के खाते में रकम भेजकर करीब 96 लाख रुपये की हेराफेरी की गई थी। आंकड़ों के अनुसार, रुधौली विकास खंड में 17 सौ से अधिक खातों में दूसरी किस्त के रूप में छह-छह हजार रुपये भेजे गए थे। हालांकि, बताया गया कि इनमें डेढ़ से दो सौ ही पात्र लाभार्थी होंगे, शेष कहां से इतने लाभार्थी इस ब्लॉक में आ गए, इसको लेकर विभाग खुद परेशान हो गया था।
प्रारंभिक जांच में ही यह मामला पकड़ में आया था। इसके बाद डीएम ने पूरे प्रकरण के जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जांच टीम में शामिल सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, सीटीओ अशोक कुमार प्रजापति और जिला सूचना विज्ञान अधिकारी शामिल हैं, हालांकि अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे मामला लटका हुआ है।
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जांच टीक का कहना है कि जांच रिपोर्ट अंतिम चरण में है। जल्द ही इसे प्रेषित कर दिया जाएगा। कुछ अभिलेख का शामिल किया जाना शेष है। वहीं, डीपीओ राजेश कुमार का कहना है कि अभी तक विभाग को इस संबंध में कोई जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
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सूत्रों के अनुसार, मातृ वंदना योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों के खाते में रकम भेजकर करीब 96 लाख रुपये की हेराफेरी की गई थी। आंकड़ों के अनुसार, रुधौली विकास खंड में 17 सौ से अधिक खातों में दूसरी किस्त के रूप में छह-छह हजार रुपये भेजे गए थे। हालांकि, बताया गया कि इनमें डेढ़ से दो सौ ही पात्र लाभार्थी होंगे, शेष कहां से इतने लाभार्थी इस ब्लॉक में आ गए, इसको लेकर विभाग खुद परेशान हो गया था।
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प्रारंभिक जांच में ही यह मामला पकड़ में आया था। इसके बाद डीएम ने पूरे प्रकरण के जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जांच टीम में शामिल सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, सीटीओ अशोक कुमार प्रजापति और जिला सूचना विज्ञान अधिकारी शामिल हैं, हालांकि अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे मामला लटका हुआ है।
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जांच टीक का कहना है कि जांच रिपोर्ट अंतिम चरण में है। जल्द ही इसे प्रेषित कर दिया जाएगा। कुछ अभिलेख का शामिल किया जाना शेष है। वहीं, डीपीओ राजेश कुमार का कहना है कि अभी तक विभाग को इस संबंध में कोई जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।